टैंकरों के पानी का व्यावसायिक उपयोग
ललितपुर।
शहर में पेयजल संकट से ग्रस्त इलाकों की जनता को पीने के लिए पानी नसीब नहीं हो पा रहा है। जल संस्थान के कुछ कर्मचारी अधिकारियों की नाक के नीचे से ही जनता को की जाने वाली जलापूर्ति में से पानी को बेच रहे हैं। आलम यह है कि किल्लत के दिनों में जनता को दो-तीन दिन तक पानी नहीं मिल रहा है।
गर्मी के मौसम में पानी के संकट को देखते हुए शासनादेश के क्रम में विगत अप्रैल माह से जल संस्थान व जल निगम के टैंकरों का व्यवसायिक उपयोग पूरी तरह से बंद कर दिया गया है, ताकि उक्त सभी टैंकरों के माध्यम से पानी की समस्या वाले क्षेत्र में जलापूर्ति की जा सके। जल संस्थान की माने तो शहर के लगभग आधा दर्जन मुहल्लों में हर रोज पच्चीस से तीस टैंकर पानी की आपूर्ति की जा रही है, जबकि वास्तविकता यह है कि जनता को की जाने वाली जलापूर्ति की आड़ में जल संस्थान के कुछ कर्मचारियों के द्वारा पानी का व्यापार किया जा रहा है। जल संस्थान के कर्मचारी हर रोज पानी से भरा टैंकर लेकर वाटर वर्क्स से निकलते तो हैं, लेकिन निर्धारित स्थल पर पहुंचते नहीं हैं। कुछ कर्मचारी अपने निजी स्वार्थ के लिए टैंकर के पानी को बेच रहे हैं। सबसे अधिक निर्माण कार्यों के लिए पानी बेचा जा रहा है। एक टैंकर पानी पांच सौ से लेकर एक हजार रुपए तक बेचा जाता है। शहर में ऐसे कई भवन निर्माण हो रहे हैं जिनके बाहर हर रोज जल संस्थान का टैंकर खड़ा रहता है। शहर तो ठीक है ग्रामीण इलाकों में भी रुपए लेकर पानी पहुंचाया जा रहा है। वहीं, वर्तमान में शहर में नगर पालिका की जिन सीसी रोड का निर्माण कार्य किया जा रहा है उसमें भी ठेकेदारों द्वारा पानी के टैंकरों का ही उपयोग किया जाता है। सबसे ज्यादा पानी का व्यापार नेहरु नगर क्षेत्र में होने वाली आपूर्ति की आड़ में हो रहा है। जल संस्थान के अनुसार नेहरु नगर क्षेत्र में हर रोज 17 टैंकर पानी भेजे जा रहे हैं, जबकि वास्तविकता यह है कि क्षेत्र की जनता को दो-तीन दिनों तक पानी नसीब नहीं हो पा रहा है। इसके अलावा आधा दर्जन स्थल भी ऐसे नहीं जहां पर नियमित रुप से टैंकर पहुंच रहे हैं। सोमवार को जल संस्थान ने अपना टैंकर नेहरु नगर क्षेत्र के मुहल्ला सुवनी के लिए भेजा, लेकिन यह टैंकर मुहल्ले में पहुंचने की जगह ग्राम महेशपुरा में हो रहे भवन निर्माण कार्य में सेवा देने पहुंच गया। इसी तरह सोमवार को ही शहर के मुहल्ला खिरकापुरा में बनाई जा रही सड़क के निर्माण में जल संस्थान के टैंकर का ही उपयोग किया जा रहा था। जिम्मेदार अपनी कमाई में जुटे हुए हैं, वहीं जरुरत मंदों को पानी नसीब नहीं हो पा रहा है।
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कहां जा रहे हैं रुपए
शहर में खुलेआम सरकारी टैंकरों का उपयोग व्यवसायिक कार्यों में किया जा रहा है। यहां यह सवाल खड़ा होता है कि जब विभाग के रिकार्ड में अप्रैल माह से टैंकरों का व्यवसायिक उपयोग बंद है तो फिर बेचे जा रहे पानी का पैसा कहां जा रहा है। बिना अधिकारियों की सांठगाठ के शहर में खुलेआम चल रहा पानी का यह खेल अकेले कर्मचारियों के बस की बात नहीं है।
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फोटो- 02 मीरा राजपूत
तीन दिन में एक बार आता है टैंकर
हर रोज मुहल्लेवासी पानी के टैंकर के आने का इंतजार करते हैं, लेकिन दो-तीन दिन में एक बार ही टैंकर आता है। टैंकर नहीं आने के कारण काफी परेशानी झेलनी पड़ती है।
-मीरा राजपूत
निवासी सिवनी मुहल्ला।
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फोटो- 03 सरोज
अधिकारियों करना चाहिए निगरानी
अधिकारियों की नजरों में नियमित रुप से जलापूर्ति की जा रही है, लेकिन हकीकत तो यह है कि पानी का टैंकर लाने वाले लोग रास्ते में ही कहीं पर भी पानी बेच देते हैं। इसके लिए जिम्मेदार अधिकारियों को क्षेत्र में निरीक्षण भी करना चाहिए।
-सरोज
निवासी मुहल्ला जुगपुरा
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फोटो- 04 कपूरी बाई
इंतजार में बीत जाता दिन
टैंकर आने का इंतजार करते-करते ही पूरा दिन बीत जाता है, लेकिन पानी नसीब नहीं हो पाता है। दिन में एक टैंकर पानी भी मुहल्ले के लिए पर्याप्त नहीं होता है, लेकिन यहां तो दो-तीन दिन में मात्र एक टैंकर आता है। इससे स्थिति का अंदाजा लगाया जा सकता है।
-कपूरी बाई
मुहल्ला जुगपुरा निवासी।
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इनका कहना है
विभाग की ओर से व्यावसायिक उपयोग में टैंकरों से आपूर्ति बंद है। यदि किसी कर्मी या ड्राइवर द्वारा चोरी-छिपे पानी बेचा जा रहा है, तो जल्द ही पता करते उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
-वीके श्रीवास्तव
अधिशासी अभियंता जल संस्थान, ललितपुर।