ई-पॉश मशीन के सर्वर न आने से राशन वितरण में हो रही दिक्कत
बानपुर। इन दिनों कस्बावासियों को राशन वितरण को लेकर कभी अंगूठा न लगने की वजह से तो कभी सर्वर न आने की वजह से काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा हैं। इन दिनों राशन की दुकानों पर खाद्य सुरक्षा अधिनियम के अंतर्गत ई-पॉश मशीनों के द्वारा राशन वितरण किया जा रहा है, लेकिन मशीनों के ठीक तरह से काम नहीं करने और सर्वर नहीं आने से राशन उपभोक्ताओं व कोटेदारों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
कस्बा बानपुर में भी राशन की दुकानों पर ई-पॉश मशीनों द्वारा राशन वितरित किया जा रहा है, लेकिन दिन में 10 से 15 लोगों को ही गल्ला मिल पा रहा है। इसी मुख्य वजह सर्वर न आने से और मशीन के सही काम नहीं करने के कारण राशन धारक के अंगूठे नहीं लग पा रहे हैं। जिससे उपभोक्ताओं को परेशानी हो रही है। राशन धारक दिनभर दुकानों पर बैठे रहते हैं लेकिन जब उनका अंगूठा नहीं लग पाता है तो वह मायूस होकर अपने घर लौट जाते हैं। लोग सुबह-शाम राशन की दुकान के चक्कर काट रहे हैं। कस्बे की ज्यादातर आबादी कृषक व मजदूर वर्ग की है और इन दिनों खेतों में सिंचाई का समय भी चल रहा है, फिर भी लोग अपनी खेती किसानी के कामकाज छोड़कर राशन की दुकान पर बैठे नजर आ रहे हैं इसके बाद भी उनका काम नहीं बन पा रहा है। बताया गया कि शासन के मानक के अनुसार चार दुकानें आवंटित की गयी हैं, जिनके माध्यम से पूरे कस्बे में खाद्यान्न साम्रगी का सार्वजनिक वितरण प्रणाली के तहत वितरण होता है व इन चारों दुकानों पर लगभग 2,519 पात्र गृहस्थी व 225 अंत्योदय कार्ड धारकों को यूनिट के हिसाब से राशन वितरण किया जाता है। इसमें करीब 8,230 यूनिट पात्र गृहस्थी व 424 अंतयोदय यूनिट पर खाद्यान्न वितरण किया जाता है। इस प्रकार कस्बे में कुल 8,654 यूनिट राशन से लाभांवित हो रहे हैं। ग्रामीणों के अनुुसार इस मशीन से राशन वितरण की सबसे अच्छी बात यह है कि इससे राशन की काला बाजारी पर रोक लगेगी। लेकिन इसका दूसरा पहलू यह भी है कि सरकार को सभी जगह सर्वर व नेटवर्क की व्यवस्था करनी चाहिए थी। फिर इस नियम को लागू करना था। वैसे कस्बे में नेटवर्क की व्यस्था काफी दयनीय है। कस्बा में केवल कुछ एक मोबाइल कंपनी द्वारा फोर-जी सेवा प्रदान की जा रही है, वह व्यवस्था भी ज्यादातर खराब ही रहती है और कई बार यह कंपनी भी अपनी मनमानी से ग्राहकों की जेबों पर खूब डाका डाल रहा है। बिजली चले जाने पर टॉवर ऑपरेटर जनरेटर न चलाकर इंवर्टर चालू कर देते हैं जिससे वीक सिग्नल क्वालिटी आते हैं और जनरेटर चलाने पर सिग्नल क्वालिटी अच्छी मिलती है। इस प्रकार टॉवर ऑपरेटर भी डीजल बचाने के चक्कर में पड़े रहते हैं और जनता की परेशानी से उनका कोई लेना देना नहीं हैं। ग्रामीणों द्वारा प्रशासन से आग्रह भी किया गया है कि उक्त समस्या से जल्द से जल्द निजात दिलायी जाए ।