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असहायों को ठंड से नहीं बचा पा रहे रैन बसेरा

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असहायों को ठंड से नहीं बचा पा रहे रैन बसेरा
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ललितपुर।
गरीब और असहायों को रात ठिठुरते हुए काटनी पड़ रही है। नगर पालिका व प्रशासन ने जो रैन बसेरा में इंतजाम किए हैं, वह नाकाफी साबित हो रहे हैं। नगर पालिका तो अभी तक कंबल का वितरण भी शुरू नहीं कर पाया है। वहीं, अलाव की आग भी रात नौ बजे के बाद ठंडी हो रही है। ऐसी स्थिति में एक सहरिया परिवार ने खुले आसमान के नीचे ही डेरा डाल दिया है।
जनवरी माह की शुरुआत होते ही ठंड का प्रकोप बढ़ गया है। जहां रात्रि में आठ बजे के बाद कोहरे होना शुरू हो जाता है। वहीं, सर्द हवाएं परेशान कर रही हैं। इसके मद्देनजर नगर पालिका परिषद ने शहर के सोलह चिह्नित स्थानों पर अलाव व कोतवाली के सामने रैन बसेरा आरंभ किया है। वहीं, जिला प्रशासन की ओर से ग्रामीण क्षेत्रों में कंबलों का वितरण किया जा रहा है। लेकिन ठंड के सामने यह सारे प्रयास नाकाफी दिखाई दे रहे हैं। बीती रात अमर उजाला की टीम ने इसकी हकीकत जानने के लिए शहर के विभिन्न स्थलों का जायजा लिया। रात्रि करीब आठ बजे कोतवाली के सामने रैन बसेरा में सिर्फ कर्मचारी ही मौजूद रहे जो अलाव से ठंड का बचा रहे थे। कर्मचारियों ने बताया कि रात्रि करीब दस बजे खाना खाने के उपरांत रैन बसेरा में निर्धन व असहाय व्यक्ति पहुंचते हैं। यहां नौ पलंग, तीन फर्श, सात गद्दा व चौदह कंबलों की व्यवस्था है, लेकिन रजाई एक भी नहीं मिली। रैन बसेरा की लगभग सभी खिड़कियों के कांच क्षतिग्रस्त हैं, जिससे ठंड हवा अंदर आती है। वहीं, जिला अस्पताल में दो रैन बसेरा में हैं, जिनमें एक रैन बसेरा में अंधेरा पसरा था तो दूसरे में आधा दर्जन महिला-पुरुष ठहरे थे। यहां ठहरे 70 वर्षीय धौर्रा निवासी बाबूलाल व 65 वर्षीय शांति का कहना है कि खुद के कपड़ों से ठंड बचा रहे हैं। यहां अस्पताल की ओर से कोई व्यवस्था नहीं है। बानौली निवासी चतरे बरार का कहना है कि दो कंबल से रात गुजार लेते थे। कोई इन कंबलों को चुरा ले गया है। जिस वजह से अब ठंड से रात भी नहीं कटती। हालांकि, कुछ लोग अलाव से ठंड बचाते नजर आए। बस स्टैंड में सांसद निधि से प्रतीक्षालय बना हुआ है, जिसमें रात्रि सात बजे ताला जड़ जाता है। आज भी प्रतीक्षालय में ताला लगा हुआ पाया गया। समीप में अलाव जल रहा था। यहां खड़े टैक्सी चालकों का कहना है कि अलाव में लकड़ी रात्रि दस बजे तक ही चलती है। इसके बाद ठंड से बचाव करना मुश्किल हो जाता है। सुबह तो और भी ठंड लगती है। यहां यात्रियों को ठहरने के लिए कोई सुविधा नहीं है। तुवन मंदिर के पास अलाव में भी लकड़ी कम पड़ रही है। कमोवेश यही स्थिति स्टेशन के पास लग रहे अलाव की है।
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खुले आसमान के नीचे गुजार रहे रात
पाल समाज के मंदिर के बगल में खुले आसमान के नीचे रह रहे सहरिया परिवार की एक सदस्य रामवती का कहना है कि वह अपनी मां कस्तूरी, भाभी पूजा व दो बच्चे के साथ खुले में रह रही है। कबाड़ बीनकर जीवनयापन करने को विवश है। जब उससे पूछा कि रैन बसेरा में क्यों नहीं रहती तो उसका जवाब था कि रैन बसेरा में कोई महिला नहीं ठहरती है। जिस वजह से वह खुद को असुरक्षित पाती है। उसे अभी तक कोई प्रशासन की ओर से कंबल भी नहीं मिल पाया है। जो बच्चे साथ रह रहे हैं वह भी स्कूल से दूर हैं ऐसे में उनका भविष्य खराब हो रहा है।

रैन बसेरा में किए जा रहे इंतजाम
रैन बसेरा की क्षतिग्रस्त खिड़कियों को सुधरवाया जा रहा है। बस स्टैंड के प्रतीक्षालय के बंद होने पर उन्होंने अनभिज्ञता जाहिर की है।
रजनी साहू, अध्यक्ष
नगर पालिका परिषद ललितपुर
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