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स्वास्थ्य विभाग आज मनाएगा ग्लोबल हैंड वॉशिंग डे

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स्वास्थ्य विभाग आज मनाएगा ग्लोबल हैंड वॉशिंग डे
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हाथ धोकर संक्रमण को दूर भगाने का देंगे संदेश
अमर उजाला ब्यूरो
ललितपुर। स्वास्थ्य विभाग द्वारा 15 अक्टूबर को ग्लोबल हैंड वॉशिंग डे मनाया जाएगा। विभाग द्वारा स्वास्थ्य संबंधित कार्यक्रम जगह-जगह आयोजित करके और शिविर लगाकर लोगों को हाथ धोकर संक्रमण से दूर रहने का संदेश दिया जाएगा। भारत में बाल मृत्यु के लिए दस्त और श्वसन संक्रमण नंबर एक कारण हैं। यह दो बीमारियां साफ-सफाई न रखने व हाथ न धोने की वजह से सबसे अधिक होती हैं।
राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण- 4 (2015-16) के अनुसार जिले में पांच साल से कम उम्र के लगभग 11 प्रतिशत बच्चे डायरिया से और लगभग 5.7 प्रतिशत बच्चे श्वसन संक्रमण से ग्रसित हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार पांच साल से कम उम्र के लगभग 525,000 बच्चों की मृत्यु हर साल डायरिया के कारण तथा लगभग 920,136 बच्चों की मृत्यु निमोनिया के कारण होती हैं। जबकि साबुन से हाथ धोकर दस्त और श्वसन संक्रमण जैसी बीमारियों से बच्चों को बचाया जा सकता हैं। यूनिसेफ की रिपोर्ट के अनुसार साबुन से हाथ धोने से विशेष रूप से मलमूत्र के संपर्क के बाद दस्त से बीमारियों को 40 प्रतिशत से अधिक और श्वसन संक्रमण में 30 प्रतिशत की कमी हो सकती है। पब्लिक हेल्थ एसोसिएशन के अनुसार भारत में 53 प्रतिशत आबादी शौचालय के बाद साबुन से हाथ धोती है, वही 38 प्रतिशत खाने से पहले साबुन से हाथ धोती है और भोजन तैयार करने से पहले केवल 30 फीसदी साबुन से हाथ धोती हैं। हाथ धोने की प्रक्रिया को अधिकांश लोग अभी भी गंभीरता से नहीं लेते हैं, जिसकी वजह से आये दिन खासकर बच्चे डायरिया और निमोनिया जैसी बीमारियों के शिकार होते हैं। बच्चे खेल के दौरान अपने हाथों एवं खिलौनों को प्रदूषित मिट्टी से गंदा कर लेते हैं और कीटाणुओं के संपर्क में आते हैं, जिसकी वजह से वह जाने-अनजाने ही उससे संक्रमित हो जाते हैं। वह उन हाथों से कभी आंखों, कभी नाक और मुंह को छूते हैं। इससे कीटाणु उनके शरीर में प्रवेश कर जाते हैं और प्रतिरोधक क्षमता कम होने की वजह से वह जल्दी बीमार पड़ जाते हैं। ऐसे में इन बीमारियों से बचाव के लिए लोगों में हाथ धोने के प्रति जागरूकता लाना बहुत जरूरी है। जिला महिला अस्पताल की डॉक्टर गीतांजली, प्रसूति विशेषज्ञ ने बताया कि संक्रमणों से बचाव के लिए हाथ धोना बहुत आवश्यक होता है, खासतौर से जब किसी मरीज को छूने से पहले हाथ धोना चाहिए। उन्होंने यह भी बताया कि नवजात बच्चों को छूने से पहले हाथ धोना बहुत जरूरी होता है, क्योंकि थोड़े से संक्रमण से बच्चे जल्दी बीमार हो जाते हैं और वही बच्चे भी गंदे हाथों से जब आंख, नाक, मुंह को छूते है, जिससे संक्रमण की संभावना बढ़ जाती हैं। उन्होंने बताया कि वैसे तो हाथ दो तरीकों से धोया जाता है, जिसमें एक सामान्य मरीज को छूने से पहले हाथों को साबुन से 6 तरीकों से 3 मिनट तक तथा दूसरा ऑपरेशन करने से पहले 8 तरीकों से साबुन से धोना चाहिए। भारत सरकार द्वारा भी स्वच्छ भारत मिशन के तहत स्वच्छता के अंतर्गत हाथ धोने के मामले पर विशेष बल दिया जा रहा है। हाथ धोने के प्रति लोगों में जागरूकता बढ़ाने के लिए वैश्विक स्तर पर भी हर साल 15 अक्टूबर को हैंडवॉशिंग दिवस मनाया जाता हैं, जिसमें लोगों को जागरूक करने के लिए कार्यक्रम भी आयोजित किए जाते हैं और लोगों को हाथ धोने से होने वाले लाभों और गंदगी भरे हाथों से भोजन आदि करने के बाद होने वाली बीमारियों और उनके संक्रमण के बारे में बताया जाएगा।
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हाथ न धोने से हो सकती हैं ये बीमारियां
चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार हाथ नहीं होने के कारण दस्त, टाइफाइड, निमोनिया, पेट संबंधी रोग, पीलिया, आंख की बीमारी, हैजा, त्वचा संबंधी रोग आदि। कीटाणुओं से बचने के लिए बचाव करने के लिए हाथ धोने की महत्ता को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। हाथों की सफाई पर लगाए गए कुछ समय बहुत सी बीमारियों से बचाता है, उसके लिए सभी को ध्यान रखना होगा की हाथ धोना कब-कब जरूरी होता हैं। इसके तहत शौच के बाद हाथ धोना बहुत जरूरी होता हैं। खाना बनाने व खाने से पहले भी हाथ धोना आवश्यक होता हैं, घर की साफ- सफाई करने के बाद हाथ अवश्य धोये, पालतू जानवरों से खेलने के बाद, किसी बीमार व्यक्ति से मिलकर आने के बाद, छिंक या खांसी के बाद, खेलने व बागवानी के बाद।
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