यह कैसा स्वच्छता अभियान, कलेक्ट्रेट परिसर में ही गंदगी
ललितपुर। एक ओर जहां स्वच्छ भारत मिशन के अंतर्गत आम जन को स्वच्छता के प्रति जागरूक किया जा रहा है, वहीं दूसरी ओर सरकारी कार्यालयों में जिले को साफ सुथरा बनाने का जिम्मा उठाने वाले अधिकारी ही अपने आसपास सफाई नहीं रख पा रहे हैं। इसकी बानगी कलेक्ट्रेट कार्यालय है, जहां दीवारें पान की पीकों से रंग दी गई हैं।
कलेक्ट्रेट परिसर में ही अधिकांश विभागों को कार्यालय हैं, जहां पर लगभग सभी महकमों के वरिष्ठ अधिकारी बैठते हैं। पूरे जनपद के अधिकतर लोग अपनी समस्याओं को लेकर यहां आते हैं, यहां लोगों की अधिकांश समस्याओं का निदान किया जाता है। इसलिए यहां अधिक ही भीड़ भाड़ रहती है। ऐसे में लोगों ने परिसर की दीवारें पान की पीकों से रंग र्गइं हैं।
इस परिसर में सफाई न होने से नालियां गंदगी से बजबजा रही हैं। कचरे को निकालकर नाली के पास रख दिया जाता है। इससे लोगों को पेड़ के नीचे गाड़ी खड़ी करने व स्वयं को खड़ा होने में परेशानी होती है। खड़े होने पर नालियों से बदबू आती है, इससे लोग पेड़ के नीचे खड़े नहीं हो पाते हैं। कचरे का उठान न होने से गंदगी पेड़ के पास पड़ी रहती है। इससे गंदगी ज्यादा फैली है, साथ ही दूसरी मंजिल पर एक अधिकारी के दरवाजे पर पान की पीक है। दीवारों पर पान की पीकों की सफाई नहीं हो रही है। पंप हाउस के पास भी गंदगी है। इस ओर अधिकारियों के ध्यान न देने से लगता है कि अधिकारियों को साफ-सफाई से ज्यादा मतलब नहीं है, वह केवल सरकार के चलाए जा रहे अभियान तक ही सीमित रहते हैं। सरकार ने स्वच्छ भारत के लिए स्वच्छ भारत मिशन के अंतर्गत सफाई का अभियान लगभग सभी क्षेत्रों में चलाया है। शासन स्वच्छ भारत मिशन के अंतर्गत प्रचार एवं सफाई उपकरणों को खरीदने पर खर्च किए जा रहे हैं। लेकिन, इसका असर कुछ कम नजर आ रहा है, इसका ताजा उदाहरण कलेक्ट्रेट परिसर में देखने को मिला है। विभागों के अधिकारी सफाई के लिए सीधे जिम्मेदार हैं। जब जिलाधिकारी कार्यालय में स्वच्छता अभियान का यह हाल है तो जिले के दूसरे क्षेत्रों में तो भगवान ही मालिक है।