सालों से डटे अफसरों पर तबादले की तलवार
ललितपुर। शासन की स्थानांतरण नीति के लपेटे में वन विभाग के बड़े अफसर व कई कर्मचारी आ रहे हैं। जिले में डीएफओ सहित कई कर्मचारियों को तीन साल से ज्यादा का समय हो गया है, जिससे उनका स्थानांतरण होना लगभग तय माना जा रहा है।
शासन ने वर्षों से एक ही जगह जमे अधिकारी, कर्मचारियों को स्थानांतरित करने के लिए तबादला नीति बनाई है। इसमें जिले में तीन साल एवं मंडल में छह साल की अवधि पूरी करने वाले अधिकारी, कर्मचारियों को हटाया जाएगा। डीएफओ वीके जैन ने इसके अनुपालन में अधिकारी, कर्मचारियों का निर्धारित प्रारूप पर ब्योरा तैयार कराना प्रारंभ कर दिया है। सूचना में अधिकारी, कर्मचारी का मूल निवास और तैनाती कब से और कहां हैं। जिले में कई वन कर्मियों को तीन साल से अधिक का समय हो गया है। डीएफओ वीके जैन ने सत्रह जनवरी 2013 में जिले का पद भार संभाला था। वहीं, वन रेंजरों में महरौनी के सुनील भारद्वाज, जखौरा में मदन मोहन, गौना में जयनारायण, रायसाहब यादव, नरेश तिवारी, डिप्टी रेंजरों में श्रीराम निरंजन, प्रागीलाल, महेंद्र जैन, वन दरोगा में कमलापत त्रिपाठी, अजय वर्मा, मुबीनउद्दीन, वसीम, रामसुख, गजराज सिंह, राकेश दयाल शर्मा, रामनाथ, अनूप श्रीवास्तव, राजेंद्र शुक्ला को जनपद में तैनात हुए कई साल हो गए हैं। कई तो ऐसे वन दरोगा हैं जिन्हें दस साल से ज्यादा का समय हो गया है, जिससे वन विभाग के कामों को गति नहीं मिल पा रही है जो चर्चा का विषय बना हुआ है। लेकिन, शासन की स्थानांतरण नीति से लोगों को वन विभाग के कामकाज में सुधार आने की उम्मीद बंध गई है। उधर, डीएफओ वीके जैन का कहना है कि अधिकारी, कर्मचारियों के तैनाती की सूचना वन संरक्षक बुंदेलखंड वृत्त सहित कई अधिकारियों को भेजी जा रही है। इसी माह चिह्नित अधिकारी, कर्मचारियों के स्थानांतरण होने की संभावना है।
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दो वन दरोगाओं के तबादले अधर में
विधानसभा चुनाव के पहले ललितपुर एवं माताटीला वन रेंज से दो वन दरोगाओं के स्थानांतरण हुए थे। विडंबना यह है कि दोनों वन दरोगाओं को स्थानांतरित स्थल पर नहीं पहुंचाया जा सका है। इससे पहले भी वन दरोगाओं को एक स्थल से दूसरे स्थल पर हटाने के प्रयास हुए, लेकिन अधिकारी इसमें कामयाब नहीं हो सके।