प्यास बुझाने को जोड़ेंगे बूंद-बूंद पानी
ललितपुर।
पेयजल संकट ग्रस्त जिले में चिह्नित 93 गांवों में जल्द ही पानी की समस्या दूर होगी। मंडलायुक्त के निर्देश पर विभिन्न विभाग पेयजल संबंधी कार्ययोजना को बनाने में लगे हैं। वन विभाग ने भी जंगलों के आसपास के 11 गांवों को वाटर रिचार्जिंग के लिए चुना है।
गर्मी आते ही जिले के कई गांवों में पेयजल संकट गहराने लगता है। 93 गांव तो ऐसे हैं जहां भूगर्भ जल स्तर नीचे खिसक जाता है, जिससे हैंडपंप सहित प्राकृतिक जल स्रोत भी सूख जाते हैं। कई जगहों पर तो हैंडपंप के रीबोर भी सफल नहीं होते हैं। इस स्थिति में ग्रामीणों को टैंकर की जलापूर्ति पर निर्भर रहना पड़ता है। मंडलायुक्त झांसी अमित गुप्ता ने इसे गंभीरता से लेते हुए विभिन्न विभागों से चिह्नित ग्रामों की पेयजल समस्या का हल खोजने के निर्देश दिए हैं। वन विभाग ने जंगलों के आसपास के ग्यारह गांवों में मनरेगा के अंतर्गत मृदा संरक्षण के कार्य कराने का निर्णय लिया है। सामाजिक वानिकी प्रभाग के प्रभागीय निदेशक वीके जैन ने इसकी कार्ययोजना बनाना प्रारंभ कर दिया है। उनका कहना है कि चिह्नित ग्रामों में छोटी बंधियों का निर्माण कर वाटर रिचार्जिंग का काम किया जाएगा। इससे चिह्नित ग्रामों का जलस्तर ऊपर उठ सकेगा। अन्य विभागों के अफसर भी कार्ययोजना बना रहे हैं। जिलाधिकारी के अनुमोदन के उपरांत तैयार कार्ययोजना पर काम शुरू कर दिया जाएगा।
इन ग्रामों में होगा वाटर रिचार्जिंग का काम
वन विभाग ने जंगलों के आसपास ग्राम चिह्नित किए हैं। इनमें ग्राम सौजना, पिपरा, राजपुर, कुर्रट, दांगली, छिपाई (पठला), हंसारी, बादरौन, महरौनीखुर्द, दैलवारा, दूधई शामिल हैं।
कराया जा रहा सत्यापन
जल निगम द्वारा लगाए गए हैंडपंप एवं रीबोर के कार्यों का सत्यापन जिला विकास अधिकारी देवेंद्र प्रताप अपनी देखरेख में करा रहे हैं। समस्याग्रस्त ग्रामों में बड़ी संख्या में हैंडपंप सूख गए थे। इसके बाद रीबोर और नए हैंडपंप लगाए। लेकिन, समस्या का पूरी तरह समाधान नहीं सका है।