जल्द मिलेगा मिट्टी के चूल्हों से छुटकारा
ललितपुर।
एलपीजी गैस कनेक्शन की सुविधा नहीं मिलने पर जनपद के 504 परिषदीय विद्यालयों में रसोइया कोहर रोज मिट्टी केचूल्हों पर भोजन पकाना पड़ रहा है। इस समस्या से निजात दिलाने के लिए शासन ने प्रयास तेज कर दिए हैं। गत दिवस शासन ने बीएसए से एलपीजी गैस कनेक्शन विहीन विद्यालयों की सूची मांगी थी, इसी क्रम में विभाग द्वारा शासन को सूची भी भेज दी गई है। आने वाले दिनों में उक्त रसोइयों को चूल्हे पर भोजन पकाने से मुक्ति मिल सकता है।
जनपद के लगभग 1,561 परिषदीय प्राथमिक व उच्च प्राथमिक विद्यालयों में बच्चों के लिए मिड-डे मील योजना के तहत मध्याह्न भोजन पकाया जा रहा है। भोजन पकाने के लिए इन विद्यालयों में लगभग 4,100 महिला रसोइयां मानदेय पर नियुक्त है। इनमें से जनपद के लगभग 504 परिषदीय विद्यालय ऐसे हैं, जहां पर नियुक्त लगभग 1,200 महिला रसोइयों को आज भी मिट्टी के चूल्हों पर खाना बनाना पड़ रहा है, जबकि गरीब परिवार की महिलाओं को मिट्टी के चूल्हों पर खाना पकाने से निजात दिलाने के लिए प्रधानमंत्री उज्ज्वल योजना के तहत महिलाओं को मुफ्त में एलपीजी गैस कनेक्शन मिल गए हैं और वह अपने घरों पर एलपीजी गैस चूल्हे पर भोजन पका रही है। वहीं, पेट की खातिर इन गरीब महिलाओं को मजबूरन विद्यालयों में मिट्टी के चूल्हों पर खाना पकाते समय तमाम तरह की समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। विभाग में बजट उपलब्ध नहीं होने के कारण उक्त विद्यालयों को एलपीजी गैस कनेक्शन नहीं मिल पाए हैं। बजट के लिए विभाग व रसोइयों द्वारा हमेशा से ही मांग की जा रही है, लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ है। हाल ही में शासन ने बेसिक शिक्षा विभाग से एलपीजी गैस विहीन विद्यालयों की सूची मांगी है, इससे एक उम्मीद की आश जागी है कि आने वाले दिनों में रसोइयों को मिट्टी के चूल्हों से छुटकारा मिल सकेगा। मध्याह्न भोजन प्राधिकरण निदेशक अब्दुल समद ने जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी से एलपीजी गैस कनेक्शन विहीन विद्यालयों की सूची मांगी थी, जिसके क्रम में बीएसए अंबरीष कुमार के द्वारा शासन को सूची उपलब्ध कर दी गई है, जिसमें बताया गया है कि जनपद के 504 विद्यालयों में गैस कनेक्शन नहीं है।
ईंधन के लिए हो रहा पेड़ों का कटान
मिट्टी के चूल्हों में भोजन पकाने के लिए ईधन के रूप में लकड़ियों की आवश्यकता होती है। जनपद के इतने अधिक विद्यालयों में हर रोज काफी बड़ी संख्या में लकड़ियों को जलाया जा रहा है। ईधन के लिए लकड़ियां उपलब्ध कराने के लिए पेड़ों का भी कटान किया जा रहा है। जबकि पौधरोपण के लिए हर वर्ष करोड़ों रुपये खर्च किए जा रहे हैं। इसके अलावा लकड़ी के ईंधन से महिला रसोइयों को भी काफी परेशानी हो रही है।
जहां कनेक्शन है वहां भी जल रहे मिट्टी के चूल्हे
इसके अलावा जनपद के ऐसे भी अनेकों विद्यालय है जहां पर शासन ने मध्याह्न भोजन पकाने के लिए एलपीजी गैस सिलेंडर उपलब्ध तो करा दिए हैं, लेकिन उन सिलेंडरों की जगह वर्तमान में भी मिट्टी के चूल्हों पर ही भोजन पकाया जा रहा है। इससे रसोइयों का शोषण किया जा रहा है। विद्यालयों को मिले सिलेंडरों का उपयोग निजी उपयोग में किया जा रहा है। इस ओर भी जिला बेसिक शिक्षा विभाग के अधिकारियों को गंभीरता दिखानी होगी।
भेज दी गई सूची
प्राधिकरण निदेशक द्वारा एलपीजी विहीन विद्यालयों की सूची मांगी गई थी, जिसके क्रम में सूची भेज दी गई है। अब शासन से बजट कब उपलब्ध होगा, इस संबंध में कुछ कहा नहीं जा सकता है।
- कपिल दुबे
जिला समन्यवक, एमडीएम।