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कल धनतेरस से शुरु होगा पांच दिवसीय दीपावली पर्व

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कल धनतेरस से शुरु होगा पांच दिवसीय दीपावली पर्व
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धनतेरस पर शुभ मुहूर्त में कर सकेंगे वाहन, आभूषणों की खरीदारी
मंगल को हनुमान जयंती तो बुधवार को मनाई भव्य दीपावली पर्व
अमर उजाला ब्यूरो
ललितपुर। दीपावली का पांच दिवसीय सोमवार के दिन धनतेरस से शुरू होगा। धनतेरस पर लोग तीन चरणों में शुभ मुहूर्त में वाहन, आभूषण व अन्य सामग्री की खरीदारी कर सकेंगे। मंगलवार को नरक चतुर्दशी व हनुमान जयंती और बुधवार को भव्य दीपों का पर्व महालक्ष्मी दीपावली मनाई जाएगी। जिसके बाद बृहस्पतिवार को गोवर्धन पूजा, अन्नकूट महोत्सव और पांचवें दिन भातृ द्वितीया का पर्व मनाया जाएगा, जो बुंदेलखंड में विशेष महत्व रखता है।
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डा. ओमप्रकाश शास्त्री ने बताया कि पांच दिवसीय दीपावली पर्व का शुभारंभ कल सोमवार को धनतेरस के दिन से शुरू हो रहा है। धनवंतरि को हिंदू धर्म में देवताओं का वैद्य माना जाता है। शास्त्रों के अनुसार यह भगवान विष्णु के अवतार समझे जाते हैं, इनका पृथ्वी लोक में अवतरण समुद्र मंथन के समय हुआ था। कार्तिक कृष्ण त्रयोदशी को धन्वंतरि जयंती मनाई जाती है। धन्वंतरि जयंती से शुरु हुआ दीपावली पर्व पांच दिन चलता है। इसके दूसरे दिन नरक चतुर्दशी, तीसरे दिन अमावस्या को दीपावली के पर्व पर भगवती महालक्ष्मी जी के पूजन का दिन होता है। धन्वंतरि को आयुर्वेद चिकित्सा का जनक माना जाता है। दीपावली के एक दिन पूर्व नरक चतुर्दशी होती है। सायंकाल सूर्यास्त के पश्चात भगवान कुबेर की पूजा कर घ्झार के दरवाजे पर दीपदान करना चाहिए। वहीं, वस्तुओं की खरीदारी के लिए परंपरानुसार लोक परंपरा में धनतेरस के दिन खरीदारी करने का शुभ मुहूर्त माना जाता है। इस वर्ष हस्त नक्षत्र सोमवार को धनतेरस है। सुबह आठ से दोपहर 12 बजे तक दोपहर में दो बजे से पांच बजे तक और शाम को सात बजे से रात्रि आठ बजे तक के शुभ मुहूर्त में इक्षित वस्तुओं, वाहनों व आभूषणों की खरीदारी की जा सकेगी। इस दिन सायंकाल में देहरी द्वार पर द्वार देवताओं के सम्मान में दो दीपक का पूजन कर स्थापित किए जाएंगे और इसी दिन से पांच दिवसीय दीपावली महोत्सव का शुभारंभ होगा। चतुर्दशी मंगलवार को हनुमान जयंती महोत्सव पर्व है। त्रेता युग में कार्तिक कृष्ण पक्ष चतुर्दशी को भगवान श्रीहनुमानजी का अवतार हुआ था, इसी दिन प्रात:काल में हनुमानजी का पूजन और हवन का आयोजन श्रेष्ठ माना जाता है। इसी दिन सायंकाल दरिद्र नि:सारण्सा की क्रिया करतके हुए दीपदान व भगवती महाकाली की पूजा का भी प्रावधान है और चतुर्दशी को सायंकाल दीपदान किया जाता है। इसके बाद तीसरे दिन बुधवार को अमावस्या के दिन सात नवंबर को दीपावली महोत्सव होगा।
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