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शहर के लिए खतरा बनता जा रहा छियासठ साल पुराना बांध

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शहरवासियों के लिए खतरा बनता जा रहा 66 साल पुराना बांध
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ललितपुर। छियासठ साल पुराना गोविंद सागर बांध शहर के लिए खतरा बनता जा रहा है। इसकी एक वजह बांध की लंबे समय से मरम्मत नहीं हो पाना है। अफसर पानी के सीपेज (रिसाव) को रोकने के लिए अस्थाई उपचार कर देते हैं, जो ज्यादा समय तक नहीं चल पाता है। पिछली बरसात में बांध की तलहटी में पानी सीपेज होने से खतरा बढ़ गया था। इससे पहले भी पानी रिसने की शिकायतें आ चुकी है। लेकिन, इसके बाद भी बांध की कायदे से मरम्मत नहीं कराई जा रही है, जो शहरवासियों के लिए चिंता का कारण है।
जनपदवासियों की प्यास बुझाने के साथ किसानों को सिंचाई की सुुविधा मुहैया कराने के लिए आजादी के बाद गोविंद सागर बांध का निर्माण किया गया। इसमें 96.80 मिलियन क्यूबिक मीटर पानी के भंडारण की क्षमता रखी गई। इस बांध को बने हुए लगभग 66 साल हो गए। इससे न केवल इसमें सिल्ट जमा हो गई बल्कि बांध की पिचिंग खराब हो गई है। बांध के किनारे लगे खंडों के बीच की मिट्टी जगह-जगह बह हो गई है, जिससे बारिश के दौरान पानी का भंडारण बढ़ने पर रिसाव होने लगता है। पिछले वर्ष बारिश के सीजन में बांध की तलहटी में पानी के सीपेज की शिकायत हो गई थी। इससे पहले भी सीपेज की शिकायत सामने आ चुकी है।
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सिंचाई विभाग के अधिकारी सीपेज को रोकने के लिए मिट्टी व गिट्टी डालकर अस्थाई उपचार कर देते हैं, लेकिन धनाभाव के कारण उसका स्थाई उपचार नहीं किया जा रहा है। इस स्थिति में शहरवासियों को बांध से डर सा लगने लगा है। सबसे ज्यादा मोहल्ला तालाबपुरा, डोडाघाट, नदीपुरा के लोग बारिश के समय भयभीत नजर आते हैं, उन्हें लगता है कि यदि बांध में पानी का रिसाव ज्यादा हुआ तो बड़ा हादसा होने से इंकार नहीं किया जा सकता है। हालांकि, सिंचाई विभाग के अधिकारी तकनीकी तर्क देकर शहरवासियों को ढांढस बंधाते हैं। उनका कहना होता है कि जब तक सीपेज में साफ पानी आ रहा है, तब तक बांध को किसी तरह का खतरा नहीं है। जब सीपेज में गंदा पानी आने लगे, तब चिंता का कारण हो सकता है। इस बार सिंचाई विभाग ने बारिश होने से पूर्व बांध के रखरखाव पर काम आरंभ कर दिया है। बांध के सभी गेटों में आयल, ग्रीसिंग कराई गई है, इसके प्लेटफार्म में लगी लकड़ी को भी बदला गया है। पिछली बारिश में जिस स्थान पर सीपेज हुआ था, वहां गिट्टी व मिट्टी डालकर उसका उपचार करा दिया गया है। उधर, अधिकारियों का कहना है कि गोविंद सागर बांध की उम्र सौ साल है, इससे पहले बांध की सिल्ट नहीं हटाई जा सकती है।
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रबी सीजन में सिंचाई का कवरेज एरिया बढ़ा
गोविंद सागर बांध व शहजाद बांध ने पिछले वर्ष के मुकाबले इस साल रबी सीजन में ज्यादा एरिया में सिंचाई के लिए पानी उपलब्ध कराया। पिछले वर्ष 33 हजार 258 हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई हुई थी, जबकि इस साल रबी सीजन में 37 हजार 27 हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई हुई। आमतौर पर दोनों बांध 23 हजार 580 हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई का पानी उपलब्ध कराते हैं। पिछले मानसून सीजन में ज्यादा बारिश हुई, साथ ही पेट्रोलिंग कर सिंचाई के दौरान पानी की बर्बादी रोकी। इससे सिंचाई का एरिया बढ़ गया।
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शहजाद बांध से भरे गए नौ तालाब
शहजाद बांध ने सूख रहे तालाबों को भरकर जानवरों की प्यास बुझाने का काम किया है। इस बांध से ग्राम भुचेरा, जेरो, नत्थीखेड़ा, ऐवनी, पूराकलां पोखर, हसगुवां, विजयपुरा और सारसेड़ तालाब भरे गए। मई की भीषण गर्मी में ये तालाब सूख गए थे। इसके बाद भी शहजाद बांध में क्षमता के मुकाबले 45 प्रतिशत पानी अभी भी है। वहीं, गोविंद सागर बांध में 23.28 मिलियन क्यूबिक मीटर पानी उपलब्ध है, जिससे तीन से चार माह तक पेयजल की आपूर्ति की जा सकती है।
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बारिश से पहले बांध पर विभिन्न काम कराए गए हैं। इनमें सभी गेट की आयल, ग्रीसिंग, प्लेटफार्म की लकड़ी बदली गई है। गत वर्ष चिह्नित हुए सीपेज स्थल का उपचार करा दिया गया है। इसके अलावा पिचिंग मरम्मत, स्लूस व कंट्रोल रूम सहित अन्य कार्यो की कार्ययोजना बनाई जा रही है।
- मनमोहन सिंह, अधिशासी अभियंता
राजघाट निर्माण खंड
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