ललितपुर। जनपद में आयुर्वेदिक अस्पतालों को जमीन मुहैया कराने के लिए जिला प्रशासन ने कवायद शुरू कर दी है।। अब तक यहां पर जमीन के अभाव में किराए व निशुल्क भवनों में 15 अस्पताल संचालित हो रहे हैं। इन अस्पतालों के लिए जमीन चिह्नित कर विभाग को सुपुर्द करने के लिए जिलाधिकारी ने एसडीएम को पत्र भेजकर कार्रवाई का निर्देश दिया है। सब कुछ ठीक रहा तो जल्द ही अस्पतालों को जमीन मिल जाएगी।
जिले में लोगों आयुुर्वेदिक व यूनानी पद्घति से उपचार की सुविधा के लिए 34 अस्पताल संचालित हो रहे हैं। इनमें आयुर्वेदिक के 32 व दो यूनानी पद्घति के अस्पताल हैं। इनमें लंबे अरसे बाद भी 15 अस्पतालों को भवन मुहैया नहीं हो सके है। भवन तो दूर जमीनें तक चिह्नित नहीं हुईं हैं। ऐसे में अस्पताल किराए के या अन्य निशुल्क भवनों में संचालित हो रहे हैं। ऐसे में अस्पताल मरीजों को समुचित मात्रा में सुविधाएं नहीं दे पा रहे है। इन अस्पतालों को जमीन मुहैया कराने के जिला प्रशासन ने कवायद शुरू की है। जिलाधिकारी आलोक सिंह ने संबंधित क्षेत्रों के एसडीएम को पत्र लिखकर अस्पतालों को जमीन चिह्नित करने के निर्देश दिए हैं। अब एसडीएम ने अपने क्षेत्रों में जमीन खोजने की शुरुआत कर दी है। इसके चलते अस्पतालों को जल्द ही जमीन मिलने की आस जागी है।
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यह है जमीन का मानक
आयुर्वेदिक अस्पतालों में जमीन के लिए अलग-अलग मानक तय है। इनमें 15 बेड के अस्पतालों के लिए 5,625 वर्ग मीटर व चार बेड के अस्पतालों को 500 वर्गमीटर जमीन है। इनमें महरौनी के इकलौते अस्पताल को 5,625 वर्ग मीटर व चार बेड के 14 अस्पतालों को 500-500 वर्गमीटर जमीन की जरूरत है।
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इन अस्पतालों को चिह्नित होगी जमीन
महरौनी, पिपरियावंशा, नेहरूनगर, खड़ेरा, नाराहट, मड़ावरा, देवगढ़, पवा, उदयपुरा, मदनपुर, धौरीसागर, गुढ़ा बुजुर्ग, बालाबेहट, कड़ेसरा आदि अस्पतालों को क्षेत्र में जमीन चिह्नित करने की प्रक्रिया शुरू हो गई है।
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अमर उजाला ने उठाया था मुद्दा
अमर उजाला ने आयुर्वेद अस्पतालों के भवनों की समस्या को तीन जनवरी को कहीं पुराना थाना, कहीं मंदिर परिसर में चल रहा दवाखाना, शीर्षक से खबर को पेज दो पर प्रकाशित किया था। इस खबर को डीएम ने गंभीरता से लेते हुए अगली कार्रवाई की है।
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आयुर्वेद अस्पतालों को जमीन चिह्नित करने के लिए जिला प्रशासन ने अपने अपने क्षेत्र के उपजिलाधिकारियों को पत्राचार किया है। अब अस्पतालों को जल्द ही जमीन मिलने की उम्मीद है। - धीरेंद्र कुमार बिजौरिया, क्षेत्रीय आयुर्वेद यूनानी अधिकारी