सिक्कों के लेनदेन में आनाकानी से फुटकर व्यापार पर असर
ललितपुर।
मंदी के दौर से गुजर रहे बाजार पर एक नया संकट है। पिछले कुछ दिनों से थोक व्यवसायियों ने सिक्कों को लेने में आनाकानी शुरू कर दी है और फुटकर दुकानदार भी इसी राह पर चल पड़े हैं। जिले में हालत यह हो गई है कि हर कोई अपने पास रखे सिक्कों को खपाने की जुगाड़ में है। इससे फुुटकर व्यापार प्रभावित होने लगा है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जब पांच सौ व एक हजार के नोट को चलन से बाहर किया था, तब बाजार में लेनदेन को प्रभावित होने से रोकने के लिए सिक्कों की मदद दी गई थी। बैंकों ने रखे सिक्कों को ग्राहकों के बीच पहुंचाया था। इस दौरान दुकानदारों से लेकर आम व्यक्ति ने बेहिचक सिक्के स्वीकार किए। नोटबंदी के एक साल में परिस्थितियां ठीक इसके विपरीत हो गईं। वर्तमान में एक, दो, पांच और दस रुपये के सिक्के को स्वीकार करने की जगह आनाकानी शुरू हो गई है। जो भी व्यक्ति या दुकानदार पांच सौ, एक हजार या इससे अधिक के सिक्के लेकर थोक व्यवसायी के पास पहुंचाता है तो वह उसे लेने से इंकार कर देते हैं। इस स्थिति में फुटकर दुकानदारों के पास हजारों में सिक्के एकत्रित हो गए हैं। सब्जी, गुटखा, चाय व किराने के दुकानदार दस-बीस रुपये से अधिक के सिक्के नहीं लेते हैं। यदि किसी ने जबरदस्ती दे दिए तो दुकानदार इन सिक्कों को दूसरे को थमाने की फिराक में सक्रिय हो जाता है। फुटकर दुकानदारों का कहना है कि जब थोक विक्रेता सिक्के नहीं लेंगं तो वह अपने पास रखकर क्या करेंगे? ऐसे में उनका पैसा जाम हो जाएगा। वहीं, व्यापारिक संगठन बैंकों पर सिक्कों को स्वीकार नहीं करने का आरोप लगा रहे हैं। इस तरह सिक्कों के लेनदेन की बड़ी समस्या खड़ी हो गई है। हालांकि, जिला प्रशासन ने सिक्कों को चलन में बनाए रखने के लिए कदम उठाने आरंभ कर दिए हैं।
प्रबंधक के समक्ष रखें समस्या
हर बैंक में व्यवसाय के हिसाब से चेस्ट (लॉकर) रखने के निर्देश हैं। वर्तमान में बैंकों के पास अभी पुरानी करेंसी रखी हुई है। इसे ध्यान में रखकर बैंक में सिक्के लिए जा रहे हैं। इसके अतिरिक्त भुगतान भी किया जा रहा है। जिस व्यापारी का स्वयं का खाता है, वह उस बैंक में शाखा प्रबंधक से मुलाकात कर इस समस्या को रख सकता है।
एसके श्रीवास्तव, मुख्य अग्रणी जिला प्रबंधक (एलडीएम)।
बैंक स्वीकार नहीं कर रहे सिक्के
छोटे दुकानदार सिक्के लेकर दुकान पर आते हैं और हम उनसे सिक्के ले लेते हैं, लेकिन जब बैंक में जमा करने की बारी आती है तो बैंक कर्मी टालामटोली करने लगते हैं। इससे सिक्कों के लेनदेन की समस्या उत्पन्न हो गई है।
संजीव जैन राजू, स्पोर्ट्स दुकानदार।
जमा हो गई छह हजार की चिल्लर
सिक्के लेने की समस्या शहर के साथ ग्रामीण क्षेत्र में भी हो गई है। दो, पांच व एक के सिक्के ग्राहकों से ले लेते हैं, लेकिन जब गांव में सब्जी खरीदने जाते हैं तो दुकानदार सिक्के लेने से मना कर देते हैं। इस वजह से करीब 6400 रुपये के सिक्के इकट्ठे हो गए हैं। अब समझ नहीं आ रहा है कि इन सिक्कों को कहां ले जाएं?
संतोष सिंह, किराना दुकानदार, ग्राम बुढ़वार।
कोई नहीं ले रहा सिक्के
ग्राहकी बनाए रखने के लिए ग्राहकों से सिक्के ले लेते हैं। इन सिक्कों से जब बड़े व्यापारियों से सामान खरीदते हैं तो वे इन सिक्कों को लेने से इंकार कर देता हैं। कहा जाता है कि यदि कागज के नोट हों तो सामान ले जाओ। वरना, अन्य कोई दुकान देखो। बैंकों ने भी सिक्कों को लेने से मना करना शुरू कर दिया है।
रामगोपाल शुक्ला, पान विक्रेता।
कोई सिक्का नहीं लेगा तो हम क्या करेंगे?
बाजार में सिक्के की यह हालत हो गई है कि सिक्कों की खनक सुनकर ही थोक विक्रेता सामान नहीं होने की बात कह देता है। जब थोक दुकानदार से उन्हें माल नहीं मिलेगा तो बेचेंगे क्या? हमें तो समझ नहीं आ रहा कि ऐसी परिस्थिति में व्यापार को कैसे बढ़ाएं? जिला प्रशासन को इस ओर ध्यान की आवश्यकता है।
सुरेंद्र जैन, गुटखा विक्रेता।
सरकारी मुद्रा का नहीं करें अनादर
बैंकों में सिक्कों को नहीं लिए जाने की शिकायत सामने आ रही है। आज ही एक कृषक ने ऐसी ही एक समस्या से अवगत कराया है। हमने व्यापारियों को सलाह दी है कि सरकारी मुद्रा का अनादर नहीं करें और सिक्कों का लेनदेन बिक्री में जारी रखें। बाजार में चल रहे कागज के नोटों की स्थिति बेहद खराब है, ऐसे में सिक्के ही उपयुक्त हैं।
अनिल जैन अंचल, महामंत्री जिला उद्योग व्यापार प्रतिनिधि मंडल।