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एमनेस्टी में किस्तें भरी, फिर भी बिल आ रहे फुल

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जमा करने के बाद भी उतना ही आ रहा बिल
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ललितपुर। नलकूप कनेक्शन और वाणिज्यिक ग्रामीण उपभोक्ताओं द्वारा एमनेस्टी योजना (एकमुश्त समाधान योजना) के तहत बिल जमा करने के बाद भी उनके बिलों में पहले की तरह ही धनराशि जुड़कर आ रहा है। जिसके चलते शिविर में बिल जमा करने वाले उपभोक्ताओं को एमनेस्टी योजना का लाभ नहीं मिलने की चिंता भी सताने लगी है।
जनपद में करीब साढ़े चार हजार से अधिक नलकूप और करीब 3500 से अधिक वाणिज्यिक विद्युत उपभोक्ताओं पर बिजली बिल की करोड़ों रुपये की बकाएदारी चल रहीं है। जिसके चलते पिछले दो महीने पहले शासन द्वारा उपभोक्ताओं को राहत देने के लिए विद्युत बिलों की राशि में शत प्रतिशत ब्याज माफी योजना शुरू की गई थी। जो जून के अंत तक जारी रही। इस योजना में नलकूप और वाणिज्यिक उपभोक्ताओं द्वारा भी किस्तों की ब्याज माफी योजना का लाभ लिया। लेकिन लोड अधिक होने के कारण दस फीसदी उपभोक्ताओं के बिलों की ऑनलाइन किस्तों से भुगतान जमा कराया गया, लेकिन अधिकांश बिलों की किस्तों की धनराशि ऑफ लाइन रसीद काटकर मैनुअल जमा कराया गया। विभाग द्वारा मैनुअल रसीद काटकर किस्तों का भुगतान तो करा लिया, लेकिन अब तक ऑनलाइन फीडिंग का कार्य नहीं होने के कारण नलकूप संयोजन के करीब 3500 उपभोक्ताओं की फीडिंग का कार्य नहीं हो सका है। जबकि वाणिज्यिक संयोजनों के करीब 50 उपभोक्ताओं की किस्तों का भुगतान भी ऑनलाइन अटका हुआ है। जिसके चलते ऐसे उपभोक्ताओं के बिलों किस्तों भरने के बाद भी पूरे बिल आ रहे हैं। हालांकि विभाग द्वारा शीघ्र ही फीडिंग का कार्य करा लेने का आश्वासन दिया जाता है, लेकिन उनकी समस्या का समाधान नहीं हुआ है। ऐसे में उपभोक्ताओं की किस्तें भरने के बाद भी ब्याज माफी का लाभ नहीं मिलने की चिंता भी सताने लगी है।
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फिक्स चार्ज में हजारों के वन रहे बिजली के बिल
ललितपुर। बिजली विभाग द्वारा जब से ग्रामीण ऑनलाइन व्यवस्था शुरू की गई है, तब से नलकूप कनेक्षन के फिक्स चार्ज वाले बिलों में हजारों रुपये अधिक जुड़कर आ रहे है। जबकि क्षमता के अनुसार यह बिल काफी धनराशि के बनने चाहिए। पांच एचपी यानि पांच हॉर्स पावर क्षमता का बिल 903 रुपये, साढ़े सात हॉर्स पावर क्षमता का बिल 1450 रुपये, ओर दस हॉर्स पावर क्षमता का बिल 1800 रुपये प्रति महीने के हिसाब से बनना चाहिए। लेकिन इस प्रकार के बिल फरवरी के बाद मार्च से 4200 रुपये से लेकर 6500 रुपये तक के बनकर आ रहे हैं। बिजली विभाग की इस प्रणाली से उपभोक्ताओं की मुश्किलें बढ़ गई हैं।
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