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टेल तक पानी नहीं पहुंचने से कहीं सूखी न रह जाए फसल

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टैल तक नहीं पहुंच रहा पानी, किसान परेशान
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बीच नहर में पत्थर का आड़ा लगाने वाले दबंगों पर नहीं कस रही नकेल
जाखलौन पंप केनाल का सिंचाई रोस्टर जारी, नहीं हो पा रही सिंचाई
दर्जनों गांवों के खेतों में अब तक नहीं पहुंचा पानी
अमर उजाला ब्यूरो
ललितपुर।
खरीफ में झटका खा चुके किसानों के लिए रबी की फसल भी मुश्किल भरा काम साबित हो रही है। रोस्टर के अनुसार भले ही नहरों का संचालन शुरू कर दिया गया हो, लेकिन दर्जनों गांव के किसानों को नहर से टेल तक पानी नहीं मिल पा रहा है, इससे उन्हें फसल बर्बाद होने की चिंता सता रही है। कहीं, इस बार फसल पानी के अभाव में सूख न जाए इस आशंका को लेकर कृषक परेशान हैं। बीच नहर में पत्थर की आड़ा लगाकर सिंचाई को बाधित करने वाले दबंगों से निपटने में सिंचाई विभाग नाकाम साबित हो रहा है।
जाखलौन पंप केनाल का सिंचाई रोस्टर शुरू होने के बाद भी किसानों को सिंचाई का पर्याप्त लाभ नहीं मिल पा रहा है। जाखलौन पंप केनाल के अंतर्गत कई गांव की माइनर अब भी सूखी हैं, जहां किसानों को पानी पहुंचने का इंतजार है। जाखलौन पंप केनाल (जेपीसी) की मुख्य नहर करीब 34 किलोमीटर लंबी है और इसके बाद यह कई भागों में बंटकर माइनरों में तब्दील हो गई है। जेपीसी के मुख्य नहर गनगौरा की हैड माइनर तक पहुंची है। जहां से यह लागौन, दैलवारा और रसोई माइनरों में बंटती है। लागौन के अंतर्गत ग्राम लागौन, थनवारा, टौरिया, चौंरसिल, मड़वारी माइनर से खेतों में सिंचाई को पानी पहुंचता है। जबकि दैलवारा मोड़ के अंतर्गत दैलवार, अमरपुर, रजवारा, बिरौरा माइनर के माध्यम से दर्जनों गांवों में सिंचाई होती है।
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बता दें कि गत 29 अक्टूबर से जाखलौन पंप केनाल का संचालन शुरू हो चुका है। लेकिन 12 दिन बाद भी इस नहर में मात्र 29 किलोमीटर तक ही पानी पहुंच सका है। जबकि करीब पांच किलोमीटर लंबी नहर में अब भी पानी नहीं पहुंच पाया है। बुवाई शुरू होने के करीब 15 दिन निकल चुके हैं, जबकि कुछ क्षेत्रों में बुवाई चल रही है। जिस पर किसानों को बुवाई के दौरान खेतों की सिंचाई करना आवश्यक है। वहीं लागौन मोड़ के अंतर्गत माइनर से करीब 15 किलोमीटर, दैलवारा मोड़ की माइनरों से करीब 12 किलोमीटर और रसोई के अंतर्गत करीब 10 किलोमीटर क्षेत्र के दर्जनों गांवों के किसानों को सिंचाई के लिए नहर का पानी उपलब्ध नहीं हो पा रहा है। इसका सबसे बड़ा कारण यह है कि हर गांव के किसान सिंचाई पहले करना चाहता है, जिसके चलते कई जगह किसानों द्वारा मुख्य नहर में पत्थरों की आड़ लगा दी गई है। जिससे पानी नहर में आगे तक काफी कम मात्रा में जा रहा है। ऐसा एक दो जगह नहीं बल्कि कई जगह केनाल में आड़ लगाए गए हैं। इससे दर्जनों गांव के किसानों का सिंचाई कार्य बुरी तरह बाधित हो गया है। यदि यही हालात रहे तो पूरे महीने भर भी नहर संचालन होने के बाद भी केनाल की टेल और माइनरों तक पानी नहीं पहुंच सकेगा और किसानों को इस बार भी सिंचाई से वंचित रहना पड़ जाएगा। गनगौरा माइनर के बाद के ग्रामों के अंतर्गत ग्राम गनगौरा, नैगांव, बिरौरा, कुआंतला, रावगढ़, गुजरातन, दैलवारा, खुरा, अमरपुर, करगन, नैखेड़ा, बख्तर, बूचा, मनगुवां, पंचमपुर, अंधियारी, जैरवारा, टौरिया, मड़वारी, थनवारा, भरतपुरा समेत करीब 30 गांवों में नहर का पानी नहीं पहुंचने से सिंचाई ठप चल रही है।
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सिंचाई का रोस्टर हुआ फेल
सिंचाई विभाग द्वारा बनाया गया जाखलौन पंप केनाल का सिंचाई रोस्टर फेल हो गया है। तीनों विभागों सिंचाई, विद्युत और मैकेनीकल विभाग में सही तालमेल नहीं होने से किसानों को परेशान होना पड़ा रहा है। शुरू में ही करीब 15 दिन देरी से नहर चलाई गई है और नहर के अंतिम छोर तक पानी नहीं पहुंचने से किसानों को फसल बर्बादी चिंता सता रही है।
केहर सिंह बुंदेला, प्रांतीय उपाध्यक्ष भारतीय किसान संघ।
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