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साब! बंदूक को लाइसेंस चाने

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साब! बंदूक को लाइसेंस चानें
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ललितपुर। इन दिनों जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक कार्यालय में ऐसा नजारा दिखाई दे रहा है कि जिसे देखो वही अपनी जान-माल का खतरा बताकर बंदूक का लाइसेंस पाने की जुगत भिड़ा रहा है। कोई बड़े नेताओं की सिफारिश लगा रहा है तो कोई अपने रसूख का इस्तेमाल कर रहा है। जनता की समस्याओं का समाधान करने बैठे अधिकारियों की समझ में नहीं आ रहा है कि क्या करें ? यदि परमीशन दे दो तो और लोग कतार में आ जाते हैं, यदि इंकार कर दो तो पार्टी में अपने संबंधों की दुहाई देकर नाराज हो जाते हैं।
जिलाधिकारी कार्यालय हो या पुलिस अधीक्षक कार्यालय, दोनों की स्थानों पर बंदूक का लाइसेंस पाने वाले नजर आ रहे हैं। अधिकारी पूछते हैं कि लाइसेंस क्यों चाहिए तो वह तर्क देते हैं कि उन्हें लाइसेंस इसलिए चाहिए, क्योंकि जान को खतरा है। इसके इतर कुछ लोग यह भी कहते हैं कि साब! अपनी सरकार हे, अभी मौका है, फिर जाने कब लाइसेंस बन पाएगा, तो कुछ लोग लोकसभा चुनाव से पहले लाइसेंस बनवाने की जिद पकड़े हुए हैं। क्योंकि उन्हें लगता है कि चुनाव के बाद लाइसेंस बनने बंद हो जाएंगे, इसलिए अभी मौका है। एक भाजपा नेत्री किसी की सिफारिश लेकर साहब के पास पहुंची, लेकिन उन्हें मना कर दिया गया।
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उधर, अफसरों के सामने भी अजीब स्थिति है। वह चाह कर भी किसी को मना नहीं कर पा रहे हैं। क्योंकि, जो देखो वह साहब को फोन करा रहा है। कुछ लोग तो सीधा कह देते हैं कि यदि लाइसेंस नहीं बनवाया तो क्या फायदा पार्टी से जुड़ने का। अधिकारियों के पास यदि कोई मिलने आ रहा है तो पहले उससे पूछा जाता है कि क्या काम है। यदि वह कह देता है कि बंदूक के लाइसेंस के लिए आए हैं तो धर्म संकट आ जाता है कि मुुलाकात की जाए या नहीं। इस संबंध में जिलाधिकारी मानवेंद्र सिंह ने कहा कि बंदूक के लाइसेंस अब लोकसभा चुनाव के बाद ही बन पाएंगे, क्योंकि कभी भी लोकसभा चुनाव की आचार संहिता लग जाएगी।
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