ललितपुर। गेहूं खरीद केंद्रों पर अपनी उपज बेचने वाले किसानों का समय से भुगतान नहीं हो पा रहा है। जिस कारण विभिन्न संस्थाओं पर किसानों का भुगतान का बकाया बढ़ता ही जा रहा है। वर्तमान में संस्थाओं पर 40 करोड़ रुपये की देनदारी हो गई है।
किसानों को सरकारी समर्थन मूल्य का लाभ लेना मुश्किल हो रहा है। भुगतान में हो लेटलतीफी से किसानों का मोह भंग होने लगा है। सैकड़ों की संख्या में किसान अपना गेहूं लेकर गल्ला मंडी पहुंचने लगे हैं। किसानों का मानना है कि गल्ला मंडी में उपज का तुरंत भुगतान हो जाता है और कहीं चक्कर भी नहीं लगाने पड़ते हैं जबकि खरीद केंद्रों पर गेहूं बेचने के बाद कार्यालयों के चक्कर लगाने पड़ते हैं, तब जाकर भुगतान मिल पाता है।
विभागीय आंकड़ों पर गौर करें तो जिले में 92500 मीट्रिक टन के सापेक्ष 52370.68 मीट्रिक टन गेहूं खरीदा गया है जो लक्ष्य का 56.62 प्रतिशत है। क्रय एजेंसियों ने अभी तक 5983.901 लाख रुपये का ही भुगतान किया है, जबकि 4097.455 लाख रुपये का बकाया है। इससे किसान परेशान घूम रहे हैं। हालांकि, विभागीय अफसरों का कहना है कि किसानों का भुगतान कराया जा रहा है। इसमें पीसीएफ ने 70 प्रतिशत, खाद्य विभाग ने 90 प्रतिशत, मल्टीस्टेट कंपनियों ने 75 प्रतिशत व एफसीआई ने शत- प्रतिशत भुगतान कर दिया है। अवशेष भुगतान की भी कार्रवाई चल रही है।
16356.98 मीट्रिक गेहूं का उठान बाकी
जिले के गेहूं खरीद केंद्रों पर खरीदे गए 52370.68 मीट्रिक टन गेहूं में से 16356.98 मीट्रिक टन का उठान किया जाना अभी अवशेष है। इससे गेहूं के उठान का अंदाजा लगाया जा सकता है। उधर, सहायक निबंधक सहकारिता रमेश कुमार गुप्ता ने उठान में तेजी लाने के लिए रोस्टर बनाया है। इसमें उन केंद्रों से गेहूं उठाने में प्राथमिकता दिखाई जा रही है, जहां पर गेहूं अधिक रखा हुआ है और खरीद प्रभावित हो रही है। सोमवार को 90 ट्रक गेहूं को अनलोड किया गया। मंगलवार को 72 ट्रक उतारे गए। बुधवार की शाम तक 80 ट्रक गेहूं गोदामों में पहुंच चुका था।
पीसीएफ के क्रय केंद्रों पर खरीद को सुचारू बनाने के लिए खरीदे माल को प्राथमिकता से उठवाया जा रहा था। अब अपर जिलाधिकारी के निर्देश पर मल्टीस्टेट कंपनियों के खरीदे गेहूं की भी डिलीवरी आरंभ करा दी गई है। रोज उनके दो ट्रक गेहूं गोदामों में उतारे जाएंगे। किसानों के भुगतान की प्रक्रिया चल रही है।
- राकेश कुमार त्रिपाठी, जिला खाद्य विपणन अधिकारी