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पीसीएफ और सहकारी समितियों के सचिव आमने-सामने, सौपा सामूहिक इस्तीफा

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पीसीएफ और सहकारी समितियों के सचिव आमने-सामने
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ललितपुर। पीसीएफ के ठेकेदार द्वारा खरीदे गए गेहूं का उठान नहीं कराने से नाराज होकर समितियों के सचिव/प्रभारियों ने सामूहिक इस्तीफा जिला सहकारी बैंक के अध्यक्ष को सौंप दिया है। उनका आरोप है कि खरीदे गए गेहूं के उठान का भार उन पर डाला जा रहा है। नियमता पीसीएफ को इसका उठान कराना है लेकिन ऐसा नहीं किया जा रहा है। इसका खामियाजा समितियों को नुकसान उठाकर उठाना पड़ रहा है।
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समितियों के सचिवों ने जिला सहकारी बैंक के महाप्रबंधक, सहायक निबंधक सहकारी समितियां व पीसीएफ जिला प्रबंधक को दिए ज्ञापन में बताया कि शासन ने किसानों को लाभान्वित करने के लिए सरकारी समर्थन मूल्य घोषित किया है। तय रेटों पर किसानों से गेहूं की खरीद की जा रही है। पीसीएफ के खोले गए केंद्रों की गोदामें गेहूं से फुल हो गई हैं। इसके चलते केंद्र प्रभारी खरीद नहीं कर पा रहे हैं। इसका किसान विरोध कर रहे हैं। यही नहीं, वे माल नहीं लेने पर लड़ने के लिए आमादा हैं। वहीं, पीसीएफ के अधिकारियों ने गेहूं उठान का जिम्मा समिति के सचिवों/प्रभारियों पर डाल दिया गया है। वे उठान कराने का दबाव बना रहे हैं, इससे प्रभारियों को कुछ समझ नहीं आ रहा है। पीसीएफ द्वारा गेहूं का उठान नहीं कराने से समितियां घाटे में पहुंच रही हैं। इससे कर्मचारियों का भविष्य अंधकारमय नजर आने लगा है। आखिर में उन्होंने जिला सहकारी बैंक के अध्यक्ष हरीराम निरंजन को सामूहिक इस्तीफा सौंप दिया। इस्तीफा देने वालों में बृजराम सिंह, सहदेव यादव, इंद्रपाल सिंह बुंदेला, कमल किशोर बबेले, मान सिंह चौहान, दिनेश कुमार गुढ़ा, शिवलखन सिंह, रामजीवन बिलगैया, मु. लतीफ खान, ओमप्रकाश सेंगर, प्रताप रजक, संजीव यादव, हरीशंकर तिवारी, भरतलाल राय, जगदीश यादव, रामपाल यादव, पंकज सिंह, सच्चिदानंद, सुरेश सिंह, राजेंद्र सिंह, प्रकाश नारायण, जगत सिंह राजपूत आदि शामिल रहे। उधर, सहकारी समिति के सहायक निबंधक रमेश कुमार गुप्ता ने वार्ता के लिए सोमवार को कार्यालय में सचिवों के प्रतिनिधि मंडल को बुलाया गया है। आने वाले दिनों में मामला और तूल पकड़ने की संभावना है।
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