मिलावटी शराब में अभियुक्त को आजीवन कारावास
ललितपुर। अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश तृतीय जगदीश कुमार की अदालत ने मिलावटी शराब बेचने के मामले में मऊमाफी डेरा कबूतरा निवासी अभियुक्त प्रकाश को आजीवन कारावास और सात हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई है। एक अभियुक्त के किशोर होने पर उसका मामला किशोर न्यायालय में चल रहा है। जबकि बाबू कबूतरा को मामले में साक्ष्य के अभाव में बरी कर दिया गया।
सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता बादाम सिंह यादव ने जानकारी देते हुए बताया कि थाना कोतवाली में तैनात तत्कालीन एसआई छोटेलाल गुप्ता ने कोतवाली को दी तहरीर में बताया था कि वह मय हमराह पुलिस बल के साथ कोतवाली क्षेत्र में गश्त कर रहे थे। तभी मुखबिर ने सूचना दी थी कि मऊमाफी कबूतरा डेरा में प्रकाश कबूतरा कच्ची शराब बनाकर बेचने का काम करता है। तभी आबकारी निरीक्षक विकास कुमार सिंह भी अपनी टीम के वहां पहुंच गए। इसके बाद सभी ने मऊमाफी डेरा कबूतरा हाइवे स्थित मुखिया के घर के पीछे छापा मारा। मौके पर कुछ लोग भट्टी जलाकर पतीली से शराब लेकर ड्रम में डाल रहे थे। दो लोग ड्रम से महुआ लहन निकाल रहे थे। पुलिस को देखकर वे हड़बड़ा गए और भागने लगे। पीछा करने पर एक व्यक्ति को घेराबंदी कर पकड़ लिया। पूछने पर उसने अपना नाम प्रकाश पुत्र लक्षमन कबूतरा, निवासी मऊमाफी बताया। मौके से दो पतीला मय ढक्कन के व पाइप उपकरण जिनसे शराब बनकर निकल रही थी, बरामद किया। वहीं प्लास्टिक के दो ड्रमों से 270 लीटर कच्ची शराब बरामद की गई। दो ड्रमों से महुआ लहन भी बरामद किया गया था। लहन को मौके पर ही नष्ट किया गया। प्रकाश ने भागे हुए साथी का नाम बाबू बताया था। जबकि उनमें एक आरोपी किशोर भी था। उसने यह भी बताया था कि इसी भट्टी पर कच्ची शराब में यूरिया मिलाकर बेचते हैं। इस मामले में पुलिस ने उक्त लोगों के खिलाफ धारा 60 आबकारी अधिनियम व मिलावटी शराब की धाराओं 272 व 273 के तहत मुकदमा दर्ज कर न्यायालय में आरोप पत्र प्रस्तुत किए थे। तब से यह मामला न्यायालय में विचाराधीन चल रहा था। शुक्रवार को न्यायालय ने अभियोजन पक्ष की ओर से पेश की गई दलीलों, साक्ष्यों व गवाहों के आधार पर सुनवाई करते हुए अभियुक्त प्रकाश को मिलावटी शराब बेचने की धारा 272 में दोषी पाते हुए आजीवन कारावास और पांच हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई। जबकि आबकारी अधिनियम के तहत धारा 60 में दो वर्ष और दो हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई। उक्त मामले में बाबू कबूूतरा को साक्ष्य के अभाव में बरी कर दिया गया, जबकि एक अन्य अभियुक्त के किशोर होने पर उसका मामला किशोर न्यायालय में चल रहा है।