संसाधनों की कमी से बुंदेलखंड में शिक्षा का अभाव
ललितपुर। जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान में शिक्षा का अधिकार को लेकर विधिक साक्षरता शिविर लगाया गया। सचिव रवि कुमार गुप्त ने बताया कि अंग्रेजों द्वारा बनाए गए कानूनों का उद्देश्य भारत में अधिक से अधिक आर्थिक लाभ प्राप्त करना था, किंतु आजादी के बाद अब यह देश हमारा है। देश के विकास के लिए नागरिकों का शिक्षित होना आवश्यक है।
जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव रवि कुमार गुप्त की अध्यक्षता में आयोजित शिविर में डीएलएड छात्रा अंजना राजपूत ने सरस्वती वंदना प्रस्तुत की। छात्रा आकांक्षा ने स्वागत गीत प्रस्तुत किया। बृजकिशोर जैन ने बताया कि किसी भी देश के विकास के लिए शिक्षा अत्यंत महत्वपूर्ण है। संसाधनों की कमी के कारण बुंदेलखंड क्षेत्र में शिक्षा का अभाव रहा है। बच्चे शिक्षा ग्रहण कर सकें, इसके लिए भारत सरकार ने शिक्षा का अधिकार अधिनियम लागू किया है। इस अधिनियम में 06 से 14 वर्ष की आयु के बच्चों के लिए नि:शुल्क एवं अनिवार्य रुप से शिक्षा प्रदान करने का प्रावधान किया गया है।
प्रभारी बेसिक शिक्षा अधिकारी भरत लाल वर्मा ने कहा कि संविधान में मूल अधिकारों में बच्चों के लिए नि:शुल्क शिक्षा प्राप्त करने की व्यवस्था की गई है। जमील अहमद ने बताया कि शरीर में जीभ ऐसा अंग है, जो सकारात्मक तथा नकारात्मक दोनों प्रतिक्रियाओं को व्यक्त करने का कार्य करती है। हम किसी को तभी ज्ञान दे सकते हैं, जब हमें स्वयं ज्ञान का बोध होगा। जीजीआईसी की प्रधानाचार्या पूनम मलिक ने कहा कि शिक्षक का लक्ष्य विद्यार्थी को सकारात्मक रुप से परिपूर्ण बनाना होता है।
जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव ने कहा कि विधिक साक्षरता शिविर छात्र-छात्राओं को उनके विधिक अधिकारों से जागरूक कराने के लिए आयोजित किया जाता है। जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान प्रभारी उमा चौबे ने आभार व्यक्त किया।