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मूर्तिकारों ने दिया देवी प्रतिमाओं को सजीव रुप, नवदुर्गा कल से

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नवदुर्गा कल से, दुर्गा प्रतिमाओं को दिया सजीव रूप
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समितियां गठित, आकर्षक व भव्य पंडालों को सजाने में जुटे
नौका पर सवार सभी सिद्घियों के साथ स्थापित होंगी देेवी प्रतिमाएं
जिले में साढ़े ग्यारह व नगर में ढाई सौ प्रतिमाओं की होंगी स्थापना
अमर उजाला ब्यूरो
ललितपुर। 10 अक्टूबर से शारदीय नवरात्रि पर्व शुरू होने जा रहा है। इसके लिए मूर्तिकारों ने देवी प्रतिमाओं को अपनी कला का रंग देकर सजीव रूप दे दिया। इस बार पूरे जिले में करीब साढ़े ग्यारह सौ देवी प्रतिमाएं और शहर में भी करीब ढाई सौ से अधिक प्रतिमाओं की स्थापना की जा रही है। इसके लिए मुहल्लों में समितियां गठित होकर देवी पांडाल आकर्षक लाइटिंग के साथ सजाए जा रहे हैं। इस बार शारदेय नवरात्रि में भगवती जगदंबा अपने भक्तों की उपासना करने के लिए नौका पर सवार होकर आ रही हैं और नाव पर सवार होकर आगमन होने के कारण दुर्गा अपनी सभी सिद्धियों की प्राप्ति होती है।
शारदेय नवरात्रि इस बार दस अक्टूबर को दिन बुधवार से शुरू हो रही हैं। इस बार नवरात्रि नौ दिनों की होने से विशेष महत्व भी बढ़ जाता है। शहर में शारदेय नवरात्रि शुरू होने से पहले मुहल्लों में देवी पांडाल लगाने की तैयारियां शुरू हो गई है। इस बार लगभग शहर के हर गली-मुहल्ले में देवी प्रतिमाएं पांडालों में श्रद्धा व भक्ति के साथ स्थापित की जाएंगी। इसके लिए स्थानीय और अन्य राज्यों के कलाकारों भी करीब चार माह से देवी प्रतिमाएं तैयार करने में जुटे हुए हैं। हालांकि इस बार देवी प्रतिमाओं के निर्माण में महंगाई का कोई खास असर देखने को नहीं मिला है। मुहल्ला चौबयाना में श्रीरघुनाथजी मंदिर प्रांगण में कई वर्षों से कलकत्ता के कलाकार प्रतिमाएं तैयार कर रहे हैं। इस बार भी कलकत्ता के कलाकारों ने ही फिर से यहां करीब 122 देवी प्रतिमाएं तैयार की हैं, जिनकी पहले से ही बुकिंग की गई थी। वहीं शहर व अन्य कस्बा व ग्रामीण क्षेत्रों में ही कई स्थानीय कलाकारों द्वारा भी देवी मूर्तियां तैयार की गई हैं। यह देवी प्रतिमाएं 1500 से लेकर 10 हजार रुपए तक में तैयार की गई हैं। हालांकि शहर में ही कुद मूर्तियां अन्य जनपदों से भी लाने की योजना है। ऐसे में इस बार महंगाई का असर देवी प्रतिमाओं पर कम ही दिखाई दे रहा है। कलकत्ता के कलाकारों के अनुुसार वह मूर्तियां बनाने के लिए बांस और लकड़ी ललितपुर से ही लेते हैं, बाकी रंग, सजावट का सामान, सांचे और मिट्टी कलकत्ता से ही लाते हैं। वह यहां करीब चार माह का मूर्ति विक्रय का कारोबार करते हैं और मूर्तियों का काम खत्म होने पर वह कलकत्ता ही लौट जाते हैं। वहीं स्थानीय स्तर पर अन्य कलाकार भी इलाईट क्षेत्र में व अन्य स्थानों पर मूर्तियां तैयार कर रहे हैं। वहीं कुछ छोटे व्यवसायी अन्य जनपदों से भी आकर्षक मूर्तियां बाजार में दुकानों पर सजाई गई हैं, जो प्लास्टर ऑफ पेरिस से बनाई गई प्रतिमाएं हैं।
