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मॉडल आश्रय स्थल बनने के बाद भी खुले में घूम रहे अन्ना पशु

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मॉडल आश्रय स्थल बनने के बाद भी खुले में घूम रहे अन्ना पशु
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ललितपुर। जिले में प्रदेश का मॉडल गौवंश स्थापित होने के बाद भी अन्ना पशुओं के विचरण की समस्या का समाधान नहीं हो सका है। इसकी प्रमुख वजह पांच हजार की क्षमता वाले आश्रय स्थल में अब तक पांच सौ 53 गौवंश ही रखे गए हैं, इनकी संख्या सीमित करने के पीछे यहां बिजली, पानी और चारे की समस्या का हल नहीं हो पाना रहा है। इसका खामियाजा किसानों को परेशान होकर भुगतना पड़ रहा है।
डीएम मानवेंद्र सिंह ने ग्राम कल्यानपुरा में अतिक्रमण हटाकर डेढ़ सौ एकड़ भूमि पर गौवंश आश्रय स्थल निर्मित कराया है। इसका शुभारंभ करने के लिए प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ खुद जनपद आए थे। यहां पचास एकड़ भूमि पर गौवंश आश्रय स्थल बनाया गया है। इसमें छियासठ गुणा छब्बीस फीट माप के ग्यारह शेड बनाए गए हैं। वहीं, गौवंश के खाने के लिए एक भूसा गोदाम का निर्माण किया गया है। जिसकी माप इक्कीस गुणा बाइस फीट है। इसे रायफल क्लब के धन से बनाया गया है। एक और भूसा गोदाम प्रस्तावित है। इसके अलावा एक चौकीदार कक्ष व औषधि कक्ष भी बना है। गौवंश को पानी पीने के लिए पचास गुणा तीन फीट माप की चरही का निर्माण कराया गया है। वहीं, एक पंप हाउस का निर्माण कराया गया है। पीने के पानी के लिए चार बोर कराए गए हैं, जिनमें से दो बोर फेल हो चुके हैं। चालू एक बोर सोलर लाइट से तो दूसरा बोर जनरेटर से चलाने की व्यवस्था की गई है। पूरे परिसर में दो ही सोलर लाईट लगी हुई हैं, जिनकी ऊंचाई कम होने से परिसर में पर्याप्त रोशनी की कमी बनी हुई है। जिला प्रशासन ने भूसे से निर्भरता कम करने के लिए आश्रय स्थल के दो तिहाई हिस्से में लगभग सौ हेक्टेयर क्षेत्र में बहुवर्षीय घासों की बुवाई कराने की रणनीति बनाई गई है। फिलहाल, गौवंश गोदाम में उपलब्ध भूसे पर ही निर्भर है। यहां गोदाम का आकार छोटा होने से उपलब्ध भूसा दो से तीन दिन ही चल पाता है। इसके अलावा बडी गोदाम के अभाव में यहां भूसे का पर्याप्त स्टाक नहीं बन पा रहा है। ऐसे में एक या दो दिन में बयालीस से पैतालीस क्विंटल भूसा की आपूर्ति की जा रही है। जिसे गौवंश दो दिन में ही चटकर जाते हैं। बारिश से परिसर में घास उग आई है लेकिन वह गौवंश के मुंह की पकड़ में नहीं आ रही है। जिससे घूम फिरकर गौवंश वापस भूसे की गोदाम के पास पहुंच जाते हैं। तमाम गौवंश कमजोर होने की वजह से पीछे तर्क दिया जा रहा है जो गौवंश आश्रय स्थल में छोडा गया है, वह पहले से ही कमजोर स्थिति में आया है, इससे उनकी स्थिति में धीरे-धीरे सुधार हो रहा है।
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श्रमिकों का भुगतान अटका
करीब तीन माह से करीब तीन दर्जन श्रमिक आश्रय स्थल में मौजूद गौवंश की सेवा में लगा हुआ है। लेकिन उनके हाथ में अभी तक मेहनताना नहीं आ सका है। जिससे उनमें मायूसी देखी जा रही है।

ये है ग्राम स्तर पर प्रबंध समिति
ग्राम प्रधान पदेन अध्यक्ष, ग्राम पंचायत अधिकारी पदेन सचिव बनाया गया है। वहीं, तहसीलस्तरीय पर्यवेक्षणीय समिति में उप जिलाधिकारी पदेन अध्यक्ष, क्षेत्रीय पशु चिकित्सक पदेन सचिव हैं। जनपदस्तरीय पर्यवेक्षण समिति में पदेन अध्यक्ष जिलाधिकारी, उप जिलाधिकारी सदर पदेन सचिव नियुक्त हैं।

श्रमिकों का आया पैसा
गौवंश के लिए भूसे की व्यवस्था जिलाधिकारी के माध्यम से की जा रही है। पशु चिकित्सक भी लगातार गौवंश के स्वास्थ्य पर नजर रखे हुए हैं। पीने के पानी के लिए दो बोर और जिलाधिकारी के स्वीकृत कर दिए हैं। सोलर लाइट भी लगवाई जा रही है। इसके अलावा श्रमिकों का पैसा आ गया है। लेकिन इस मामले में वह गोलमोल जवाब देते नजर आए।
ऊदल सिंह, ग्राम प्रधान, कल्यानपुरा

खदेडे़ जा रहे अन्ना पशु
इस समय दो लाख छह सौ सत्ताइस हेक्टेयर क्षेत्र में खरीफ की फसल खड़ी हुई है। जिसे किसानों को अन्ना पशुओं से बचाना चुनौती बन गया है। अन्ना पशु मौका पाकर खेतों में खडी फसल को चट कर रहे हैं। जिसे बचाने के लिए किसान अन्ना पशुओं को खदेडने में लगे हैं। जिससे अधिकांश अन्ना पशु हाइवे सहित संपर्क मार्गो पर डेरा डाले हुए हैं जो यातायात में बाधा उत्पन्न कर रहे हैं।
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सात और बन रहे आश्रय स्थल
इस समय जनपद में कल्यानपुरा आश्रय स्थल के अलावा तालबेहट में ढाई सौ गौवंश की क्षमता वाले कान्हा पशु आश्रय स्थल, उन्नीस सौ क्षमता वाले दयोदय गौशाला संचालित हैं। इसके अलावा सात और आश्रय स्थल बनाए जा रहे हैं। वहीं, दो हैक्टेयर से अधिक भूमि के 109 चारागाह चिह्नित किए गए हैं। जिन पर भविष्य में गौवंश आश्रय स्थल का विकास कराने की योजना है।
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