दो अक्टूबर तक प्रदेश को ओडीएफ करना संभव नहीं
ग्राम प्रधानों ने प्रधानमंत्री को ज्ञापन भेजकर बताई समस्याएं
अमर उजाला ब्यूरो
ललितपुर। राष्ट्रीय पंचायती राज ग्राम प्रधान संगठन के तत्वावधान में विभिन्न ग्रामों के प्रधानों ने प्रधानमंत्री को संबोधित डीएम को एक ज्ञापन देकर बताया कि प्रदेश में दो अक्टूबर तक प्रदेश को ओडीएफ करना असंभव बताया है और ओडीएफ के नाम पर ग्राम प्रधानों के शोषण को रोकने की मांग की है।
ज्ञापन में बताया गया कि भारत सरकार द्वारा पूरे देश को जहां दो अक्टूबर 2019 तक ओडीएफ करने का निर्णय लिया है। वहीं उत्तर प्रदेश सरकार के द्वारा प्रदेश के ग्राम प्रधानों पर तरह-तरह से दबाब बनाकर परेशान किया जा रहा है। जबकि वास्तविकता यह है कि दो अक्टूबर 2018 तक प्रदेश को ओडीएफ करना असंभव है। इसका समय सीमा दो अक्टूबर 2019 तक बढ़ाया जाए। दूसरी मांग के रुप में बताया कि पूरे देश में जहां 12 हजार रुपए में कोई संस्था शौचालय बनाने के लिए तैयार नहीं है। वहीं ग्राम पंचायतों के जिम्मे शासन ने जो यह जिम्मेवारी दी है उसका ग्राम प्रधान पूरा करने में लगे हैं, फिर भी कई जनपदों में जिला प्रशासन द्वारा ग्राम प्रधानों की खुलेआम बेइज्जती की जा रही है और एफआईआर कराई जा रही है। साथ ही उन्हें जेल भेजने की धमकी भी दी जा रही है। जबकि ग्राम प्रधान कोई वेतनभोगी नहीं हैं। तीसरी मांग के रुप में बताया कि 26 सितंबर 2016 को लखनऊ में आयोजित विराट धरना प्रदर्शन के बाद पिछली सरकार द्वारा प्रधानों के विरुद्ध दर्ज मुकदमों को वापस लिया जाए, जो राजनीति से प्रेरित दर्ज हुए थे। प्रदेश के मुख्यमंत्री व शासन में संगठन के माध्यम से प्रधानों के हित में दिए गए लंबित ज्ञापन पर शीघ्र निर्णय लिया जाए। चौदहवां वित्त के सुचारु रुप से संचालित करने के लिए न्याय पंचायत स्तर पर कर्मचारियों की व्यवस्था की जाए। संगठन ने चेतावनी दी है कि उक्त मांगों पर यदि तत्काल निर्णय नहीं लिया जाता है कि लखनऊ एवं प्रदेश भर में हर जिले में भारी धरना प्रदर्शन किया जाएगा। ज्ञापन पर जिला महासचिव अनुपम चौबे, ग्राम प्रधान घटवार शशिकांत दीक्षित, प्रधान करमरा जितेंद्र सिंह, पटौरा खुर्द से प्रधान अनीता, नाराहट से डा.दिलीप सोनी, कुआंगांव से प्रधान कृष्णप्रताप, नुनावली से प्रधान सुरेंद्र सिंह, लक्ष्मीदेवी, जमना, बृजेंद्र कु़मारी आदि के हस्ताक्षर हैं।