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नलों में पानी नहीं मिलने पर किया दस हजार का बिल निरस्त

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पानी नहीं आने पर दस हजार का बिल निरस्त
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विलंब से कोरियर पहुंचाने में दिलाए दो हजार
स्थाई लोक अदालत में किया वादों का निस्तारण
अमर उजाला ब्यूरो
ललितपुर। स्थायी लोक अदालत में पब्लिक हितों से जुड़े कई मामलों में निस्तारण किया जा रहा है। इसके अंतर्गत लोक अदालत ने देवगढ़ निवासी एक अधिवक्ता द्वारा जल संस्थान द्वारा बिछाई गई पाइप लाइन में अक्सर पानी नहीं आने का मामला पेश किया गया, जिस पर स्थायी लोक अदालत ने जलसंस्थान द्वारा जारी किए गए उपभोक्ता का दस हजार 721 रुपये का बिल निरस्त कर दिया। वहीं, एक अन्य विलंब से कोरियर पहुंचाने के मामले में कोरियर कंपनी से वादी को दस हजार रुपये दिलाकर राजीनामा कराया।
अदालतों में छोटे-छोटे वादों का बोझ कम करने और लोगों में आपसी सुलह-सुलह समझौता के माध्यम से वादों के निस्तारण के लिए शहर में एक वर्ष पूर्व तीन अक्टूबर को स्थायी लोक अदालत का गठन किया गया था। इसमें आए वादों का निस्तारण छह माह में किया जाता है। स्थायी लोक अदालत के गठन का उद्देश्य जन उपयोगी सेवाओं से अभिप्रेत वायु, सड़क या जल द्वारा यात्रियों या माल के परिवहन के लिए परिवहन सेवा के मामले, डाक, टेलीग्राफ या टेलीफोन सेवा के मामले, किसी स्थापना द्वारा जनता को शक्ति, रोशनी या पानी की आपूर्ति के मामले, लोक स्वच्छता या स्वास्थ्य रक्षा की प्रणाली या अस्पताल या डिस्पेंसरी में सेवा या बीमा सेवा और रियल स्टेट व एजूकेशन से संबंधित मामला का निस्तारण आपसी सुलह-समझौतों से किया जा रहा है। इसी के तहत उक्त स्थायी लोक अदालत में एक वर्ष में करीब 17 वादों का निस्तारण किया गया है। हाल ही में अदालत में जनउपयोगी समस्याओं से संबंधित दो मामलों का निस्तारण किया है। इसमें एक मामले में शहर के मुहल्ला सुभाषपुरा निवासी विनोद कुमार खैरा ने स्थायी लोक अदालत में गत आठ अगस्त को एक वाद दायर करते हुए बताया था कि उन्होंने गत 23 जुलाई 2018 को घंटाघर पीयूष लॉज के पास स्थित डीटीडीसी एक्सप्रेस कपिल त्रिपाठी के यहां एक साड़ी का पार्सल बैंगलोर भेजने को गया तो विपक्षी कपिल त्रिपाठी ने उससे कहा कि अर्जेेंट पार्सल बाई एअर तीन दिनों में बैंगलोर पहुंचता है और सादा रूप से पार्सल पांच दिनों में पहुंचती है। उसे बताया कि एक किलो तक का पार्सल सादा डाक से पांच दिन में डिलीवर होने का चार्ज 200 रुपए और अर्जेंट पार्सल वाई एअर तीन दिन में डिलीवर का चार्ज 250 रुपए है। जिस पर उसने उक्त पार्सल तीन दिन में यानि 26 जुलाई 2018 तक डिलेवरी पहुंचाने की संविदा किया और इसके लिए कोरियर कंपनी ने तीन दिन में पार्सल पहुंचाने का 250 रुपये का चार्ज लिया व उसकी रसीद भी दी।
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उक्त साड़ी का पार्सल ललितपुर से फैज अहमद अंसारी को उनके यहां 27 जुलाई 2018 को समारोह होने के चलते बैंगलोर भेजा गया था। प्रार्थना पत्र में याची ने आरोप लगाया था कि कंपनी के सेवाओं में कमी, लापरवाही, उदासीनता के कारण उसका पार्सल कोरियर कंपनी द्वारा 26 जुलाई तक डिलीवर नहीं किया गया। याची के द्वारा वाईएअर का चार्ज अदा करने तीन दिन में डिलेवरी को भेजा था, लेकिन उक्त पार्सल 30 जुुलाई को शाम को बैंगलोर में डिलीवर किया गया। उक्त पार्सल डिलीवर होने से उसे शर्मिंदगी हुई। याची ने स्थाई लोक अदालत में वाद दायर करके उक्त पार्सल के विलंब होने पर उसने मानसिक कष्ट व शर्मिंदगी का मूल्यांकन पचास हजार रुपए का दावा किया। स्थाई लोक अदालत के अध्यक्ष वीके मिश्रा व सदस्या ममता जैन और संगीता जासवाल की तीन सदस्यीय टीम ने मामले की सुनवाई करते हुए पार्सल बिलंब से पहुंचाने के मामले में वादी को दो हजार रुपए दिलाकर राजीनामा कराया। वहीं एक अन्य मामले में ग्राम देवगढ़ निवासी शेर सिंह यादव ने उक्त स्थाई लोक अदालत में वाद दायर करते हुए बताया था कि जल संस्थान के द्वारा गांव में किए गए घरेलू नलों के कनेक्शनों में जल की सप्लाई जल संस्थान द्वारा की जाती है। लेकिन जल संस्थान के द्वारा उपभोक्ताओं के घरों में लगे घरेलू नलों में नियमित पानी नहीं दिया जाता है। जिसके संबंध में उपभोक्ताओं द्वारा कई बार उच्चाधिकारियों से शिकायत भी की, लेकिन कोई सुधार नहीं किया गया। कभी सप्ताह में एक दिन तो कभी एक महीने में पांच या छह दिन या फिर साल में मुश्किल से 60 या 72 दिन ही पानी की सप्लाई होती है। शिकायत करने पर अधिकारी कभी बिजली का बहाना तो कभी मोटर खराब होने का बहाना कर उपभोक्ताओं के साथ छलावा कर रहे हैं। उक्त मामले की सुनवाई करते हुए स्थाई लोक अदालत की तीन सदस्यीय टीम ने जल संस्थान द्वारा जारी किया गया याची शेर सिंह यादव का 10 हजार 721 रुपए का बिल निरस्त करने के आदेश दिए हैं।
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