महात्मा गांधी ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना के अंतर्गत शासन के निर्देशों के बावजूद 45 हजार से अधिक जॉब कार्डों पर जॉब कार्ड धारक परिवार के फोटो चस्पा नहीं किए गए।
काम की तलाश में बड़े शहरों की ओर पलायन करने वालों की संख्या कम करने व ग्रामीण इलाकों में ही रोजगार देने के उद्देश्य से केंद्र सरकार ने महात्मा गांधी ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम शुरू किया। योजना का उद्देश्य तो बहुत अच्छा है पर अधिकारी, कर्मचारी व जनप्रतिनिधियों ने घालमेल करना प्रारंभ कर दिए, जिस पर लगाम लगाने के लिए एमआईएस सिस्टम आदि लागू किया गया। जांच के दौरान कई बार यह भी पाया गया कि जनप्रतिनिधि जॉब कार्ड अपने पास रखकर मनमाने ढंग से मजदूरी अंकित कर देते हैं। यहीं नहीं जॉब कार्ड धारक के स्थान पर अपने लोगों को खड़ा करके मजदूरी मिलने का सत्यापन भी करवा दिया जाता है। इस प्रवृत्ति को बढ़ते देख शासन ने जॉब कार्डों में जॉब कार्ड धारक परिवारों के फोटो अनिवार्य रूप से चस्पा करने के निर्देश दिए, ताकि फोटो से व्यक्ति की पहचान हो जाए। लेकिन विभागीय अधिकारियों की लापरवाही के कारण 45 हजार से अधिक जॉब कार्डों पर जॉब कार्ड धारक परिवार के फोटो चस्पा नहीं हो सके हैं। ब्लाक स्तर पर बार ब्लाक में 5118, बिरधा ब्लाक में 7369, जखौरा ब्लाक में 16895, मडावरा ब्लाक में 7068, महरौनी में 7873 व तालबेहट ब्लाक में 2208 जॉब कार्डों पर धारक परिवार के फोटो चस्पा नहीं किए जा सके हैं। इस लिहाज से देखा जाए तो जनपद में 46531 फोटो विहीन जॉब कार्डों पर काम लिया जा रहा हैं।
33 हजार परिवारों के नहीं हैं बैंक खाते
सिलावन(ललितुपर)। जनपद में 33 हजार से अधिक जॉब कार्ड धारक परिवार ऐसे हैं जिनके बैंक में खाते नहीं हैं। जनपद में विकास विभाग रजिस्टर्ड जॉब कार्ड धारक परिवारों के बैंक खाते खुलवाने में गंभीरता नहीं दिखा रहा हैं। विकास खंड बार में 5158, बिरधा में 3526, जखौरा में 2585, मडावरा में 6993, महरौनी में 12198 व तालबेहट में 3439 जाबकार्ड धारक परिवार के बैंक खाते नहीं हैं। इस तरह से जनपद में कुल 33899 जॉब कार्ड धारक परिवार के बैंक खाते नहीं हैं।