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पाली में खाली पड़ी चरही कैसे तर होंगें कंठ

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फोटो 9
कैप्सन- कस्बा पाली में भटकते जानवर।
जानवरों को भी पानी का संकट

अमर उजाला ब्यूरो
पाली (ललितपुर)। गर्मी ने अपने सितम दिखाने शुरू कर दिए है । गर्मी के मौसम ने आमजन के साथ जानवरों को अपनी चपेट में ले लिया हैं। आसपास की नदी और उन पर बने चेकडैमों में पानी नहीं है।
भुजरया तालाब, नीलकंठ तालाब की जमीन में दरारे फट गयी है । मटियारी के तालाब में थोड़ा बहुत पानी दिखाई दे रहा है लेकिन इसके पानी को पाना जानवरों के लिए आसान नहीं है । बीते साल सूखे की जो विभीषिका देखने को मिली उसमें पानी के लाले पड़े । इसी को ध्यान में रख जानवरों की व्याकुलता मिटाने के लिए कस्बे के बाहर चारों तरफ बड़ी लागत से चरही बनाई गयी थी । जिसमें भरे गए पानी से जानवर खासतौर से अन्ना जानवर अपने कंठ को तर करते थे । लेकिन, गर्मी के इतने दिन गुजर जाने के बाद भी चरही सुखी पड़ी है या फिर इनमें कचरा जमा है। मुक्तिधाम, नीलकंठ मार्ग, महावीर स्कूल, बंगारिया मार्ग पर बनी चरही और उसके आसपास मंडराते जानवर पानी की बाट जोह रहे हैं। इनमे पानी भरने का जिम्मा लिए जिम्मेदारों ने अब तक इन्हें भरने के लिए कोई रुचि नही दिखाई, जिससे पानी की तलाश में भटक रहे जानवरों को ़परेशानी पैदा हो रही है । लोगों ने शीघ्र इन चरही में पानी के प्रबंध किये जाने की मांग की है ।
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ऐसे भी बुझ सकती प्यास
पाली । जिन स्थानों पर जानवरों को पानी पीने के लिए चरही बनी है, वहां आसपास निजी नलकूप भी है अगर इनके मालिक अपनी दरियादिली दिखाएं तो इन चरही को आसानी से भरा जा सकता है । कस्बे के जागरूक लोग अपने मोहल्लों में पानी के हौद रख उनमें पानी का इंतजाम कर सकते है । जो राह चलते जानवरों के लिए बड़े कारगर साबित होंगें। इसके साथ ही नगर पंचायत अपनी जिम्मेदारी दिखाएं और टैंकर के माध्यम से खाली पड़ी चरही में पानी का इंतजाम करें, जिससे कि जानवरों को पानी के लिए यहां वहां न भटकना पड़े ।
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