एसडीएम करेगें 10-10 विद्यालयों में यूनिफार्म का सत्यापन
रेडिमेड यूनिफार्म वितरण के खिलाफ डीएम ने अपनाए सख्त रुक
अमर उजाला ब्यूरो
ललितपुर। शासन की मंशा व मानकों के विपरीत परिषदीय विद्यालयों में बच्चों को रेडिमेड यूनिफार्म बांटने वाले शिक्षकों की अब खैर नहीं है। डीएम मानवेंद्र सिंह ने जनपद के पांचों तहसील के एसडीएम को अपने-अपने क्षेत्र के कम से कम दस-दस परिषदीय विद्यालयों में यूनिफार्म का सत्यापन कराने के निर्देश दिए हैं। इससे शिक्षा विभाग के अधिकारियों, शिक्षकों और रेडिमेड यूनिफार्म आपूर्ति करने वाले व्यापारियों में हड़कंप मच गया है।
शासन के निर्देश हैं कि शिक्षक व विद्यालय प्रबंध समितियां खुद ही यूनिफार्म का कपड़ा खरीदकर बच्चों को गुणवत्ता पूर्ण यूनिफार्म सिलवाकर वितरित करें। इसके बावजूद जनपद के कई परिषदीय विद्यालयों में शिक्षक अपनी जिम्मेेदारी से बचने व चंद रुपये के कमीशन के लालच में बच्चों को बाजार की सस्ती व घटिया गुणवत्ता की रेडिमेड यूनिफार्म बटवा रहे हैं। लेकिन जल्द ही ऐसे शिक्षकों पर गाज गिरने वाली है, जिन्होंने अपने विद्यालय में बच्चों को रेडिमेड यूनिफार्म बांट दी है या फिर रेडिमेड यूनिफार्म वितरण कराने के इंतजार में अभी तक यूनिफार्म सिलवाने के कार्य की शुरुआत भी नहीं की है। डीएम मानवेंद्र सिंह ने इस ओर सख्त रुक अपना लिया है। डीएम ने जनपद की सभी पांचों तहसील क्षेत्र के उप जिलाधिकारियों को निर्देशित किया है कि वह अपने-अपने क्षेत्र के कम से कम 10 परिषदीय विद्यालयों का निरीक्षण करके वितरित की गई यूनिफार्म की गुणवत्ता का सत्यापन करें और यह भी जांचे कि बच्चों को बांटी गई यूनिफार्म स्थानीय स्तर पर बच्चों का नाप लेकर सिलवाई गई है कि नहीं। डीएम के इस निर्देशन से बेसिक शिक्षा विभाग महकमे में हड़कंप मच गया है। गौरतलब है कि विगत रोज विद्यालय में रेडिमेड यूनिफार्म वितरित करने के मामले में महरौनी क्षेत्र के तीन परिषदीय विद्यालयों के प्रधानाध्यापकों के खिलाफ कार्रवाई करके इस सत्र की वेतन वृद्धि रोक दी गई है और खंड शिक्षा अधिकारी को भी यहां से हटा दिया गया है। इसके साथ ही यह रेडिमेड यूनिफार्म आपूर्ति करने वाले दो व्यापारियों के खिलाफ मुकदमा भी पंजीकृत कराया गया है।
कई शिक्षकों पर गिर सकती है गाज
ऐसे केवल यही तीन विद्यालय नहीं है जहां पर रेडिमेड यूनिफार्म का वितरण हुआ है। जनपद के कुछ परिषदीय विद्यालयों में ऐसे विद्यालयों की संख्या अधिक होगी जहां पर रेडिमेड यूनिफार्म वितरित की गई है। यूनिफार्म माफिया ऐसे परिषदीय शिक्षकों या शैक्षिक नेताओं को अपने इस गौरखधंधे में शामिल कर लेते है जो परिषदीय विद्यालयों में थोड़ी बहुत भी पकड़ रखते हैं। उनके माध्यम से वह रेडिमेड यूनिफार्म की आपूर्ति कराते हैं और बच्चो को वितरित कराते हैं। यह माफिया प्रशासन व शासन की आंखों में धूल झौंकने के लिए विद्यालयों में कपड़ा व्यापारी और टेलर के नाम की कुटेशन व बिल भी उपलब्ध करा देते है, लेकिन यह सब फर्जी होते हैं। यदि विद्यालयों में मिलने वाले कुटेशन का जमीनी स्तर पर सत्यापन करा लिया जाए तो सारी हकीकत सामने आ जाएगी।
उच्च प्राथमिक विद्यालयों में बताते हैं मजबूरी
जनपद में 500 के करीब उच्च प्राथमिक विद्यालय हैं, इनमें से कुछ ही विद्यालयों ऐसे होंगे जहां पर मानकों के अनुसार यूनिफार्म वितरित की जाती है। यहां हर वर्ष रेडिमेड यूनिफार्म की वितरित की जाती है। कक्षा 01 का बच्चा हो या फिर कक्षा 08 का बच्चा हो सभी की यूनिफार्म के लिए शासन से 200 रुपये की निर्धारित हैं। जबकि कक्षा 01 और कक्षा 08 के बच्चों के शारीरिक आकार में काफी अंतर होता है। इसलिए 200 रुपये में गुणवत्ता व मानकों के अनुरूप यूनिफार्म वितरित कराना आसान नहीं है। इसलिए उच्च प्राथमिक विद्यालयों में रेडिमेड यूनिफार्म की वितरित की जाती है।
हो जाता है बंदरबांट
एक यूनिफार्म के लिए शासन से 200 रुपये निर्धारित हैं, लेकिन स्थानीय बाजार में ही यह रेडिमेेड यूनिफार्म 130 से 140 रुपये तक में मिल जाती है। इसके बाद बचने वाले 60 रुपये का यह यूनिफार्म माफिया व दलाल शिक्षक आपस में बंदलबांट कर लेते हैं। लंबे समय से बेखौफ व धड़ल्ले से चलते आ रहे इस खेल में अधिकारियों की संलिप्तता को झुठलाया भी नहीं जाता है।