जीएसटी के नए तरीकों से व्यापारियों को हो रहा शोषण
ललितपुर।
जीएसटी के लागू होने के बाद जीएसटी के नये तौर तरीकों से व्यापारियों को होने वाली समस्याओं और जीएसटी के नियमों की आड़ में होने वाले शोषण का आरोप लगाते हुए जिला उद्योग व्यापार मंडल ने वित्त मंत्री अरुण जेटली को एक ज्ञापन भेजकर समस्याओं के निराकरण की मांग की है।
ज्ञापन में बताया गया है कि जीएसटी पोर्टल सात महीने में सुचारु रूप से काम नहीं कर रहा है। जुलाई 2017 के जीएसटी आर-2 व जीएसटीआर-3 रिटर्न आज तक भी जमा नहीं हो पाए हैं। जीएसटीआर-3 बी का भार व्यापारियों पर अनावश्यक डाला गया है। जीएसटी आर-1, जीएसटी आर-2 व जीएसटी आर-3 भी भरना आवश्यक किया गया है। मांग की गई कि जीएसटी में एक रिटर्न मासिक या त्रैमासिक भरने की अनिवार्यता रखी जाए। जिससे जीएसटी पोर्टल सुचारु रुप से कार्य कर सकेगा। व्यापार को आसानी होगी और सरकार को मिलने वाले राजस्व में इजाफा होगा। उत्तर प्रदेश में जीएसटी विभाग का सचल दल और एसआईबी विभाग के भ्रष्टाचार और उनके अनुचित कार्यों पर सख्ती से रोक लगाने की मांग की है। व्यापार मंडल की अनुमति के बगैर किसी भी जिले में किसी भी प्रतिष्ठान की जांच न की जाए। एक देश एक टैक्स और एक बाजार के नारे को सार्थक करने के लिए आवश्यक ई-वे बिल जैसी व्यवस्था को समाप्त किया जाए। जीएसटी में टैक्स की दर केवल दो या अधिकतम तीन रखी जाए। टैक्स की दर अन्य देशों की भांति 18 प्रतिशत से अधिक न रखी जाए। ज्ञापन पर जिला अध्यक्ष सुरेश बड़ेरा, महामंत्री प्रदीप सतरवांस, प्रदीप खजुरिया, प्रदीप त्रिपाठी, सुनील कुमार जैन, अजित खजुरिया, मुहम्मद इकबाल, मनीष दुबे, अनिल चौधरी, सुमत सिंघई, मनीष सड़ैया, शभेंदु कुमार जैन, अभिषेक अनौरा, अरुण मिश्रा, जिनेंद्र चढ़रऊ, कमलेश वर्मा, संजय जैन, समित समैया, मनोज जैन, भरत रिछारिया, ललित जैन के हस्ताक्षर हैं।