गर्मी शुरू होते ही पीने के पानी का टोटा
ललितपुर।
गर्मी की शुरुआत होते ही लोगों के बीच पानी के लिए संघर्ष दिखाई देने लगा है, जहां गांवों में लगे अधिकांश हैंडपंप पहले ही साथ छोड़ चुके हैं वहीं प्राचीन जल स्रोतों में भी जल गायब हो गया है। इसका खुलासा विभागीय अफसरों द्वारा कराए सत्यापन में हुआ है। वर्तमान में 175 कुएं, 56 तालाब और 573 हैंडपंप सूख चुके हैं। अन्य जल स्रोत सूखने की कगार पर हैं।
पिछले सालों के मुकाबले इस साल मार्च माह में ही गर्मी ने रोद्र रूप दिखाना आरंभ कर दिया है। नदी, नाले, तालाब और कूपों में तेजी से पानी नीचे की ओर सरक रहा है। शहजाद नदी में जगह-जगह पानी की धार टूट गई है तो कई स्थानों पर पानी की धार सिकुड़ गई है। अन्य नदी, नालों का बुरा हाल है। इस समय जिले के 162 गांवों में तो पेयजल का भीषण पेयजल संकट उत्पन्न हो गया है। विभागीय अधिकारियों ने वास्तविक स्थिति तक पहुंचने के उद्देश्य से जल स्रोतों का सत्यापन कराया। इसमें जो गांवों के हालात दिखे हैं, उसने अफसरों को चिंता में डाल दिया है। ब्लाकवार सत्यापन पर नजर डालें तो विकासखंड बार में 122 हैंडपंप खराब, 72 कूप व 24 तालाब सूख गए हैं। महरौनी में 161 हैंडपंप खराब, 37 कूप व 17 तालाब सूख चुके हैं। मड़ावरा में 26 हैंडपंप खराब, 3 कूप व 5 तालाब सूखे हैं। तालबेहट में 45 हैंडपंप खराब हैं। जखौरा में 129 हैंडपंप खराब, 25 कूप व 1 तालाब सूख गया है। बिरधा में 90 हैंडपंप खराब, 38 कूप व 9 तालाब सूख चुके हैं। इस प्रकार जिले में 573 हैंडपंप खराब, 175 कूप व 56 तालाबों से पानी गायब हो गया है। इससे पशुओं को भी पेयजल संकट का सामना करना पड़ रहा है। ब्लाक तालबेहट व महरौनी में तो जानवरों के लिए चरही भी नहीं हैं। शहर में पहले से नेहरू नगर, चांदमारी, बैंक कालोनी, बसुंधरा कालोनी, रैदासपुरा सहित विभिन्न मुहल्लों में पेयजल समस्या बनी हुई है। यदि बिगड़ रहे हालातों पर ध्यान नहीं दिया गया तो आने वाले दिनों में पेयजल संकट से निपटना मुश्किल हो जाएगा।
सिंचाई विभाग द्वारा भरे जा रहे तालाब
सिंचाई विभाग द्वारा तालाब भरवाए जा रहे हैं। वहीं, ग्राम पंचायतें खराब हैंडपंपों की मरम्मत करा रही हैं।
देवेंद्र प्रताप, जिला विकास अधिकारी
जागरूक नहीं हुए तो पानी के लिए युद्ध लड़ना होगा
ललितपुर। हम जागरूक नहीं हुए तो आने वाले समय में हमें पानी के लिए युद्ध न करना पड़े। इस तरह की आशंकाएं संस्था करुणा इंटरनेशनल के तत्वावधान में आयोजित गोष्ठी में व्यक्त की गई। अध्यक्षता करते हुए सेवानिवृत्त प्रवक्ता रमेशचंद्र जैन ने कहा कि जल के बिना हमारा जीवन अधूरा है, जल से ही तो कल है। व्यक्ति को पानी का महत्व तब समझ में आता है जब उसे प्यास लगती है। डा. सुनील जैन संचय ने कहा कि जितनी पानी की बर्बादी वर्तमान समय में हो रही है उसका परिणाम है कि हमें पेयजल संकट जूझना पड़ रहा है। यदि अभी नहीं संभले तो हमें पानी के युद्ध के लिए तैयार होना पड़ेगा। अखिलेश श्रीवास्तव ने बताया कि वर्तमान में लोगों की सोच बन गई है कि जब दूसरा व्यक्ति पानी को बचाएगा तब मैं भी पानी को बचाऊंगा। इस तरह की सोच से पानी की बर्बादी पर अंकुश नहीं लग पा रहा है। राजीव जैन बजाज का कहना है कि जल से ही हमारी दैनिक आवश्यकताओं की पूर्ति होती है। जब जल बचेगा तो हमारा पर्यावरण भी बचेगा। मनोज सक्सेना का कहना है कि हमने जंगल के जंगल उजाड़ दिए हैं, जिससे वर्षा भी कम होती है और जल का संचय भी बहुत कम हो रहा है। नतीजा यह है कि हर जगह पानी की समस्या है। शिक्षक पुष्पेंद्र जैन ने बताया कि जल संरक्षण के लिए पहले हमें आगे आना होगा। शैलेष तिवारी ने कहा कि विश्व जल दिवस मनाना तब सार्थक होगा जब सभी बर्बाद होते हुए जल को बचाने के लिए आगे आएंगे। इस दौरान सुधेश खरे मौजूद रहे। संचालन शैलेष तिवारी ने किया।