समय से कार्य नहीं कर रहे पीठासीन अधिकारी
ललितपुर।
उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता के प्रावधानों के अंतर्गत जिला में पीठासीन अधिकारियों द्वारा समयबद्ध तरीके से कार्य नहीं करने के कारण अधिवक्ताओं ने कलेक्टर, अपर कलेक्टर, परगनाधिकारी, अपर परगनाधिकारी, तहसीलदार, नायब तहसीलदार के न्यायालयों में चार अप्रैल तक कार्य नहीं करने का निर्णय लिया है। पीठासीन अधिकारियों की उक्त कार्यप्रणाली से नाराज अधिवक्ताओं ने मंगलवार को कलेक्ट्रेट परिसर में एकत्रित होकर जमकर नारेबाजी की और उक्त 21 सूत्रीय मांगों का एक ज्ञापन जिलाधिकारी को सौंपा।
ज्ञापन में बताया गया है कि तहसील बार संघ ने पूर्व में आठ सूत्रीय मांगों का एक ज्ञापन दिया था। जिस पर अब तक कोई कार्रवाई नहीं की गई है। तहसीलदार द्वारा आवासीय प्लाटों का दाखिल खारिज नहीं किया जा रहा है, जबकि उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता ऐसे दाखिल खारिज का प्रावधान है। ऐसी भूमि जो किसी बैंक में बंधक है या केसीसी के अधीन बंधक है, उसका दाखिल खारिज बैनामा की स्थिति में भार सहित किए जाने का प्रावधान है। लेकिन तहसीलदार द्वारा ऐसे दाखिल खारिज आवेदन के गुणदोष पर नियमानुसार निस्तारित नहीं हो रहे हैं और दाखिल खारिज नहीं किया जा रहा है, जो अवैधानिक है। हदबंदी के प्रकरणों में तीन माह में हदबंदी नहीं की जा रही है, जिससे वादकारी संबंधित अधिकारी व राजस्व कर्मचारी की कार्य प्रणाली से परेशान हैं। हदबंदी की कोई रिपोर्ट भी नहीं भेजी जा रही है और यदि रिपोर्ट किसी प्रयास से आ भी जाती है तो न्यायालय उस पर अपने आदेश नहीं कर रहे हैं। हदबंदी प्रकरण दायर होने पर मिसिलबंद रजिस्टर में उन्हें नियमानुसार दर्ज नहीं किया जा रहा है। मिसिलबंद रजिस्टर में मुकदमा दायरा का पूर्ण विवरण अंकित नहीं होता है। जिससे पत्रावली नष्ट होने पर रजिस्टर से यह जानकारी नहीं हो पाती है कि किन वादकारियों ने किनके विरुद्घ किस आराजी के संबंध में वाद दायर किया और उसमें क्या निर्णय रहा। न्यायालय में जितनी संख्या में वाद पत्रावलियां लंबित हैं वह दर्ज नहीं हैं। पीपी एक्ट के मुकदमे राज्य सरकार के हित में निहित हैं व राज्य सरकार की ओर से दायर मुकदमे सुस्त अवस्था में डले हैं। उनमें कोई तारीख नहीं लग रही है और एक बंद बक्से में पड़ी हैं, जिन्हें शुरू किया जाए व दोषी अधिकारी व कर्मचारियों के विरुद्घ कार्यवाई की जाए। परगनाधिकारी न्यायालय में कोई राजस्व अहममंद न होने से कार्य प्रभावित हो रहा है। जिससे अहलमंद की नियुक्ति की जाए। केस डायरी में हदबंदी के मुकदमों की तारीख नहीं दी जाती है। दुरुस्ती कागजात के मामलों में समयबद्ध तहसील रिपोर्ट नहीं आ रही है, जिससे भ्रष्टाचार को बढ़ावा मिल रहा है। शासन एवं उच्च न्यायालय के निर्देशों के बावजूद पुराने मुकदमों का निस्तारण करने में कोई परगनाधिकारी एवं अन्य अधिकारियों द्वारा नहीं ली जा रही है, जिससे पैंडेंसी बढ़ रही है। राजस्व न्यायालयों द्वारा बहस के उपरांत निर्णय के लिए तिथि या तो निर्धारित नहीं की जाती है या निर्णय उपरांत कई तिथियां अंकित कर दी जाती हैं। कई बार तो बहस के बाद कई महीनों तक निर्णय ही नहीं किए जाते हैं, जिससे वादकारियों के मन में शंका बनी रहती है। ललितपुर मुख्यालय पर कोई असिस्टेंट कलैक्टर न्यायालय नहीं है, ऐसे पद पर नियुक्ति का अधिकार कलैक्टर को है, इसलिए एसडीएम न्यायिक के पद पर नियुक्त कर न्यायालय गठित किया जाए। जनपद में श्रेणी 3 के 40 हजार एकड़ के काश्तकार हैं, जिन्हें उप्र राजस्व संहिता के अनुरूप अब असंक्रमणीय भूमिधर घोषित किया जाए। इसके अलावा अधिवक्ताओं ने तहसील परिसर में स्टांप वेंडर अर्जीनीस उपलब्ध कराने, सब रजिस्ट्रार कार्यालय में तैनात लिपिक द्वारा अधिवक्ताओं व पक्षकारों से अभद्रता की जाती है, जिसके चलते उक्त लिपिक पर कार्रवाई की मांग की है। ज्ञापन के दौरान अध्यक्ष कांशीराम कुशवाहा, महामंत्री शंभूूदयाल शर्मा के अलावा अधिवक्ता सुरेंद्र कुमार खैरा, राकेश गौतम, मुन्नालाल जैन, हरदयाल लोधी, प्रतीश तिवारी, हृदयनारायण मालवीय उपस्थित रहे।
गायब नक्शों का मामला उठाया
डीएम को ज्ञापन देकर अधिवक्ताओं ने शहर के अंदर हद व बाहर हद, ग्राम पाली, जाखलौन व बालाबेहट, विरधा समेत कई क्षेत्रों के वर्षों से गायब चल रहे बंदोबस्ती नक्शों का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने बताया कि उक्त क्षेत्रों के बंदोबस्ती नक्शे न तो रिकॉर्ड रुम में हैं और न ही ऐसे प्रमाणित नक्शे कहीं उपलब्ध हैं। लेकिन प्रशासन द्वारा मनमाने तरीके से भूमि की नापजोख लेखपाल, कानूनगो के माध्यम से की जाती है, जिससे लेखपाल व कानूनगो की मनमानी को बढ़ावा मिल रहा है। तत्काल नक्शों की व्यवस्था कर एक प्रति रिकॉर्ड रूम में रखवायी जाए, जिससे लेखपाल के पास उपलब्ध नक्शा व रिकॉर्ड रूम में उपलब्ध नक्शे में कोई भिन्नता न रहे और नक्शे की नकल रिकॉर्ड रूम से प्राप्त हो सके।