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बारिश से खेत खलिहान जल मग्र, उड़द-मूंग को सबसे ज्यादा नुकसान

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बारिश से खेत खलिहान जलमग्न, उड़द-मूंग को सबसे ज्यादा नुकसान
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मूंग को साठ फीसदी नुकसान बता रहे किसान
जिले में करीब ढाई लाख एकड़ जमीन में बोयी गई है खरीफ की फसल
अमर उजाला ब्यूरो
ललितपुर। पिछले तीन-चार दिनों में हो रही लगातार बारिश से जहां जन जीवन अस्त व्यस्त हो गया है, वहीं किसानों को उड़द और मूंग की फसल में भी 50 फीसदी तक नुकसान आंका जा रहा है। इसमें सबसे ज्यादा नुकसान मूंग की फसल को बताया जा रहा है। यदि कुछ दिन और इसी तरह बारिश और होती है तो ग्रामीण क्षेत्रों में पानी भराव वाले क्षेत्रों में सबसे ज्यादा नुकसान होने की संभावना है।
जनपद में कुछ पिछले चार दिनों में भारी बारिश हुई है। जिससे नदी नाले उफान पर आ गए हैं और तेज बारिश के कारण कई क्षेत्रों में खेतों में भी पानी भर गया, जिसके चलते खेतों में खड़ी फसल चौपट होने लगी है। नाराहट व महरौनी, पाली तालबेहट क्षेत्र में उड़द व मूंग को भारी नुकसान पहुंचा है। लगातार कई दिनों से पानी गिरने के कारण मूंग की फली तो काली पड़ने के बाद अब गल भी चुकी है। जबकि तेज बारिश के कारण कई जगह उड़द व मूंग की फसलें जमीन पर ही बिछ गई हैं। जिससे किसानों को चिंता सताने लगी है। किसी क्षेत्र में पचास तो किसी में साठ और कई क्षेत्रों में अस्सी फीसदी तक नुकसान बताया जा रहा है। अब ऐसे में यदि कुछ दिन और पानी गिरता है तो जो फसलें अभी बची हैं वह अब पूरी तरह से नष्ट हो सकती हैं। इस बार जनपद में करीब ढाई लाख एकड़ जमीन में शुरुआती मौसम के अनुकूल देखते हुए किसानों से खरीफ की फसल बोई थी, लेकिन अब अगस्त माह के अंत और सितंबर के शुरुआती दिनों में भादों के महीने में होने वाली भारी बारिश से किसानों को अब बर्बादी भी दिखने लगी है। इस संबंध में जब किसानों से बात की गई तो उन्होंने अपना दर्द बयां करते हुए फसलों की स्थिति के बारे में बताया।
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कुरा गईं मूंग की फलियां
लगातार कई दिनों से हो रही बारिश के कारण उर्द व मूंग की फलियां कुरा गई हैं। कुछ दिनों पहले तक कुछ प्रतिशत फसल बचने की आशा थी, लेकिन अब बची हुई फसल भी सड़कर गिर रही है।
-झल्लू अहरवार, किसान ग्राम चांदोरा।
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खेतों से बीज की कीमत भी निकलना मुश्किल
इस बार की बारिश से उर्द और मूंग की फूल व फलिया सड़कर गिर गए हैं। ऐसे में खेतों से बीज निकलना भी मुश्किल दिख रहा है।
-मलखान सिंह, किसान, ग्राम बरेजा।
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ढाई लाख हेक्टेयर से अधिक में खरीफ की बुबाई
इस बार जनपद में कृषि विभाग को दो लाख 76 हजार 599 हेक्टेयर जमीन में खरीफ की फसल की बुबाई का लक्ष्य दिया गया था। जिसके सापेक्ष लगभग शत-प्रतिशत बुबाई हो चुकी है। इन आंकड़ों के अनुसार जनपद में धान के लिए 1500 हेक्टेयर, ज्वार का 28 हजार 800 हेक्टेयर, उर्द का दो लाख एक हजार 234 हेक्टेयर, मूंग के लिए आठ हजार हेक्टेयर बुबाई, अरहर के लिए एक हजार हेक्टेयर, सोयाबीन के लिए 15 हजार 365 हेक्टेयर, ाितल के लिए एक हजार हेक्टेयर, मूंगफली की फसल के लिए एक हजार हेक्टेयर जमीन में बुबाई का लक्ष्य दिया गया था, जिसके सापेक्ष पंद्रह दिन पूर्व तक कुल दो लाख 62 हजार 789 हेक्टेयर जमीन में बुबाई कर दी गई थी। लेकिन अब भारी बारिश से जनपद में किसानों को पचास से सत्तर फीसदी का नुकसान अकेली मूंग व उड़द की फसल को होना बताया जा रहा है।
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सर्वे कर किसानों को बता रहे उपाय
पानी भरने से फसलों को सबसे ज्यादा नुकसान हो रहा है। इसके लिए एक दिन पहले ही ज्वाइंट डायरेक्टर के साथ ग्रामीण क्षेत्रों का निरीक्षण किया था। किसानों को पानी भरने पर निकासी करने की सलाह दी है, ताकि पानी भरने से फसलें सड़ न सकें।
संतोष कुमार सविता, उपकृषि निदेशक।
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