घरों की छतों से गुजर रहा हाइटेंशन करंट का खतरा
ललितपुर। उत्तर प्रदेश पावर कार्पोरेशन द्वारा हाइटेंशन और एलटी लाइनों की रबर युक्त और अंडर ग्राउंड केबल की कवायद के बाद शहर में अब भी हाइटेंशन लाइनों से मौत का खतरा बना हुआ है। हाइटेंशन तारों के नीचे दर्जनों मकान व दुकानों का पक्का निर्माण हो चुका है, इससे आए दिन घरों की छतों से गुजर रहीं लाइनों के हाइटेंशन करंट से जहां कई लोगों की मौतें हो चुकी हैं, वहीं कई लोग हाइटेंशन करंट लगने से अपंग हो गए हैं। बिजली विभाग मात्र नोटिस और स्टीमेट बनाने की प्रक्रिया से अब तक आगे नहीं बढ़ सका है।
विद्युत विभाग द्वारा शहरी क्षेत्रों में दर्जनों आवासीय प्लॉटों के ऊपर से वर्षों पहले हाइटेंशन तारों का जाल बिछाया गया था। बिजली विभाग में हाइटेंशन लाइनों को शिफ्ट कराने के कड़े नियम हैं और लाखों रुपये खर्च होते हैं। इससे बचने के लिए बहुत से लोगों ने हाइटेंशन लाइनों का वैकल्पिक उपाय खोजकर लाइनों के नीचे ही अपने पक्के मकानों का निर्माण करा लिया। शहर में ऐसे कई स्थान हैं जहां हाइटेंशन लाइनों के नीचे कालोनियां बस गई हैं, लेकिन, बिजली विभाग यह सब जानते हुए भी लाइनों को न तो शिफ्ट कर सका है और न ही मकानों के निर्माण को ही रोक सका है। जबकि हाइटेंशन लाइनों के नीचे मकान बनाने से पूर्व विद्युत विभाग की अनुमति लेना आवश्यक है। लेकिन, इन हाइटेंशन लाइनों के नीचे दर्जनों मकान बन चुके हैं, तो ऐसे में विभागीय जिम्मेदारी बनती है कि लाइनों को शिफ्ट कराने का उपाय किया जाए, ताकि सैकड़ों जिंदगियों की मौत से खिलवाड़ न हो सके। शहर के मुहल्ला पिसनारी में मुख्य राजघाट रोड पर बाई ओर नहर के किनारे आधा सैकड़ा से अधिक मकान हाइटेंशन लाइनों के नीचे बन गए हैं। विभाग द्वारा नोटिस भेजकर कार्रवाई की बात तो कहीं गई, लेकिन न तो उन्हें नोटिस भेजकर रोका जा सका और न ही हाइटेंशन लाइनों को ही हटाया जा सका।
इसके चलते उक्त भवन स्वामियों द्वारा तारों को प्लास्टिक पाइप से कबर कर करंट से बचने का वैकल्पिक उपाय तो खोज लिया, लेकिन छतों पर बच्चों के खेलने के दौरान या फिर बारिश के दौरान छतों पर घूमना व कई बार लाइनों के टूटने से मकानों में करंट दौड़ने का हर समय खतरा बना रहता है। पिसनारी नहर के पास निवासी रोशनी राजपूत ने बताया कि उन्होंने बिजली विभाग में कई बार हाइटेंशन तार हटाने के लिए कहा है, लेकिन नहीं हटाए गए हैं, उन्हें रहने के लिए दिक्कत होने के चलते मकान बनाना जरूरी था। पिसनारी के ही संतोष अहिरवार ने बताया कि बारिश के दिनों में हाइटेंशन करंट का बहुत खतरा होता है। संतोष राजा ने कहा कि हाइटेंशन लाइनें नहीं हटाए जाने के कारण मजबूरी में मकान बनाना पड़ा है। हाइटेंशन लाइनों को हटाने की प्रक्रिया की जानकारी भी नहीं है। कई बार बिजली विभाग में जाकर जानकारी ली, लेकिन हर बार नए नियम बताकर टाल दिया जाता है। बता दें कि शहर के मुहल्ला तालाबपुरा में ही गत दिवस एक मकान के छज्जे से निकले हाइटेंशन तार छू जाने से दस वर्षीय मासूम बच्ची करंट से झुलस गई थी। उसकी हालत गंभीर होने पर उसे जिला चिकित्सालय से झांसी मेडिकल कॉलेज रिफर कर दिया गया।