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निरीक्षण: उद्योग विभाग के कार्यालय में अव्यवस्थाओं का अंबार

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उद्योग विभाग में अव्यवस्थाओं का अंबार
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कार्यालय में गायब मिले कर्मचारी, फाइलें मिलीं बेतरतीब
डीएम ने किया स्पष्टीकरण तलब और सुधार के निर्देश
अमर उजाला ब्यूरो
ललितपुर। जिलाधिकारी मानवेंद्र सिंह ने मंगलवार को उपायुक्त, उद्योग और उद्यम प्रोत्साहन केंद्र कार्यालय का आकस्मिक निरीक्षण किया। इस दौरान कार्यालय में काफी अनियमितताएं मिलीं। वहीं, एक अधिकारी बिना सूचना के अनुपस्थित मिले। जिलाधिकारी ने कार्रवाई के लिए शासन को पत्र लिखने के निर्देश दिए।
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औचक निरीक्षण करने पहुंचे जिलाधिकारी को कार्यालय में अपर सांख्यिकीय अधिकारी एसके सूर्यवंशी अनुपस्थित मिले। कर्मचारियों ने बताया कि वह आकस्मिक अवकाश पर हैं, लेकिन अवकाश संबंधी प्रार्थनापत्र नहीं मिला और न ही रजिस्टर में अवकाश दर्ज था। इस पर जिलाधिकारी ने उनके खिलाफ कार्रवाई करने के निर्देश दिये। निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी ने उपायुक्त उद्योग से उनका सक्षम स्तर से निर्गत पदोन्नति का आदेश लाने को कहा, लेकिन आदेश नहीं मिला बल्कि मोबाइल से आदेश मिलने की बात कही गई। इस पर उन्होंने मेल या डाक के माध्यम से आदेश मंगाने के निर्देश दिए। इसके उपरान्त अधिकारियों-कर्मचारियों के कार्य विभाजन का विवरण भी नहीं दिखा सके। गरिमा मिश्रा से उनके कार्य दायित्व के संबंध में पूछने पर बताया कि वह संयुक्त आयुक्त उद्योग के निर्देश पर तीन दिन व तीन दिन झांसी कार्यालय में संबद्ध हैं। पूरे निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी जिला उद्योग केन्द्र की कार्य प्रणाली से खिन्न दिखे। शासन की सर्वोच्च प्राथमिकता के अन्तर्गत यूपी इन्वेस्टर्स सम्मिट 2018 में जनपद के उन उद्यमियों के बारे में जानकारी ली गई, जिनके द्वारा विभिन्न उद्योगों की स्थापना हेतु एमओयू हस्ताक्षरित किया है। बताया गया कि वृषभान ठाकुर, सुरेन्द्र कुमार जैन, बीडी अग्रवाल, रामस्वरुप साहू तथा राजेश कुमार साहू ने राज्य सरकार के साथ एमओयू हस्ताक्षरित किया गया है किन्तु जिलाधिकारी ने पाया कि इन्वेस्टर्स सम्मिट से सम्बंधित कोई भी पत्राचार कार्यालय स्तर पर नहीं किया गया था। इन्वेस्टर्स सम्मिट से सम्बंधित फाइलें रद्दी की भांति इधर-उधर बेतरतीब ढंग से पड़ी हुई थीं। फाइलों में शासन द्वारा प्रेषित पत्र भी अस्तव्यस्त ढंग से लगाये गये थे। इन्वेस्टर समिट में पांच उद्यमियों की पत्रावली नहीं बनायी गयी है। प्रधान सहायक द्वारा बताया गया कि एमओयू से सम्बन्धित अभिलेख झांसी में संयुक्त निदेशक कार्यालय में उपलब्ध हैं। इस पर जिलाधिकारी ने निर्देश दिया कि झांसी से अभिलेख प्राप्त कर सभी उद्यमियों की पृथक से पत्रावली तैयार करे और प्रस्तुत करें। 10 अगस्त को प्रस्तावित ओडीओपी की तैयारी के संबंध में पूछने पर बताया कि 30 लोगों को हस्तशिल्पियों के साथ प्रदर्शनी हेतु लखनऊ जाना है, इस सम्बन्ध में और अधिक कुछ नहीं बता सके। प्रभारी उपायुक्त बांकेलाल द्वारा यह भी नहीं बताया जा सका कि वह जनपद के उद्यमियों के प्रोत्साहन हेतु क्या कार्य योजना हे। इस पर जिलाधिकारी ने फटकार लगाते हुए कार्यप्रणाली में सुधार लाने के निर्देश दिए। वहीं वन डिस्ट्रिक वन प्रोडक्ट योजनान्तर्गत मुद्रा योजना के तहत लोन हेतु प्राप्त आवेदन पत्रों का अवलोकन किया गया। इसके अन्तर्गत 20 लोगों द्वारा आवेदन किया गया है। जिसमें भगवानदास ने 28 अप्रैल को आवेदन किया गया। जिसे एक महीने बाद चार अन्य आवेदनों के साथ बैंक के पास भेजा गया। इसी प्रकार अन्य आवेदन भी एक महीने से अधिक समय के बाद भेजा गया और इन अभिलेखों की कोई अलग फाइल नहीं बनाइ गई थी। मुद्रा योजना में मात्र एक आवेदक भगवानदास पुत्र भैयालाल का ऋण इलाहाबाद बैंक द्वारा स्वीकृत किया गया है। इस सम्बन्ध में तत्काल स्पष्टीकरण प्रस्तुत किये जाने हेतु निर्देशित किया गया। विभिन्न सेवा सम्बन्धी अभिलेख व पुस्तिकायें देखी गई। एक पत्रावली में वर्ष 2011 के बाद कोई पत्राचार नहीं किया गया । प्रधान सहायक को यह भी ज्ञात नहीं था कि वह कार्यालय में कब से पदस्थ हैं। प्रथम दृष्टया कार्यालय के निरीक्षण में पाया गया कि कार्यालय शासन के कार्यक्रमों के प्रति संवेदनशील नहीं है। निर्देशित किया गया कि वह शीघ्र ही नियमानुसार पत्रावलियों का निर्दान कराएं। कार्यालय में शौचालय में सफाई नहीं पाई गई। कार्यालय से लगी हुई रिक्त जमीन में कूड़ा जमा पाया गया, निर्देशित किया गया कि तत्काल सफाई कराकर इसमें वृक्षारोपण कराया जाना सुनिश्चित करें। प्रधान सहायक संतोष जैन से स्पष्टीकरण के निर्देश दिये गये, साथ ही उन्होंने आदेशित किया कि कार्यालय में पायी गई समस्त दुर्व्यवस्थाओं के सम्बंध में शासन को पत्र प्रेषित कर अवगत कराया जाये।
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