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पोषणा से रसोइया सीखेगे खाना बनाने की बारीकियां

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‘पोषणा’ से रसोइयां सीखेंगे खाना बनाने की बारीकियां
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अमर उजाला ब्यूरो
ललितपुर। प्राथमिक विद्यालयों में मिलने वाले मध्याह्न भोजन की गुणवत्ता को सुधारने के लिए रसोइयों को पोषणा फिल्म दिखाई जाएगी। इससे वह खाना बनाते समय ध्यान देने वाली बारीकियों को जान सकेंगे। मध्याह्न भोजन की गुणवत्ता की सुधार के लिए भारत सरकार और यूनिसेफ़ के संयोग से एक ‘पोषणा’ नामक फिल्म बनाई गई हैं। इसमें भोजन की योजना से जुड़े मुख्य बिंदु जैसे कि स्वास्थ्य, पोषण, सुरक्षा व पाक कला आदि पर ध्यान दिया गया है। इसके साथ ही भोजन बनाते समय की बारीकियों पर ध्यान दिया गया है। मध्याह्न भोजन प्राधिकरण, उत्तर प्रदेश द्वारा सभी बेसिक शिक्षा अधिकारियों को पत्र के माध्यम से सूचित किया गया हैं कि वह अपने संचालित मिड-डे मील में भोजन बनाने वाले रसोइयों को यह फिल्म जरूर दिखाए। वर्तमान में जिले में कुल 1 हजार 5 सौ 62 विद्यालयों में मिड-डे मील योजना चल रही हैं। इसमें कुल 4 हजार 91 रसोईये काम करते हैं। इन विद्यालयों में लगभग 1 लाख 69 हजार बच्चे रजिस्टर हैं। बेसिक शिक्षा अधिकारी के अनुसार कुल रजिस्टर बच्चों में से लगभग 60 प्रतिशत बच्चे रोज मिड-डे मील में खाना खाते हैं। ऐसे में यह बहुत जरूरी हो जाता हैं कि भोजन की गुणवत्ता अच्छी हो और उसे सही तरीके से पकाया जा रहा हों। वही इस फिल्म को दिखाए जाने के बारे में उनका कहना हैं कि जिन ग्रामीण स्तर के रसोइये में साफ सफाई और खाद्यान के रख रखाव को लेकर ज्ञान नहीं हैं, वह इस फिल्म के माध्यम से वो सब सीख पाएंगे। इसके साथ ही उन्होंने बताया कि जिले के समस्त विकासखंड के शिक्षा अधिकारी अपने अपने ब्लॉक की न्याय पंचायतों में जाकर यह फिल्म उस न्याय पंचायत में आने वाले सभी मिड डे मील पकाने वाले रसोइयों को दिखाएंगे।
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गौरतलब हो कि सर्वोच्च न्यायालय द्वारा दिनांक 28 नवम्बर 2001 को दिए गए निर्देश के क्रम में प्रदेश में दिनांक 01 सितम्बर 2004 से पका पकाया भोजन प्राथमिक विद्यालयों में उपलब्ध कराये जाने की योजना आरम्भ कर दी गयी। योजना की सफलता को दृष्टिगत रखते हुए अक्तूबर 2007 से इसे शैक्षिक दृष्टि से पिछड़े ब्लाकों में स्थित उच्च प्राथमिक विद्यालयों तथा अप्रैल 2008 से शेष ब्लाकों एवं नगर क्षेत्र में स्थित उच्च प्राथमिक विद्यालयों तक विस्तारित कर दिया गया है। वर्तमान में यह योजना प्रदेश के 1,14,460 प्राथमिक विद्यालयों एवं 54,372 उच्च प्राथमिक विद्यालयों में चल रही हैं।
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