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अन्ना पशुओं का विचरण बना किसानों के लिए सिरदर्द

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अन्ना पशुओं का विचरण बना किसानों के लिए सिरदर्द
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ललितपुर। ग्रामीण क्षेत्रों में अन्ना पशुओं का विचरण किसानों के लिए सिरदर्द बन गया है। उन्हें खेतों में खड़ी रबी की फसल बचाना मुश्किल हो रहा है। नीलगाय व जंगली सुअर इस समस्या को और गंभीर बना रहे हैं। अब कृषक इस समस्या के समाधान के लिए शासन प्रशासन की ओर निहार रहा है।
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पिछले कई सालों से जिले के किसान परेशान हैं। जहां कृषकों को प्राकृतिक आपदाएं झेलनी पड़ रही हैं। वहीं, अन्ना पशु फसलों को नुकसान पहुंचा रहे हैं। विभिन्न गांवों में सैकड़ों की संख्या में जानवर यहां-वहां घूम रहे हैं। इस समस्या का समाधान शासन प्रशासन के बगैर सहयोग के संभव नहीं है। इसके बाद भी प्रशासन में बैठे अधिकारी इस ओर ध्यान नहीं दे रहे हैं। कुछ किसानों ने खेतों में तार फैन्सिंग करा ली है, गरीब किसान तो रात दिन जागकर खेतों पर पहरेदारी कर रहे हैं। तमाम जगहों पर तो दूसरे गांवों के लोग ट्रकों, पिकप में लादकर रात के अंधेरे में आवारा जानवरों को छोड़ जा रहे हैं। वहीं, जंगल के किनारे बसे गांवों में अन्ना पशुओं के साथ नील गाय व सुअर समस्या बने हुए हैं। इन इलाकों में कृषकों को खेती करना मुश्किल हो रहा है। ग्राम डोगराखुर्द, पटना, पारोल, गुढा, खिरिया, चादोरा, बरेजा, दिगवार में किसान जंगली जानवरों से त्रस्त हैं। रात दिन फसलों की रखवाली कर रहे कुछ कृषकों का कहना है कि उनकी आर्थिक स्थिति बहुत कमजोर हो गई है। कई किसान तो कर्ज के बोझ तले दबे चले जा रहे हैं। ग्रामीणों ने डीएम से उचित कार्रवाई की मांग की है।
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