छात्रों का हीमोग्लोबिन स्तर जांचा
एनीमिया मुक्त अभियान
आयरन पर निबंध प्रतियोगिता रिसिका प्रथम
अमर उजाला ब्यूरो
ललितपुर। राष्ट्रीय किशोर स्वास्थ्य कार्यक्रम के अंतर्गत बुधवार को राजकीय बालिका इंटर कॉलेज में एनीमिया मुक्त किशोर किशोरी अभियान के अंतर्गत प्रतियोगिता और एनीमिया जांच कार्यक्रम मुख्य चिकित्साधिकारी डा. प्रताप सिंह की अध्यक्षता में आयोजित किया गया। इसमें विभिन्न विद्यालयों के बच्चों की हीमोग्लोबिन की जांच की गई और आयरन फोलिक एसिड की गोलियां उपलब्ध कराई गई।
कार्यक्रम की शुरुआत मां सरस्वती वंदना और अतिथियों को पुष्प प्रदान करके की गई। यहां अपर मुख्य चिकित्सा अधिकारी व आरबीएसके के नोडल अधिकारी डा. आरके सोनी ने बताया कि उत्तर प्रदेश में एनीमिया की लगभग सभी आयु वर्ग में सामान्य रूप से पाई जाती है। किशोर अवस्था के दौरान भी 10-19 वर्ष के किशोर किशोरियों में भी एनीमिया की समस्या व्यापक है। एमएफएचएस 4 (2015-16) के अनुसार उत्तर प्रदेश में 15 से 19 वर्ष की किशोरियों में 54 प्रतिशत किशोरियां एनीमिया से ग्रसित हैं, जबकि प्रदेश में 15 से 19 वर्ष के किशोरों में 32 प्रतिशत किशोर एनीमिया की समस्या से पीड़ित हैं। किशोर अवस्था के दौरान एनीमिया की समस्या को कम करने के उद्देश्य से राज्य में 2014 से साप्ताहिक आयरन फोलिक एसिड संपूर्ण कार्यक्रम संचालित किया जा रहा है। इसके अंतर्गत 10 से 19 वर्ष के स्कूल जाने वाले किशोर/किशोरियों को विद्यालय के माध्यम से और स्कूल न जाने वाले किशोरियों को आगंनबाड़ी केंद्रों के माध्यम से आयरन की गोली खिलाई जाती है। वित्तीय वर्ष 2017-18 में किशोर किशोरियों में आयरन का उपभोग का मासिक औसत लगभग 29 प्रतिशत रहा है, लेकिन अभी भी किशोर वर्ग में एनीमिया की समस्या व्यापक है। कार्यक्रम के संचालन के दौरान यह महसूस किया गया कि कई प्रयासों के बावजूद आयरन उपभोग मासिक कवरेज वाले पिछले वर्ष 10 प्रतिशत से कम था, उन सभी 10 प्रतिशत से कम आयरन उपभोग मासिक कवरेज वाले जनपदों में पाया गया कि इंटर कॉलेज/माध्यमिक विघालय में आयरन की गोलियों का उपभोग भी काफी कम है, जबकि इंटर कॉलेज में बड़ी संख्या में छात्र, छात्राएं उपस्थित रहते हैं और इन बढ़ती उम्र के किशोरो में एनीमिया होने का खतरा भी ज्यादा होता है। कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे अपर मुख्य चिकित्सा अधिकारी डा. डीसी दोहरे ने कहा कि सभी को पौष्टिक भोजन करना चाहिए, जिससे शारीरिक विकास के साथ शरीर में खून की कमी नहीं होगी। उन्होंने बताया कि स्वस्थ रहने के लिए हमें हमेशा पोष्टिक भोजन ही करना चाहिए। किशोर अवस्था में बच्चों और बड़ों की तुलना में अधिक पौष्टिक तत्वों की जरूरत होती है क्योंकि इस समय हमारा मानसिक और शारीरिक विकास बहुत तेजी से होता है। इसलिए इस समय अतिरिक्त पोष्टिक तत्वों की पूर्ति के लिए सरकारी योजनाओं के तहत मिलने वाली आयरन की नीली गोली और एल्वेंडाजॉल की गोलियों का निरंतर उपयोग जरुरी है। राजकीय बालिका इंटर कॉलेज की प्रधानाचार्य पूनम मलिक ने कहा कि किशोर अवस्था के दौरान संतुलित पोषक आहार सभी को आने वाले समय में गंभीर बीमारियों जैसे कि हड्डी की कमजोरी, मोटापा, ह्दय रोग, मधुमेह होने से बचाता है। जिला पुरुष चिकित्सालय से राजेंद्र मिश्रा व जिला महिला चिकित्सालय से रश्मि श्रीवास्तव ने एनीमिया के लक्षणों की पहचान और उससे होने वाले दुष्परिणामों के बारे में विस्तार से बताया। कार्यक्रम में कुछ बच्चों के समूह बनाकर एनीमिया और आयरन पर निबंध प्रतियोगिता आयोजित की गई। प्रतियोगिता विद्यालय की कक्षा अध्यापिका ममता तिवारी, सोनाली व तृप्ति द्विवेदी की देखरेख में आयोजित की गई। प्रतियोगिता में प्रथम स्थान प्राप्त करने वाली कक्षा 12 बी 2 की विद्यार्थी रिसिका पाठक को प्रथम पुरस्कार व कक्षा 12 बी2 से अंजली पांडेय को द्वितीय एवं कक्षा 7 की विद्यार्थी सैफी को तृतीय पुरस्कार प्रदान किया गया। कार्यक्रम में महिला एवं बाल विकास विभाग से छाया चतुर्वेदी के निर्देशन में आंगनबाड़ी कर्मचारियों ने खाद्य पदार्थों का स्टॉल लगाकर जानकारी दी। इसके अतिरिक्त हीमोग्लोबिन की जांच दिनेश व दिलाशा पाल द्वारा आयरन की गोलियों का वितरण किया गया। कार्यक्रम का संचालन जिला शहरी स्वास्थ्य समन्वयक रविशंकर झा ने किया।