छह दशक बाद भी रोगी भर्ती करने की व्यवस्था नहीं
ललितपुर। एक तरफ आयुष्मान भारत योजना में निर्धनों को मुफ्त उपचार की सुविधा दे दी गई हो, लेकिन आयुर्वेदिक चिकित्सालयों में आज तक इंडोर भर्ती की सुविधा नहीं मिल पाई है। इससे आयुर्वेदिक चिकित्सालयों में उपचार करा रहे मरीज अपने को ठगा सा महसूस कर रहे हैं।
जिले में आयुर्वेदिक चिकित्सालय की शुरूआत 1951 में की गई। इसमें जिले का प्रथम अस्पताल पाली में खोला गया। इसके साथ ही 1992 में जाखलौन व मड़ावरा में आयुर्वेदिक चिकित्सा पद्धति से उपचार की सुविधा दी गई। इसके साथ ही जिले में अन्य अस्पताल भी खोले गए। वर्तमान में आयुर्वेद के 32 अस्पताल संचालित हो रहे हैं। इनमें वर्तमान में सबसे बड़ा अस्पताल तहसील तालबेहट में 25 बेेड का संचालित किया जा रहा है। लेकिन छह दशक बीतने के बाद भी जिले को आयुर्वेदिक चिकित्सालयों में इंडोर भर्ती की सुविधा नहीं मिली है। साथ ही चिकित्सकों की कमी के चलते कई अस्पताल केवल फार्मासिस्ट के सहारे ही चल रहे हैं। इनमें चिकित्सक की जगह फार्मासिस्ट ही मरीजों को दवाएं दे रहे हैं। इन अस्पतालों में मरीजों को एक रुपये का पर्चा बनवा कर उपचार मिल रहा है। इसके साथ ही दवाएं भी मुफ्त दी जाती हैं। जिससे निर्धन परिवारों को सस्ते में इलाज की सुविधा मुहैया हो जाती है। लेकिन यहां पर आने वाले मरीजों को समय पर ही उपचार मिल रहा है। ओपीडी कक्षों के समय के बाद आने वाले मरीजों को इलाज नहीं मिल पा रहा है। ऐसे में आयुर्वेदिक पद्घति से उपचार कराने वाले मरीज अपने को ठगा सा महसूस कर रहे हैं। इतना ही नहीं कई अस्पतालों के पास निजी भवन नहीं है। यह किराए के भवनों में संचालित हो रहे हैं। इसके बावजूद भी विभागीय अधिकारियों ने इस ओर ध्यान नहीं दिया। इससे आयुर्वेदिक को बढ़ावा नहीं मिल पाया है। वहीं जिले में दो युनानी चिकित्सालय संचालित किए जा रहे हैं। इसमें एक नाराहट व दूसरा बम्हौरीसर में स्थापित हैं। लेकिन चिकित्सक केवल एक ही है। ऐसे में बम्हौरीसर चिकित्सालय फार्मासिस्ट के साहरे चल रहा है।
चिकित्सकों की है भारी कमी
आयुर्वेदिक अस्पतालों के सापेक्ष जिले में 37 चिकित्सकों की आवश्यकता है। लेकिन वर्तमान में 18 चिकित्सक तैनात हैं। साथ ही 37 फार्मासिस्टों के सापेक्ष 16 नियुक्त हैं। वहीं 72 चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों के सापेक्ष 49 कर्मचारी कार्यरत हैं, जिससे चिकित्सकों व अन्य कर्मचारियों की कमी बनी हैं।
जिले में आयुर्वेद विभाग में संसाधनों का अभाव बना है। साथ ही उपकरणों की कमी बनी है। इंडोर भर्ती में मरीजों को आपात काल की औषधि नहीं है। वहीं जिले में स्टाफ की भारी कमी है। जिससे अस्पतालों में इंडोर भर्ती की सुविधा मुहैया नहीं हो सकी है।
डा. नारायनदास, जिला आयुर्वेदिक यूनानी अधिकारी, ललितपुर