हल्की बारिश से खिले किसानों के चेहरे
ललितपुर। मौसम के बदले मिजाज व हल्की बारिश से किसानों के चेहरे खिल गए हैं। बारिश से गेहूं की फसल को सबसे ज्यादा फायदा हुआ है। वहीं, मौसम में हो रहे परिवर्तन से फसलों में कीट एवं रोगों के प्रकोप होने की संभावना बन गई है। इसको ध्यान में रखकर कृषि विभाग ने किसानों को जरूरी सलाह दी है।
पहाड़ी क्षेत्रों में बर्फवारी होने से मैदानी क्षेत्रों में शीतलहर चलना प्रारंभ हो गई है। शुक्रवार को दोपहर करीब तीन बजे हल्की बारिश शुरू हो गई। हालांकि, कुछ मिनटों के बाद बारिश थम गई। इससे मौसम और ठंडा हो गया। यह बारिश रबी सीजन की फसल के लिए फायदेमंद बताई जा रही है। इसमें गेहूं व जवा की फसल को फायदा पहुंचा है। वहीं, दलहनी फसल के लिए लोगों की अलग-अलग राय है। कुछ लोगों का मानना है कि दलहनी फसल फूल पर है, जिसे नुकसान पहुंच सकता है तो कुछ लोग बारिश से किसी प्रकार का नुकसान नहीं होने की बात कह रहे हैं। उधर, कृषि विभाग ने मौसम में आए परिवर्तन को देखते हुए किसानों को ऐतिहात बरतने के लिए कहा है। जिला कृषि रक्षा अधिकारी गौरव यादव का कहना है कि पाले से फसलों की सुरक्षा के लिए फसल में हल्की सिंचाई करें, खेत की उत्तर-पश्चिमी दिशा में हवा के विपरीत खेत में भूसा व कंडों का धुआं कर दें, इससे नमी बनी रहेगी और तुषार लगने की संभावना काफी कम रहेगी। जिस मिट्टी में सल्फर व सूक्ष्म पोषक तत्वों की कमी रहती है। वहां तुषार लगने की संभावना अधिक रहती है। ऐसी मिट्टी में तुषार लगने के पूर्व ही सल्फर व सूक्ष्म पोषक तत्वों का छिड़काव करना चाहिए। इससे फसलों के दानों में चमक तो आती ही है। चना, मटर, मसूर में सेमीलूपर (इल्ली), कटुआ कीट, फली भेदक के नियत्रंण के लिए क्यूनालफास 25 प्रतिशत ईसी 15 ली या बीटी 10 ली मात्रा को 500-600 ली पानी में घोलकर छिड़काव करें। राई/सरसों, मसूर, मटर एवं चना में माहू के नियंत्रण के लिए डाईमिथोएट 30 ईसी या इमिडाक्लोप्रिड 17.8 प्रतिशत एसएल की 250 से 300 एमएल मात्रा को 500-600 ली पानी में घोलकर प्रति हेक्टयर की दर से छिड़काव करें। गेहूं फसल में दीमक के नियंत्रण के लिए क्लोरोपाईरीफॉस 20 प्रतिशत की 2 50 लीटर मात्रा को सिंचाई के पानी के साथ प्रति हेक्टेअर की दर से प्रयोग करें। गेहूं में चौड़ी पत्ती वाले खरपतवारों के नियंत्रण हेतु 2,4 डी0 सोडियम साल्ट 80 प्रतिशत की 650 ग्राम/हेक्टयर मात्रा या चौड़ी व संकरी पत्ती वाले खरपतवारों-जैसे बथुआ, हिरनखुरी, गेहूं का मामा, जंगली जई आदि के नियंत्रण के लिए सल्फो सल्फ्यूरॉन 75 प्रतिशत, हेक्टेयर की दर से छिड़काव करने के लिए कहा है।
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राहत बनकर आई बारिश
हल्की बारिश किसानों के लिए राहत बनकर आई है। वर्तमान में किसान डीजल से सिंचाई कर रहे थे। इस बारिश से डीजल की बचत हो गई है।
राजपाल सिंह
नगर अध्यक्ष
भारतीय किसान यूनियन
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गेहूं के लिए फायदेमंद
गेहूं की फसल के लिए बूंदाबांदी फायदेमंद है। वहीं, दलहनी फसल फूल पर है, जिसे नुकसान पहुंच सकता है।
केहर सिंह बुंदेला
प्रांतीय उपाध्यक्ष
भारतीय किसान संघ