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मंदिर में विवाद की खबर

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जातिगत आधार पर नहीं, शराब पीकर मंदिर में प्रवेश से रोका था

अंकित द्विवेदी
ललितपुर। जाखलौन के कपासी गांव में दलित को मंदिर के भीतर जाने से रोकने की घटना को गांव वाले गलत बता रहे हैं। उनका कहना है कि उसे जाति के आधार पर नहीं, शराब पीकर मंदिर में जाने से रोका गया था। दूसरी तरफ, पीड़ित रमेश कुमार का कहना है कि वह पिछले दस साल से इस मंदिर में जा रहा पर किसी ने कभी नहीं रोका। गांव में जातिगत विवाद नहीं है। उसका कहना है कि बेवजह लोगों ने उसे पीट दिया।
मालूम हो कि मंगलवार को कपासी गांव निवासी रमेश कुमार ने एसपी को प्रार्थनापत्र देकर बताया था कि तीन जुलाई की शाम साढ़े सात बजे वह मंदिर में जा रहा था। इसी दौरान गांव के ही कुछ प्रभावशाली लोगों ने उसे मंदिर जाने से रोक दिया और जाति सूचक शब्दों का प्रयोग करते हुए अपमानित किया। जब उसने मंदिर के अंदर जाने का प्रयास किया तो उन लोगों ने मंदिर से घसीटते हुए उसके साथ मारपीट की। पांच हजार रुपये भी छीन लिए। एसपी ने जांच के आदेश दिए। बुधवार को धौर्रा चौकी प्रभारी वृषभान सिंह ने गांव में जाकर लोगों से बात की और पीड़ित समेत आरोपियों के बयान लिए। इस दौरान गांव वालों ने बताया कि यह मंदिर गांव के सभी वर्गों की आस्था का केंद्र है। सभी जाति वर्गों के लोग आते-जाते हैं। पुरातन काल से चली आ रही परंपराओं को सभी वर्ग पालन करते हैं। अभी तक इस संबंध में कोई विवाद नहीं हुआ है। रमेश भी मंदिर के सभी धार्मिक कार्यक्रमों में भाग लेता है। वह रोज शाम को मंदिर भी जाता है। कभी कोई रोकटोक नहीं हुई और न ही किसी प्रकार का विवाद हुआ है। मंगलवार को रमेश शराब के नशे में था और मंदिर में जा रहा था। इस कारण उसे रोका गया था। हालांकि, गांव वालों ने यह भी कहा कि रमेश कभी-कभार ही शराब पीता है और कभी किसी से विवाद भी नहीं हुआ।
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फोटो- 26
गांव में जातिगत विवाद नहीं
पिछले दस सालों से मंदिर जा रहा हूं। मंगलवार को भी दर्शन के लिए जा रहा था। शराब के नशे में नहीं था। बिना किसी बात के कुछ लोगों ने चार-पांच झापड़ मार दिए। गांव में जातिगत विवाद नहीं है।
रमेश कुमार, शिकायतकर्ता
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फोटो- 27
मंदिर में प्रवेश पर विवाद नहीं
मंदिर में प्रवेश को लेकर कोई विवाद नहीं हुआ है और न ही किसी प्रकार की कोई रोक-टोक है। गांव के सभी वर्ग के लोग मंदिर जाते हैं और पूजा करते हैं। पुरातन परंपराएं जिस हिसाब से चली आ रही हैं उसी प्रकार उनका पालन किया जा रहा है। मारपीट की घटना का पता नहीं है। जब मैं वहां पहुंचा तो रमेश जमीन पर पड़ा था।
पप्पू, शिकायतकर्ता का भाई
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मुझे घटना की जानकारी नहीं
फोटो- 28
गांव का मंदिर लोगों की आस्था का केंद्र है, जहां सभी लोग पूजा-अर्चना करने जाते हैं। उस दिन की घटना के बारे में जानकारी नहीं है। रमेश का किसी से अभी तक कोई विवाद नहीं हुआ है। शराब भी वह जब-कभी ही पीता है। उस दिन उसने शराब नहीं पी थी।
शोभाराम, ग्रामीण
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शराब के नशे में था, इसलिए रोका
फोटो- 29
रमेश मेरी दुकान पर आकर शराब के नशे में गालियां दे रहा था। इस कारण मंदिर में अंदर जाने से मना किया था। बाकी किसी तरह का कोई विवाद नहीं है। मारपीट नहीं की गई है सिर्फ मना किया गया था। मंदिर जाने से तो किसी को नहीं रोका जाता है।
किशन यादव, ग्रामीण
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मारपीट का आरोप गलत
फोटो- 30
रमेश ने मेरे भाई पर भी मारपीट का आरोप लगाया है। भाई तो पिछले एक साल से सागर में रह रहा है। मंगलवार को एक दिन के लिए गांव आया था। उसे तो पता भी नहीं था कि उसके खिलाफ मारपीट करने की शिकायत की गई है। इस तरह की घटना झूठी है।
फूल सिंह, ग्रामीण
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फोटो- 31
मंदिर में किसी के प्रवेश पर रोक नहीं
यह विवाद उस रात दस बजे के बाद हुआ था। मैं कुटिया में भोजन तैयार कर रहा था। मंदिर में कोई भी आ सकता है। मैं पिछले पचास सालों से मंदिर में सेवा कर रहा हूं। लेकिन अभी तक ऐसा कोई विवाद नहीं हुआ है।
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मुन्नालाल, मंदिर पुजारी
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मामले को जातिगत रंग देने की कोशिश
घटना के बारे में गांव में जाकर लोगों से बात की है। मंदिर में प्रवेश से रोकने की बात को गांव वालों ने गलत बताया है। वहां बताया गया कि जातिगत आधार पर नहीं, बल्कि शराब पीकर मंदिर के अंदर जाने से रोकने का मामला है। कुछ लोग इसे जातिगत रंग देने की कोशिश कर रहे हैं। दोनों पक्षों से बात की जा रही है। जो भी दोषी होगा कार्रवाई की जाएगी।
वृषभान सिंह, चौकी प्रभारी धौर्रा
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