11 हजार किसानों को नहीं मिला फसल बीमा
ललितपुर। गलती किसी की हो, पर खामियाजा किसान भुगत रहे हैं। एक-दो किसान नहीं, बल्कि 11 हजार से अधिक कृषकों का खरीफ सीजन- 2018 का बैंक से बीमा प्रीमियम कटने के बाद भी अब तक उन्हें फसल बीमा का लाभ नहीं मिला है। यह गड़बड़ी पोर्टल पर किसानों का नाम दर्ज नहीं होने से हुई है। अफसर बचने के लिए एक- दूसरे पर बला टाल रहे हैं।
फसलें खराब होने पर अन्नदाताओं को आर्थिक तंगी से बचाने के लिए प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना चलाई जा रही है। योजनांतर्गत खरीफ सीजन- 2018 में एक लाख छियासठ हजार सात सौ अट्ठावन केसीसी धारक व दो सौ अट्ठावन गैर ऋणी किसानों ने ग्यारह करोड़ तेरह लाख इक्यावन हजार रुपये का बीमा प्रीमियम कटवाया था। इसमें 75663 किसानों को 61.60 करोड़ रुपये की क्षतिपूर्ति प्राप्त हुई। जिस समय किसानों की एंट्री पोर्टल पर कराई जा रही थी, उसी दौरान पोर्टल बंद हो गया। इस कारण एक लाख सड़सठ हजार सोलह में से एक लाख पचपन हजार नौ सौ पचहत्तर किसानों की ही पोर्टल पर एंट्री हो सकी। इस तरह ग्यारह हजार इकतालीस किसानों की एंट्री ही नहीं हो सकी।
इसकी वजह कई किसानों के आधार कार्ड उपलब्ध नहीं होने तो कई किसानों के गलत पते दर्ज होने, कुछ में ग्राम पंचायतों के नाम गलत हो गए। इस वजह से ऐसे किसानों की एंट्री नहीं हो सकी। इससे 11 हजार किसानों को फसल बीमा योजना का लाभ नहीं मिल पाया है।
उधर, रवी सीजन- 2019 के लिए फसल बीमा का प्रीमियम भी काट लिया गया है। इसमें एक लाख बावन हजार आठ सौ चालीस केसीसी धारक व अड़सठ गैर ऋणी किसान शामिल हैं। इस प्रकार एक लाख बावन हजार नौ सौ आठ किसानों की फसल का बीमा किया गया है। इन किसानों का ग्यारह करोड़ पैंतालीस लाख चालीस हजार रुपये प्रीमियम काटा गया है।
अब पोर्टल पर छूटे किसानों की एंट्री कराई जाएगी। इसे खुलवाने के लिए पत्राचार किया जा रहा है। यदि पोर्टल नहीं खुलता है तो बीमा कंपनी से सत्यापन का काम कराकर किसानों को लाभान्वित किया जाएगा।
एसके श्रीवास्तव
बैंक मैनेजर
पुन: खरीफ पोर्टल खुलवाने के लिए पत्राचार किया जा रहा है। 19 मार्च को डीएम के माध्यम से प्रमुख सचिव कृषि को पत्र लिखा गया है। उन्होंने शीघ्र ही पोर्टल खुलने की उम्मीद जताई।
संतोष कुमार सविता
उप कृषि निदेशक, कृषि प्रसार
किसानों का प्रीमियम काटा गया है तो उसकी क्षतिपूर्ति दिलाना कृषि विभाग की जिम्मेदारी है। विभाग अपनी जिम्मेदारी से बच नहीं सकता। यदि किसानों को क्षतिपूर्ति नहीं मिलती है तो इस मुद्दे को लोकसभा चुनाव में उठाया जाएगा। इसका असर भी होगा।
- राजपाल सिंह, नगर अध्यक्ष
भारतीय किसान यूनियन