अस्पताल में धूल फांक रही फेको मशीन
नेत्र विशेषज्ञ के स्थानांतरण के बाद से बंद पड़ी फेको मशीन, आपरेशन की संख्या घटी
अमर उजाला ब्यूरो
ललितपुर। जिला अस्पताल में नेत्र विशेषज्ञ के स्थानांतरण के पश्चात से फेको मशीन धूल फांक रही है। इसके चलते अस्पताल में पुरानी पद्धति से ही मोतियाबिंद व माइनर ऑपरेशन किए जाने लगे हैं। इससे मरीजों की परेशानी बढ़ने लगी है। वहीं, कई मरीज निजी अस्पताल में उपचार कराने को मजबूर हैं। वर्ष 2016 में लगभग 12 सौ ऑपरेशन, वर्ष 2017 में 950 ऑपरेशन व 2018 में 654 ऑपरेशन जिला अस्पताल में किए गए। इससे फेको मशीन के अभाव का अंदाजा लगाया जा सकता है।
शासन ने भले ही जिला अस्पताल में मोतियाबिंद के ऑपरेशन के लिए फेंको मशीन से लैस किया हो, लेकिन विशेषज्ञों की कमी के चलते यह फेको मशीन धूल फांक रही है। वर्ष 2017 के अंत में जिला अस्पताल में मोतियाबिंद के ऑपरेशन को सफल बनाने के लिए फेको मशीन की आपूर्ति की गई। इससे जिला अस्पताल आने वाले मोतियाबिंद के मरीजों के ऑपरेशन की सुविधा सुलभ हो सके। लेकिन मशीन क्रय के बाद इस मशीन से लगभग जनवरी माह में ही कुछ ही ऑपरेशन हो सके। इसके बाद फेको मशीन को ऑपरेट करने वाले चिकित्सक का स्थानांतरण हो गया। एक वर्ष बीतने के बाद भी इस मशीन को ऑपरेट करने के लिए किसी चिकित्सक की तैनाती नहीं हुई। इसके बीते एक वर्ष से यह मशीन केवल शोपीस बन कर रह गई। इसके अलावा ऑपरेशनों की संख्या प्रत्येक वर्ष लगातार घटती जा रही है। बीते वर्ष 2016 में लगभग 12 सौ ऑपरेशन, वर्ष 2017 में 950 ऑपरेशन व 2018 में 654 ऑपरेशन जिला अस्पताल में किए गए। इससे फेको मशीन का अभाव उ उ लगातार स्पष्ट नजर आ रहा है। वहीं पुरानी पद्घति से मोतियाबिंद के ऑपरेशन होने से मरीजों को ठीक होने में लगभग आठ दिन का समय लगता है। इसके साथ ही कई बार यदि मरीज बताई गई सावधानी पर ध्यान नहीं दें तो मरीज की समस्या बढ़ जाती है। इस ऑपरेशन में मरीज को चश्मा की अधिक आवश्यकता होती है। इसके चलते कुछ मरीज मजबूरन निजी अस्पतालों की ओर रुख कर रहे हैं। एक वर्ष बीतने के बाद भी अस्पताल प्रबंधन द्वारा इस ओर ध्यान नहीं दिया जा रहा है। इससे मोतियाबिंद के मरीजों को ऑपरेशन कराने के लिए परेशान होना पड़ रहा है। जिला अस्पताल के नेत्र रोग विशेषज्ञ डा. एलबी गुप्ता ने बताया कि फेंको ऑपरेट करने के योग्यता रखते हैं। केवल शासन द्वारा प्रशिक्षण दिलाने की आवश्यकता है। इसके बाद वह फेको ऑपरेट कर ऑपेरशन करना शुरु कर सकेंगे।
फेको से ऐसे होते आपरेशन
इस मशीन से ऑपरेशन में एक हल्का छेद करके आंख में नया लैंस डाल दिया जाता है। इसमें चश्मा लगाने की भी सलाह दी जाती है। ऑपरेशन के लगभग चार घंटे में ही पट्टी को हटा दिया जाता है। फेको मशीन से एक दिन में लगभग सौ ऑपरेशन किए जा सकते हैं। इसमें आपरेशन असफल होने की संभावना न के बराबर रहती है।
सीटी स्केन भी नहीं हो पाई चालू
जिला अस्पताल में सीटी स्केन मशीन अभी तक चालू नहीं हो पाई है। फरवरी माह 2018 में आई थी लेकिन अस्पताल प्रबंधन इससे मरीजों की जांच प्रारंभ नहीं कर सका है। अन्य जांचों का भी यही हाल है। जिससे मरीजों की परेशानी कम नहीं हुई हैं।
फेंको मशीन डा. पंकज त्रिपाठी के स्थानांतरण से बंद पड़ी है। जिसके ऑपरेट करने के लिए डा. एलबी गुप्ता को प्रशिक्षण दिलवाए जाने के लिए शासन को पत्राचार किया गया है। शासन से अनुमति मिलते ही प्रशिक्षण दिलाया जाएगा। जिससे जिला अस्पताल में फेंको से ऑपरेशन की सुविधा मिलेगी।
डॉ. एसके वासवानी, मुख्य चिकित्सा अधीक्षक, जिला अस्पताल ललितपुर
फेंको मशीन को ऑपरेट करने के लिए प्रशिक्षण की आवश्यकता होती है। प्रशिक्षण के लिए जिला अस्पताल के नेत्र रोग विशेषज्ञ डा. एलबी गुप्ता जा रहे हैं। जिसके बाद मशीन का संचालन किया जाएगा।
डा. प्रताप सिंह, मुख्य चिकित्सा अधिकारी