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शुभ मुहूर्त में विधि अनुसार करें घट स्थापना और पूजन
शास्त्री उपाचार्य एवं नेहरू महाविद्यालय के संस्कृत विभागाध्यक्ष डॉ. ओम प्रकाश शास्त्री ने बताया कि वर्ष में चार नवरात्रियों का प्रावधान है, जिनमें दो नवरात्रि गुप्त एवं दो नवरात्रि प्रगट होती हैं। इस प्रकार चैत्र शुक्ल पक्ष में बासंत नवरात्रि एवंआश्विन शुक्ल पक्ष में शारदीय नवरात्रि होती हैं। माघ शुक्ल पक्ष एवं आषाढ़ शुक्ल पक्ष में गुप्त नवरात्रि होती हैं। इन चारों नवरात्रि में विशेषकर शारदीय नवरात्रि ग्रामीण अंचल से लकर महानगरीय संस्कृति तक में मां भगवती दुर्गाजी की आराधना की जाती है, जो परम सुखदाई एवं सुखसंपत्ति सिद्धि यश आरोग्यता प्रदान करती हैं। इस बार शारदीय नवरात्रि आश्विन शुक्ल पक्ष प्रतिपदा एक बुधवार दस अक्टूबर को शुरू हो रही है। ज्योतिषीय मुुहूर्त के अनुसार प्रतिपदा तिथि में कलश स्थापना शुभ मानी जाती है। इस बार प्रतिपदा बुधवार को मात्र चार घटी बीस पल है यानि दस अक्टूबर को सुबह सात बजकर छप्पन मिनट तक है। इसलिए कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त सूर्योदय सुबह 6.12 बजे से 7.56 बजे तक परम शुभ माना गया है। इसके बाद अभिजित मुहूर्त में पूर्वाह्न11.37 बजे से दोपहर 12.23 बजे तक अभिजित मुहूर्त है। इसमें कलश स्थापना विशेष फलदाई है। इस बार नवरात्रि में उपासना करने का फल अभूतपूर्व सिद्घ होगा। भगवती जगदंबा अपने भक्तों के द्वारा उपासना के लिए इस बार नाव पर सवार होकर आ रही हैं और नौका वाहन पर आगमन होने के कारण सभी सिद्घियों की प्राप्ति होती है। इस बार नवरात्रि नौ दिन की होने जाने के चलते पूरा संयोग ही शुभ एवं श्रेष्ठ है। जब भी नौ दिन की नवरात्रि मनाई जाती है तो यह नौ दिन शक्ति की उपासना के लिए बेहद शुभ माने जाते हैं। दस अक्टूबर को पंचांग के अनुसार चित्रा नक्षत्र और वैधृति योग है, यद्यपि धर्मसिंधु एवं निर्णय सिंधु के अनुसार चित्रा एवं वैधृति योग में कलश स्थापना वर्जित किया गया है। इसलिए कलश स्थापना प्रतिपदा में सूर्योदय 6.20 बजे से सुबह 7.56 बजे तक ही संपन्न कर लेना चाहिए। यदि कलश स्थापना इस मुहूर्त में नहीं कोई नहीं कर सका तो चित्रा वैधृति निषेध का पालन करें एवं अभिजित मुहूर्त में कलश स्थापना दस अक्टूबर को दिन में सुबह 11.37 बजे से 12.23 बजे तक की जा सकेगी और इस मुहूर्त में कलश स्थापना से सभी सिद्घियां प्राप्त होती हैं। ऐसे में धनु लग्न में ही कलश स्थापना श्रेष्ठ है। इस बार नवरात्रि में दो गुरुवार हैं यह अत्यंत शुभ संयोग है, क्योंकि गुरुवार को दुर्गा पूजा का करोड़ गुना फल मिलता है। लाभ, शुभ, अमृत और इस धनुलग्न में घट स्थापना विशेष शुभ है। इसके साथ ही इस बार नवरात्रि में नौ दिन राजयोग द्विपुष्कर योग, सिद्घि योग का संयोग भी बन रहा है। इन दिनों में भूमि क्रय, वाहन क्रय, संपत्ति क्रय अत्यधिक शुभ व फलदाई रहेगा।
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