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Lalitpur News: रोजाना 20 लाख खर्च, फिर भी सड़कों पर गोवंश

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ललितपुर। निराश्रित गोवंश के संरक्षण के लिए शासन प्रतिदिन बीस लाख रुपये खर्च कर रहा है, इसके बाद भी गोवंश खेत से लेकर सड़कों पर विचरण कर रहे हैं। गोवंश के संरक्षण के लिए करोड़ों की लागत से 30 गोवंश आश्रय स्थल भी बनाए गए हैं। लेकिन, बदइंतजामी के कारण किसानों को इनसे छुटकारा नहीं मिल रहा है।
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जनपद में 27 गोवंश आश्रयस्थल, तीन नगर पंचायत से संचालित कान्हा गोशाला व जिला पंचायत से संचालित 22 कांजी हाउस होने के बाद भी सड़क पर अन्ना जानवर नजर आ रहे हैं। बड़े वाहनों से टकराकर जहां गोवंश हादसों का शिकार हो रहे हैं, वहीं छोटे वाहन चालक उनसे टकराकर घायल हो रहे हैं।
गोवंश आश्रयस्थलों में संरक्षित 31260 गोवंश के भरण पोषण के लिए शासन 15.63 लाख रुपये की धनराशि खर्च प्रतिदिन खर्च कर रहा है। वहीं, सहभागिता योजना में किसानों को दिए 9270 गोवंश के लिए प्रतिदिन 4.63 लाख रुपये की धनराशि खर्च की जा रही है। इस प्रकार पूरे वर्ष में गोवंश संरक्षण के लिए सरकार 73 करोड़ 94 लाख 90 हजार रुपये खर्च कर रही है। इसके बाद भी गोवंश सड़कों पर दिखाई दे रहे हैं।
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हर वर्ष जानवरों को गोवंश आश्रयस्थलों पर भेजने के लिए अभियान चलाया जाता है, लेकिन फिर उतने ही पशु सड़कों पर दिखाई देते हैं। ये अन्ना पशु किसानों की फसलों को तो नुकसान पहुंचाते ही हैं, सड़कों पर विचरण करने के कारण लोग दुर्घटना का भी शिकार होते हैं।

बारिश के कारण सड़कें बनीं अड्डा
बारिश के समय खेतों में पानी भरने के कारण गोवंश बैठने के लिए सूखा स्थान तलाशते हैं, ऐसे में सड़कें सबसे मुफीद हैं। शहर के किसी भी हिस्से में देखिए, गोवंश सड़कों पर बैठे दिखाई देंगे।

दूध न देने पर गाय को छोड़ देते हैं पशुपालक
बुंदेलखंड में गायों को छुट्टा छोड़ने का एक और कारण यह भी है कि ये कम दूध देती हैं। ज्यादातर गायें औसतन दो से तीन लीटर दूध देती हैं। पशु चिकित्सकों का कहना है कि गाय करीब चार साल की उम्र से दूध देना शुरू कर देती हैं और 10 से 11 वर्ष की आयु तक उनसे दूध मिलता है। जब दूध देने में गाय सक्षम नहीं होती तो उसे किसान छुट्टा छोड़ देते हैं।
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गोवंश व गोशाला की स्थिति
गोवंश आश्रस्थल- 30
कांजी हाउस - 22
गोवंश की संख्या पिछली गणना के अनुसार- 3,64,514
गोवंश आश्रयस्थलों पर गोवंश की संख्या - 31260
सहभागिता योजना में किसानों को दी गई गोवंश की संख्या- 9270

शासनादेश के अनुसार 50 रुपये खर्च प्रतिदिन प्रत्येक गोवंश पर किया जाता है। सहभागिता में भी इतना ही रुपया किसानों के खातों में डाला जाता है।
डॉ भगवान सिंह, मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी।
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