जनपद में शासन की मंशानुसार इस बार गेहूं खरीद का लक्ष्य 13 हजार 500 मीट्रिक टन गेहूं खरीद का लक्ष्य रखा गया है, लेकिन बहुत कम बार ही यह लक्ष्य पूरा हो सका है। हालांकि इस बार गेहूं खरीद का लक्ष्य पहले माह ही तेजी के साथ बढ़ रहा है। इससे अधिकारी भी लक्ष्य काफी हद तक पूरा होने को आशांवित नजर आ रहे हैं।
जनपद में शासन की मंशानुसार गेहूं खरीद के लिए अब तक शहर समेत ग्रामीण क्षेत्रों में कुल 84 क्रय केंद्र स्थापित किए गए हैं। जबकि अभी भी और क्रय केंद्र खोलना प्रस्तावित है, जिसके तहत अभी सात क्रय केंद्र प्राइवेट एजेंसियों के माध्यम से खोले जाने हैं। शुरुआत में पहले सप्ताह में क्रय केंद्रों पर गेंहूं खरीद मुश्किल से ही शुरू हो सकी थी। इसके लिए जिला प्रशासन को भी काफी मशक्कत करनी पड़ी। वहीं ऑनलाइन पंजीकरण की अव्यवस्था भी चल रही है। इससे किसानों को पहले गेहूं खरीद के लिए ऑनलाइन पंजीकरण कराना होगा, इसके बाद टोकन लेकर क्रय केंद्र पर नंबर भी लगाना होता है, इसके बाद जब कई दिनों बाद क्रय केंद्र पर किसानों का नंबर आता है, तो किसान फिर गेहूं की ट्रॉली लेकर क्रय केंद्रों पर पहुंचता और अपनी बारी के लिए दिन-दिन भर इंतजार करना होता है। इसके बाद देर रात तक किसी प्रकार से आखिरकार नंबर भी आ ही जाता है। हालांकि इन सब झमेलों के बीच बहुत से किसान मंडी में ही आढ़तियों को कम दाम तक गेहूं बेचने को मजबूर हो जाता है। लेकिन इसके बाद भी जनपद के क्रय केंद्रों पर गेहूं खरीद पिछले साल की तुलना में रिकॉर्ड तोड़ की जा रही है, जो पिछले साल की अपेक्षा इस बार कई गुना आंकी जा रही है। वर्तमान में सभी पीसीएफ, एफसीआई व अन्य संस्थाओं द्वारा संचालित जनपद के 84 क्रय केंद्रों पर अब तक यानी 25 दिनों में 22 हजार 745 मीट्रिक टन यानी दो लाख 27 हजार 450 क्विंटल गेहूं खरीद हो चुकी है। जबकि पिछले साल की तुलना करें तो इन्हीं 25 दिनों में कुल 8 हजार 186 मीट्रिक टन गेहूं खरीद हुई थी, जो इस साल की तुलना में कई गुना कम थी। वहीं अकेले पीसीएफ के 71 क्रय केंद्रों पर ही 16 हजार 764 मीट्रिक टन गेहूं खरीद हुई है। जबकि बाकी खरीद अन्य सभी केंद्रों पर हुई है।