गोविंद सागर बांध में एक फुट पानी बढ़ा
- सामान्य जलस्तर से 11 फिट अब भी खाली
- पांच बांधों क्षमता के मुकाबले पचास प्रतिशत ही भर सके
अमर उजाला ब्यूरो
ललितपुर। शहर में दो दिन से रुक-रुककर हो रही बारिश के बाद भी गोविंद सागर बांध का जलस्तर मात्र एक फुट ही बढ़ सका है। बांध अब भी सामान्य जलस्तर से 11 फिट खाली है। वहीं, राजघाट, माताटीला व सुकुवां-ढुकुवां को छोड़कर अन्य बांधों की स्थिति भी बहुत अच्छी नहीं है। हालांकि मध्य प्रदेश व जनपद के ऊपरी क्षेत्रों में हो रही बारिश से जिले वासियों को अभी भी बांधों का जलस्तर बढ़ने की संभावना बनी हुई है।
विगत तीन दिनों से मध्य प्रदेश में हो रही भारी बारिश के कारण जहां राजघाट और माताटीला बांध फुल हो गए हैं, वहीं जनपद के अन्य बांध अब भी पानी के लिए प्यासे हैं। जिले के पांच बांध गोविंद सागर बांध, शहजाद बांध,जामनी बांध, सजनाम बांध व रोहिणी बांध का जलस्तर सावन का महीने लगभग निकलने के बाद भी अब मात्र पचास प्रतिशत तक ही नहीं भर सकें हैं। इनमें गोविंद सागर बांध मात्र भराव क्षमता 94 फुट सापेक्ष के साथ मात्र 43 प्रतिशत ही भर सका है और इसका जलस्तर वर्तमान में 83 फुट आंका गया है। जबकि गोविंदसागर बांध में बृहस्पतिवार को कुल 20 मिली मीटर बारिश हुई है। शहजाद बांध भी भराव क्षमता 321 मीटर के सापेक्ष अब तक मात्र 315.65 मीटर भर सका है, जो कुल क्षमता के मुकाबले 29 फीसदी ही भर सका है। जामनी बांध भराव क्षमता 403.55 मीटर के सापेक्ष 400.84 मीटर भर सका है और भराव क्षमता के सापेक्ष कुल 46 फीसदी भरा है। सजनाम बांध भी 373.20 मीटर के मुकाबले अब तक मात्र 369.80 मीटर भर कर कुल 36 फीसदी भर सका है। वहीं रोहिणी बांध की भी ऐसी ही स्थिति है, हालांकि इसने पचास फीसदी का आंकड़ा जरुर पार कर लिया है। रोहिणी बांध का जल स्तर 396.39 मीटर भराव क्षमता के सापेक्ष अब मात्र 394.50 मीटर जलस्तर बढ़ गया है और कुल क्षमता के सापेक्ष 52 प्रतिशत ही भर सका है। इस प्रकार शहजाद बांध जहां 71 फीसदी खाली है, तो सजनाम बांध 64 प्रतिशत, गोविंद सागर बांध 57 प्रतिशत, जामनी बांध 54 प्रतिशत और रोहिणी बांध 48 प्रतिशत खाली बना हुआ है। यह स्थिति तब है जब बारिश का सीजन अधिकांशत: सावन के महीने तक ही माना जाता है और इसके बाद बारिश की संभावना काफी कम रहती है। अब सावन का महीना खत्म होने को है और जिले के पांच बांधों में पचास प्रतिशत ही पानी भर सका है, जो जिला प्रशासन की चिंता के साथ ही किसानों की भी चिंता बढ़ाए हुए है। इसके चलते कई जगह किसान व ग्रामीण बारिश के लिए हवन पूजन भी कर रहे हैं।