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पालिका अध्यक्ष पद के लिए नहीं मिल रहे जमीनी दावेदार

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पालिका अध्यक्ष पद के लिए नहीं मिल रहे जिताऊ प्रत्याशी
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- दावेदार के रूप में उभरी किचन में समय बिताने वाली महिलाएं
अमर उजाला ब्यूरो
ललितपुर। जिन महिलाओं ने कभी राजनीति का ककहरा नहीं पढ़ा है, आज उनके पति उन्हें नगर की प्रथम महिला के रूप में देखना चाहते हैं। वहीं, जमीनी कार्यकर्ता दावेदारी के मामले में धनबल के सामने पिछड़ते नजर आ रहे हैं। इक्का दुक्का को छोड़कर सर्वाधिक आवेदन किचन में महारथ हासिल कर चुकी महिलाओं ने ही किए हैं जो चर्चा का विषय बने हुए हैं।
बुंदेलखंड के झांसी ललितपुर से उमा भारती का लोकसभा में प्रतिनिधित्व होने के बाद भी क्षेत्र में महिलाएं अपने वजूद को तलाशते नजर आती हैं। आज जब नगर पालिका परिषद का अध्यक्ष पद महिला के खाते में चला गया है तो इसकी दावेदारी के लिए जमीनी महिला कार्यकर्ता ढूढ़े नहीं मिल रही हैं। कुछ दावेदारों के पास चुनाव लड़ने के लिए पैसा नहीं है तो कुछ की आम जनमानस में पकड़ नहीं है। कुछेक नाम जो उभरकर आए हैं वह खुद को चुनाव जीतने की हैसियत में नहीं पाते हैं। ऐसे में वर्षो से राजनीति में सक्रिय नेता अपनी-अपनी पत्नि को लेकर अग्रिम पंक्ति में खड़े हो गए हैं। वर्तमान में जो चेहरे सामने आ रहे हैं, उनमें से अधिकांश का अब तक किचन में बीता है। तमाम महिलाओं ने चुनाव लड़ने से अनिच्छा जाहिर की है लेकिन पति उन्हें अध्यक्ष पद पर देखना चाहते हैं। जिसको लेकर पतियों ने पत्नी के पक्ष में माहौल बनाना प्रारंभ कर दिया है। निर्दलीय उम्मीदवारों में भी यही स्थिति है, अभी तक कोई ऐसा चेहरा नहीं आया है जो पूर्व से राजनीति में सक्रिय रहा हो। ऐसी स्थिति के लिए नागरिक यहां के पिछड़ापन को जिम्मेदार मानते हैं। राजनैतिक दलों ने भी स्थानीय महिलाओं को कभी उभारने का प्रयास नहीं किया। उधर, कांग्रेस जिलाध्यक्ष दुर्गा प्रसाद कुशवाहा का कहना है कि वर्तमान में जो आवेदन आए हैं, उनमें कोई भी जमीनी महिला कार्यकर्ता नहीं है। पार्टी इस बार सामान्य महिला को चुनाव लड़ाने पर विचार कर रही है। हालांकि, उनकी बहू सहित रूकमणी देवी, रेखा पटैरिया व अरून शर्मा का आवेदन आया है। भाजपा जिलाध्यक्ष रमेश सिंह राजपूत एडवोकेट का कहना है कि जिन महिलाओं ने पार्टी की सदस्यता ले रखी है, वे ही आवेदन कर रही हैं। पार्टी पहले से ही जमीनी कार्यकर्ता को टिकट देने के लिए मन बनाए हुए हैं। बसपा जिलाध्यक्ष कैलाश कुशवाहा का कहना है कि तीन आवेदन प्राप्त हुए हैं, इनमें जमीनी कार्यकर्ता का आवेदन शामिल है। हालांकि, उन्होंने उनका नाम सार्वजनिक करने से इंकार कर दिया। बाइस अक्तूबर को सारी स्थिति स्पष्ट हो जाएगी।
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फिर निकलेगा जाति का जिन्न
नगर पालिका परिषद अध्यक्ष पद के उम्मीदवार के चयन का आधार जाति बनना तय माना जा रहा है। इसके पीछे कारण यह है कि जो उम्मीदवारी के लिए दावेदारी जता रहे हैं, उनकी जनता में पैठ नहीं है। ऐसे में राजनैतिक दलों के पास जिताऊ उम्मीदवार तराशने का एक मात्र पैमाना जाति ही बचता है। स्थानीय नागरिकों में इस तरह की चर्चाएं अभी से शुरू हो गई हैं।
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