दशानन रावण के साथ कुंभकरण और मेघनाद के पुतलों का दहन
ललितपुर। हर वर्ष की तरह इस वर्ष भी भगवान श्रीराम और अहंकारी दशानन रावण के युद्घ का मंचन किया गया और रावण के अंत के साथ ही दशानन, कुं्भकरण और मेघनाद के पुतलों का दहन किया गया। एक साथ तीन पुतलों का दहन देखने के लिए यहां शहरवासियों का हुजूम उमड़ पड़ा। राक्षसी सेना का अंत करने के लिए भगवान श्रीराम, लक्ष्मण और हनुमान और अट्टहास करता हुआ रावण के स्वरुप की शोभायात्रा निकाली गई। स्वरुपों की शोभायात्रा के साथ ही श्रीरघुनाथजी भगवान भी विमानों में विराजमान होकर रामलीला मैदान में पहुंचे। रामलीला मैदान में रामादल और रावणदल के बीच भीषण युद्घ की लीला का भव्य मंचन किया गया।
श्रीरामलीला हनुमान जयंती महोत्सव समिति द्वारा दशहरा पर्व के दिन शुक्रवार को शाम करीब साढ़े पांच बजे से श्रीरघुनाथजी मंदिर में शोभायात्रा निकलने से पहले भव्य आरती का आयोजन किया गया, जजहां शहरवासी भारी संख्या में एकत्रित होकर भगवान की आरती में शामिल हुए। यहां रामादल के स्वरुपों द्वारा काली बऊआ माता मंदिर में शक्ति पूजन किया गया। फिर यहां से रामादल के स्वरुपों की तखत यात्रा और भगवान श्रीरघुनाथजी की विमान यात्रा निकाली गई। शोभायात्रा में सबसे आगे सीता के स्वरुप, इसकेे पीछे रथ में विराजमान अहंकारी रावण ठहाका लगाता हुआ और लोगों को डराता हुआ चल रहा था। इसके पीछे वाले रथ में कुंभकरण और मेघनाद के स्वरुप अपनी शक्ति का प्रदर्शन करते आगे बढ़ रहे थे। फिर इनके पीछे भगवान रघुनाथ का विमान और फिर सबसे पीछे के रथों में भगवान राम, लक्ष्मण और हनुमान के स्वरुप शामिल रहे। य यह शोभायात्रा चौबयाना से शुरु होकर रावरपुरा, महावीरपुर, घंटाघर, जगदीश मंदिर, सावरकरचौक, आजादचौक, नदीपुरा होते हुए गोविंदनगर स्थित रामलीला मैदान में पहुंचे। रामलीला मैदान में युद्घ के मंचन से पूर्व सबसे पहले भूमि पूजन के साथ समी वृक्ष के पूजन की रस्म अदायगी की गई। फिर यहां रामादल और रावण दल के मध्य भीषण युद्घ का मंचन किया गया। जहां सबसे पहले कुंभकरण, फिर मेघनाद युद्घ के दौरान मारे जाते हैं। इसके बाद भगवान श्रीराम और दशानन रावण के मध्य भीषण युद्घ होता है, जिसमें भगवान राम अहंकारी रावण का अंत करते हैं। जिस पर यहां रामादल की मंडली के साथ ही मौजूद हजारों की संख्या में लोग जश्न मनाते हैं। इसके बाद फिर यहां बुंदेलखंड के अनुभवी आतिशबाजों द्वारा शानदार आतिशबाजी का आयोजन किया गया। फिर यहां समिति द्वारा बनाए गए 35 फुट के रावण और 30 फुट के कुंभकरण और 28 फुट के रावण का दहन किया गया। पुतलों के जलते ही पूरा मैदान पुतलों में लगाए गए पटाखों की आवाज से गूंज उठा। यहां लगाए गए मंच के पास भरत मिलाप का मंचन भी किया गया, जिसमें राम और भरत एक दूसरे को पान खिलाकर गले मिले और फिर रामलीला मैदान में मौजूद लोगों द्वारा रावण का अंत होने पर एक दूसरे को पान खिलाकर बधाईयां दीं। इस मौके पर रमेशचंद्र चौबे, संजय चौबे, रमाकांत चौबे, मनीष चौबे, भाजपा नेता जेके सिंह, आशीष चौबे, अभय चौबे, समिति के अध्यक्ष बृजेश चतुर्वेदी, रमेश रावत, श्यामाकांत चौबे, राजेश दुबे, रत्नेश तिवारी, अमित तिवारी, अंकित चौबे, कपिल चौबे, कौस्तुभ चौबे, प्रबल सक्सेना, राजीव हुंडैत, राहुल चौबे, अजय चौबे, हरविंदर सलूजा, भरत रिछारिया, धर्मेंद्र चौबे, राजेंद्र तामियां, अवधेश कौशिक, शिवकुमार शर्मा, चंद्रशेखर राठौर, हरीमोहन चौरसिया, ललित कौशिक, जगदीश पाठक, अनुराग चौबे, ध्रुव राजा, रुपेश साहू, सोनू जायसवाल, राकेश तामियां समेत हजारों की संख्या में जनसैलाब उमड़ा रहा।
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धनुषबाग में कराया राम भोज
दशानन का अंत करने के बाद भगवान श्रीराम, लक्ष्मण और हनुमानजी के स्वरुपों को वर्षों से चली आ रही परंपरा के अनुसार ही रामलीला मैदान स्थित धनुष बाग में पहुंचाया गया, जहां रामादल के स्वरुपों की आरती उतारकर स्वागत किया गया और फिर यहां राम, लक्ष्मण एवं हनुमान क स्वरुपों को भोज कराया गया।
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युद्घ से लौटने पर रामादल का आरती उतारकर स्वागत
रावण का अंत कर युद्घ से लौटकर आने पर रामादल के स्वरुपों का शहर में जगह-जगह लोगों ने आरती उतारकर स्वागत किया, इस पर भगवान के स्वरुपों द्वारा स्वागत करने वालों को तीर में पान लगाकर आशीर्वाद भेंट स्वरुप प्रदान किया।