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मानव जीवन में भक्ति ही श्रेष्ठ है: आचार्य राजेंद्र प्रसाद शास्त्री

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मानव जीवन में भक्ति ही श्रेष्ठ: आचार्य राजेंद्र
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ललितपुर। बुढ़वार रोड पर स्थित सिद्ध बाबा मंदिर पर चल रही श्रीमद्भागवत कथा के दूसरे दिन कथा वाचक आचार्य राजेंद्र प्रसाद शास्त्री ने भक्ति की कथा सुनाई। उन्होंने भक्ति से ही जीवन का कल्याण होना बताया। साथ ही मानव जीवन में भक्ति को ही सर्वश्रेष्ठ बताया। रविवार को कथा व्यास ने कहा कि मनुष्य जीवन में ईश्वर की भक्ति सर्वोपरि है। कृपा से ही भक्ति प्राप्त की जाती है। भक्ति में इतनी शक्ति है कि निरंकार सर्व व्यापक ब्रह्म भी साकार होकर भक्त को दर्शन देता है। उन्होंने कहा कि मीरा बाई, ध्रुव व भक्त प्रहलाद ने भक्ति के द्वारा ही भगवान को प्राप्त कर लिया था। भक्ति तीन प्रकार से होती है, सत्य, कर्म और सेवा। दूसरो की सेवा करना ही भक्ति है। भक्ति कोई भी कर सकता है। भक्ति का घर परिवार छोड़ने व महात्मा बनने की जरुरत नहीं है। मानव जीवन में संसार से त्याग कर कुछ समय निकाल कर भगवान की भक्ति अवश्य करना चाहिए। संकट में ही यही काम आते हैं। कथा के मुख्य यजमान रामेश्वर प्रसाद नायक व अन्य श्रद्धालुगण मौजूद रहे।
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