फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

जैन समुदाय का पर्यषण(दशलक्षण पर्व) आज से

विज्ञापन
विज्ञापन
जैन समुदाय का पर्यूषण (दशलक्षण पर्व) आज से
विज्ञापन

जैनधर्मावलंबी दस दिनों तक रखेंगे व्रत, करेंगे आराधना
अमर उजाला ब्यूरो
ललितपुर। जैन धर्म में आज शुक्रवार से दस दिन तक पर्यूषण पर्व की धूम रहेगी। 14 सितंबर से शुरू हो रहा पर्यूषण पर्व 23 सितंबर तक चलेगा, जिसके दौरान जैन श्रद्धालु व्रत-उपवास रखेंगे, इसके लिए नगर के जिनालय सजाए गए हैं। इन दिनों में जैन मंदिरों में विशेष पूजन-विधान का आयोजन भी होगा और मंदिरों में संतों द्वारा प्रवचनों के साथ ही धार्मिक सांस्कृतिक कार्यक्रमों का भी आयोजन किया जाएगा।
विज्ञापन

जैन समुदाय का पर्यूषण (दसलक्षण पर्व) महापर्व आज शुक्रवार से शुरु होगा। इस पर्व को दसलक्षण महापर्व भी कहा जाता है। इस दौरान जनपद के सभी जिनालयों में दसलक्षण पर्व की विशेष पूजन-आराधना की जाएगी। इस दौरान संतों, बाहर से आमंत्रित विद्वानों द्वारा प्रतिदिन प्रत्येक धर्म पर प्रवचन दिए जाएंगे। जैन श्रद्धालु पर्यूषण पर्व के दौरान दस दिनों तक व्रत, उपवास रखेंगे। नगर के अटा जैन मंदिर, क्षेत्रपाल, आदिनाथ मंदिर, समवसरण मंदिर, शांतिनाथ मंदिर नई बस्ती, पार्श्वनाथ मंदिर इलाइट, बड़ा मंदिर, नया मंदिर, सिविल लाइन मंदिर, बाहुबली नगर, डोड़ाघाट आदि जैन मंदिरों की विशेष सजावट की गई है। नया मंदिर में विराजमान मुनिश्री अविचलसागर महाराज के मंगल प्रवचन होंगे। पर्व के दौरान दस दिनों तक सभी मंदिरों में विविध धार्मिक व सांस्कृतिक आयोजन होंगे। जैनदर्शन के अध्येता डा. सुनील संचय इस पर्व के महत्त्व के बारे में जानकारी देते हुए बताते हैं कि यह पर्व जीवन में नया परिवर्तन लाता है। दस दिवसीय यह पावन पर्व पापों और कषायों को रग-रग से विसर्जन करने का संदेश देता है। यह एक ऐसा उत्सव या पर्व है जिसमें आत्मरत होकर व्यक्ति आत्मार्थी बनता है व अलौकिक, आध्यात्मिक आनंद के शिखर पर आरोहण करता हुआ मोक्षगामी होने का सद्प्रयास करता है। पर्युषण आत्म जागरण का संदेश देता है। यह पर्व जीवमात्र को क्रोध, मान, माया, लोभ, ईर्ष्या, द्वेष, असंयम आदि विकारी भावों से मुक्त होने की प्रेरणा देता है। उत्तम क्षमा, मार्दव, आर्जव शौच, सत्य, संयम, तप, त्याग, आकिंचन्य और ब्रह्मचर्य ये दश धर्म हैं। दस दिन तक इन धर्मों की आराधना की जाती है। इस दौरान जैन व्रती कठिन नियमों का पालन भी करते हैं, जैसे बाहर का खाना पूर्णत: वर्जित होता है, दिन में केवल एक समय ही भोजन करना आदि। बड़ी संख्या में साधक दस दिन तक निर्जला उपवास भी रखते हैं। मानवीय एकता, शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व, मैत्री, शोषणविहीन सामाजिकता, अंतरराष्ट्रीय नैतिक मूल्यों की स्थापना, अहिंसक जीवन आत्मा की उपासना शैली का समर्थन आदि तत्त्व पर्युषण महापर्व के मुख्य आधार हैं। विकृति का विनाश और विशुद्धि का विकास करना ही इस पर्व का ध्येय है। अक्षय अलया ने बताया कि संयम और आत्मशुद्धि के इस पवित्र महापर्व पर श्रद्धालु श्रद्धापूर्वक व्रत-उपवास रखते हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें