वैदिक संस्कृति को जीवंत किए है आर्य समाज
महरौनी। महर्षि दयानंद सरस्वती योग संस्थान आर्य समाज महरौनी द्वारा आयोजित वैदिक सत्संग, यज्ञ, भजन और प्रवचन का समापन हो गया। वक्ताओं ने कहा कि महर्षि दयानंद सरस्वती ने आर्य समाज की स्थापना करके समाज से जात-पात, ऊच-नीच, धार्मिक पाखंड समाप्त किया।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग के सदस्य रामकिशोर साहू रहे। उन्होंने कहा कि महर्षि दयानंद सरस्वती ने 1875 में आर्य समाज की स्थापना की थी। उन्होंने मानव मात्र के कल्याण का मार्ग प्रशस्त किया, जो आज भी जारी है। आर्य समाज सत्य, सनातन वैदिक धर्म प्रचार-प्रसार की अग्रणी संस्था है और वेद प्रचार, आर्य समाज के सहयोग के लिए तन, मन, धन से सहयोगी बनूंगा। नगर पंचायत तालबेहट अध्यक्ष मुक्ता सोनी ने कहा कि धर्म संस्कृति की रक्षा करने का कार्य आर्य समाज बखूभी निभा रहा है। महर्षि दयानंद सरस्वती के महिलाओं पर जो उपकार हैं, उन्हें कोई नहीं भुला सकता। आर्य विद्वान भवदेव शास्त्री ने कहा कि परमात्मा का निजी व मुख्य नाम ओम है।
नोएडा से आए क्रांति गुरु महेश योगी ने कहा कि समाज व राष्ट्र निर्माण के लिए सभी को वेदों की ओर लौटना पड़ेगा। उत्तराखंड से आए स्वामी गुरुकुलानंद सरस्वती ने कहा कि संसार का उपकार करना ही आर्य समाज का मुख्य उद्देश्य है। बंश मुनि लखनऊ ने कहा कि आर्य समाज के सिद्धांतों व विचारों पर युवा पीढ़ी को चलने-चलाने की आवश्यकता हैं।
इस मौके पर ग्राम प्रधान पवा ज्योति मिश्रा, जिला पंचायत सदस्य बंशीधर श्रीवास, भाजपा मंडल अध्यक्ष आशुतोष सिंह सेंगर, गजेंद्र सिंह बुंदेला, प्रभारी निरीक्षक महेंद्र प्रताप सिंह, आर्य प्रधान मुनि पुरुषोत्तम वानप्रस्थ, लखनलाल आर्य, हरप्रसाद प्रजापति, रविंद्र सिंह सेंगर, विवेकानंद प्रजापति, राजेंद्र प्रजापति, राजकुमार सेन, रामसेवक निरजंन, दूधलाल यादव, परमानंद सोनी, फूल सिंह राजपूत, मनोज सेन, राजेंद्र सिंह रज्जू, जयदेवी शुक्ला, सुमनलता सेन का सहयोग रहा।