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कम्प्यूटराइज्ड होगी आंगनबाड़ी व लाभार्थियों की सूची

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कंप्यूटराइज्ड होगी आंगनबाड़ी व लाभार्थियों की सूची
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ललितपुर।
अपने वाले दिनों में आंगनबाड़ी केंद्रों पर फर्जी लाभार्थियों को पंजीकृत करके पोषाहार वितरण में होने वाला फर्जीवाड़ा नहीं चलेगा। इसके लिए प्रदेश सरकार आंगनबाड़ी केंद्रों के लाभार्थियों की सूची को कंप्यूटराइज्ड करने जा रही है। इसको लेकर बाल विकास विभाग ने लाभार्थियों की सूची का भौतिक सत्यापन का कार्य शुरू कर दिया है।
आंगनबाड़ी केंद्रों के लाभार्थियों की संख्या में गोलमाल न किया जा सके, इसके लिए प्रदेश सरकार राज्य के समस्त जनपदों में संचालित आंगनाबाड़ी केंद्रों के नाम और उनमें पंजीकृत लाभार्थियों के ब्योरा को कंप्यूटराइज्ड कराया जा रहा है। इसके अलावा सरकार सभी लाभार्थियों को आधार कार्ड से लिंक भी करा रही है। इस संबंध में बाल विकास सेवा और पुष्टाहार की सचिव अनिता सी मेश्रा ने समस्त बाल विकास विभाग के जिला कार्यक्रम अधिकारियों को पूर्व में ही आदेश जारी किया जा चुका है। इसी शासनादेश के क्रम में जिला कार्यक्रम अधिकारी दीपिका घोष ने जनपद स्तर पर आंगनबाड़ी केंद्रों पर लाभार्थियों की सूची का भौतिक सत्यापन का कार्य शुरू करा दिया है। भौतिक सत्यापन के बाद ही लाभार्थियों की सूची को कंप्यूटराइज्ड किया जाएगा। गौरतलब है आंगनबाड़ी केंद्रों पर शून्य से 06 वर्ष तक की आयु वाले बालक-बालिकाओं को, गर्भवती महिलाओं और धात्रिमाताओं को सरकार से मिलने वाले पोषहार से लाभान्वित किया जाता है। यदि जनपद की बात करें तो पूरे जनपद में नगर क्षेत्र समेत समस्त ब्लॉक क्षेत्रों में कुल 01 हजार 124 आंगनबाड़ी केंद्र संचालित किया जा रहे हैं। इसमें नगर क्षेत्र में 142 केंद्र, विकासखंड बार क्षेत्र में 139 केंद्र, महरौनी क्षेत्र में 138 केंद्र, तालबेहट क्षेत्र में 186 केंद्र, मड़ावरा क्षेत्र में 144 केंद्र, बिरधा क्षेत्र में 182 केंद्र और विकासखंड जखौरा क्षेत्र में 193 आंगनबाड़ी केंद्र संचालित हो रहे हैं। जनपद के इन समस्त केंद्रों पर बीते मार्च माह की सूची के अनुसार शून्य से छह वर्ष की आयु वाले कुल 1,95,577 बच्चे, 17,510 गर्भवती महिलाएं और 17,918 धात्रि माताऐं केंद्रों पर लाभान्वित हो रही हैं। वर्तमान में विभाग द्वारा भौतिक सत्यापन कराकर नए सूची तैयार की जा रही है, जिसमें लाभार्थियों की संख्या में परिवर्तन आ जाएगा।
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बच्चों के आधार कार्ड लिंक में आएगी समस्या
आंगनबाड़ी केंद्रों पर लाभान्वित होने वालों में सबसे अधिक लाभार्थी बच्चे है, जिनकी कुल संख्या 1.95 लाख से अधिक है। इससे अधिक समस्या इन बच्चों के आधार कार्ड लिंक करने में आएगी। इनमें से दस-बीस प्रतिशत ही बच्चे ऐसे हाेंगे, जिनके आधार कार्ड बने हुए हैं। ग्रामीण आंचलों में छोटे बच्चों के बहुत की कम आधार बने हुए है। इसका उदाहरण परिषदीय विद्यालयों के छात्रों का आधार नामांकन की प्रक्रिया है। वर्तमान में 90 हजार बच्चे ऐसे हैं, जिनका अभी भी आधार नामांकन नहीं हो सका है। महिलाओं के आधार कार्ड लिंग में अधिक समस्या नहीं आएगी।

पोषाहार की होगी ई-मॉनिटरिंग
प्रदेश सरकार राज्य के आंगनबाड़ी केंद्रों में बांटे जाने वाले पोषाहार की भी ई-मॉनिटरिंग की जाएगी। ऐसा होने से पोषाहार के वितरण में होने वाली अनियमितताएं में काफी हद तक कमी आने की संभावनाएं हैं। यह कार्य मोबाइल एप के माध्यम से किया जाएगा, सरकार अभी एप तैयार कराने में जुटी हुई है। यह मोबाइल एप बनाने का जिम्मा प्रदेश सरकार ने यूपी डेस्कों कंपनी को दिया है। सबसे पहले यह पायलट प्रोजेक्ट कुछ जिलों में शुरू होगा। योजना सफल होने के बाद पूरे प्रदेश में इसे लागू किया जाएगा। एप के तैयार हो जाने के बाद विभिन्न शिकायतें जैसे लाभार्थियों को पोषाहर बंटने से पहले की बाजार में बेच देना, लाभार्थियों को कम मात्रा में पोषाहार उपलब्ध होना या फिर जनपद में ही कम मात्रा में पोषाहर उपलब्ध हो पाना आदि इन समस्यों पर काफी हद तक अंकुश लग सकेगा।

-इस तहर करेगा एप काम
इस मोबाइल एप में वर्तमान में डाटा फीडिंग का काम चल रहा है। इसमें अफसरों के साथ जन प्रतिनिधियों व मातृ समितियों के नंबर फीड किए जा रहे हैं। जैसे ही पोषाहार (पंजीरी) को ट्रक से रवाना दिया जाएगा, वैसे ही संबंधित जनपद व केंद्रों पर डीपीओ, सीडीपीओ, मातृ-समिति, आंगनबाड़ी वर्कर व ग्राम प्रधान सभी के मोबाइल पर एसएमएस पहुंच जाएगा। गोदाम से परियोजना कार्यालय पहुंचने तक एसएमएस आएगा।
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कैसे रुकेगी घपले बाजी
आंगनबाड़ी केंद्रों पर सबसे ज्यादा घपले बाजी लाभार्थियों की उपस्थिति की आड़ में होती है। सरकार द्वारा केंद्रों पर पंजीकृत लाभार्थियों के सापेेक्ष पोषाहार भेजा जाता है और अन्य व्यय किया जाता है। हकीकत तो यह है कि पंजीकृत लाभार्थियों के सापेक्ष बहुत कम ही लाभार्थी हर रोज केंद्र पर उपस्थित होते हैं। इन्हीं अनुपस्थित लाभार्थियों को उपस्थित दिखाकार लंबा घपला किया जाता है। लाभार्थियों की उपस्थिति के लिए भी ऑनलाइन व्यवस्था होनी चाहिए।
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