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मूर्तियों का स्टोर रुम बनकर रह गया पुरातत्व संग्रहालय

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मूर्तियों का स्टोर रूम बनकर रह गया पुरातत्व संग्रहालय
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ललितपुर। जिले में विभिन्न स्थानों से प्राप्त छठवीं, नौंवी, दसवीं, बारहवीं, सत्रहवीं सदी तक की बेशकीमती मूर्तियों का संग्रह के लिए शहर के मुुहल्ला नेहरू नगर में लाखों की लागत से विशाल संग्रहालय करीब बीस वर्ष पूर्व तैयार किया गया था, जिसमें जनपद के विभिन्न स्थानों से देवी देवताओं की आकर्षक नक्काशीयुक्त बेशकीमती मूर्तियों को संग्रह किया गया है। लेकिन रखरखाव के अभाव में संग्रहालय भवन के फर्श की स्थिति काफी बदहाल है और यहां साफ सफाई भी नियमित नहीं होने के चलते मूर्तियों पर जहां धूल जमी रहती है, तो वहीं इस विशाल भवन में बिजली, पानी सहूलियतें सरकार से मिलने के बाद भी इंतजाम नहीं है। कई बार संग्रहालय अक्सर दिन में बंद रहने के चलते पर्यटकों को यहां मूूर्तियों का संग्रह जानना तो दूर देखने को भी नहीं मिलता है।
विंध्याचल पर्वत श्रृंखलाओं के बीच स्थित ललितपुर जनपद चंदेल कालीन पुरातत्व एवं प्राचीन संपदाओं के लिए विश्वविख्यात है। धार्मिक किंवदंतियों पर आधारित घटनाओं को आधार बनाकर उकेरी गईं प्राचीन मंदिरों में देवी देवताओं की प्रतिमाएं आज भी उस समय की लोक गाथाओं को संजोए हुए हैं। जनपद में प्राचीन देवगढ़ स्थित दशावतार और नृवराह मंदिर के अलावा दूधई, चांदपुर-जहाजपुर, नागमंदिर के आसपास क्षेत्र में भारी संख्या में पुरातत्व संपदाएं बिखरी पड़ी हैं। ऐसी ही पुरा संपदाओं को सहेजने और उनके संरक्षण के लिए शहर में नेहरूनगर में लाखों रुपये की लागत से करीब बीस वर्ष पूर्व विशाल पुरातत्व संग्रहालय भवन का निर्माण किया गया था, जिसमें विभिन्न स्थानों से लाई गई आकर्षक नक्काशी युक्त, विभिन्न मुद्राओं में देवी देवताओं की करीब 135 मूर्तियों का संग्रह किया गया है। इनमें कुचदौं से प्राप्त छठवीं सदी की सूर्य भग्न प्रतिमा, नौवी सदी की कौमारी विष्णु प्रतिमा का ऊर्ध्व परिकर, इंद्राणी प्रतिमा का ऊर्ध्व परिकर, माहेश्वरी प्रतिमा का अधोभाग, यमी प्रतिमा का अधोभाग, चामुंडा प्रतिमा का अधोभाग, वैष्णवी प्रतिमा का अधोभाग, दसवीं सदी की बिजरौठा से प्राप्त की गई सूर्य भगवान की प्रतिमा, कुचदौं से प्राप्त भगवान बराह की प्रतिमा, रथिका में कुबेर की प्रतिमा, विष्णु प्रतिमा का ऊर्ध्व भाग का संग्रह यहां किया गया है। इसी प्रकार इस संग्रहालय में धौरीसागर से प्राप्त की गई 11वीं सदी की ब्रह्मा-ब्रह्माणी की प्रतिमा, सप्त मातृका पट्ट का भग्न भाग, कुचदौं से प्राप्त की गई 11वीं सदी की कार्तिकेय की प्रतिमा, बिजरौठा से प्राप्त की गई 11वीं सदी की पार्वती की खंडित प्रतिमा, धौरीसागर से प्राप्त की गई 11वीं सदी की ही नटराज-शिव प्रतिमा के अलावा यहां धौरी सागर से प्राप्त की गई 12वीं सदी की यम की प्रतिमा, उमा महेश की प्रतिमा, धौरी सागर से ही प्राप्त 12वीं सदी की रथिका में अंकित शिव-पार्वती की प्रतिमा को संकलन कर यहां संरक्षित किया गया है। इसके साथ ही इसमें बिजरौठा से प्राप्त की गई सत्रहवीं सदी सती पट्टिका की प्रतिमा भी संग्रहित कर रखी गई है। इस संग्रहालय में विभिन्न स्थानों से प्राप्त की गई करीब 135 प्रतिमाओं को संरक्षित किया गया है। लेकिन वर्तमान में इस संग्रहालय की स्थिति काफी दयनीय बनी हुई है। रखरखाव के अभाव में इनमें से अधिकांश मूर्तियों की पहचान के लिए नामपट्टिकाएं ही नहीं है, जिससे यहां आने वाले पर्यटकों को मूर्तियों की पहचान करना भी मुश्किल हो जाता है और उसके इतिहास की जानकारी नहीं लग पाती है। इसके साथ ही इसके भवन के जमीन का फर्श ही जगह-जगह चटख गया है, जो इसकी बदहाली की कहानी बयां करता है। यहां बिजली व पानी के लिए सरकारी सहूलियतें तो मुहैया कराई गई थी, लेकिन इसे भी व्यवस्थित नहीं किए जाने के कारण इंतजाम नहीं है। यहां वर्षों पूर्व पानी के लिए बोरिंग भी कराई गई, लेकिन मोटर खराब होने के कारण अब इसमें जंग लग चुकी है। वहीं बिजली के लिए यहां दस केवीए का ट्रांसफार्मर तक परिसर में स्थापित है, लेकिन संग्रहालय में बिजली फिटिंग के नाम पर मात्र गार्ड के रुम में बिखरे फैले तारों का जाल व बोर्ड ही नजर आते हैं। जिससे यहां सुरक्षा गार्डों को खुद ही बल्व लगाकर रात बितानी होती है। कई दिनों तक सफाई नहीं होने के कारण संग्रहालय में मूर्तियों पर धूल जमा रहती है, जो यहां के इंतजामों की पोल खोलती नजर आती है।
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नेहरूनगर में स्थित पुरातत्व संग्रहालय के भवन की मरम्मतीकरण के लिए लखनऊ में निदेशक को पत्राचार किया गया है। सफाई के लिए महीने में झांसी से कर्मचारी भेजे जाते हैं और पानी की व्यवस्था के लिए डीएम के माध्यम से हैंडपंप लगवाए जाने का आश्वासन मिला है। मूूर्तियों के आगे नाम पट्टिकाओं की व्यवस्था शीघ्र ही कराई जाएगी।
- एसके दुबे, क्षेत्रीय पुरातत्व अधिकारी।
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